महतारी वंदन योजना का पैसा पुरुष के खाते में, सत्यापन व्यवस्था फेल
समझें क्या है पूरा मामला
महतारी वंदन योजना खैरागढ़ परियोजना में एक बड़ी चूक सामने आई है। गांव मुढ़ीपार के तिलोक साहू नाम के पुरुष का आवेदन योजना में दर्ज हो गया। आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर, दोनों स्तर पर इसे सत्यापित भी कर दिया गया। इसके बाद उसके खाते में लगातार महीनों तक पैसा आता रहा। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आवेदन में हितग्राही का नाम तिलोक साहू और पति का नाम भी तिलोक साहू ही दर्ज था।
कैसे हुआ यह पूरा खेल
मामला तब शुरू हुआ जब मुढ़ीपार सेक्टर की आंगनबाड़ी से जुड़ा एक आवेदन ऑनलाइन दर्ज हुआ। आवेदन में हितग्राही तिलोक साहू और पति का नाम भी तिलोक साहू लिखा गया। किसी सामान्य आवेदन में यह गलती तुरंत पकड़ में आ जाती। लेकिन यहां न आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने ध्यान दिया, न सुपरवाइजर ने।
रिकॉर्ड में साफ लिखा है कि दोनों स्तर पर आवेदन की स्थिति सत्यापित है। यानी योजना के तहत जो जांच होनी चाहिए थी, वह सिर्फ कागजों पर हुई। नतीजा यह हुआ कि एक पुरुष को महिलाओं की योजना का सीधा फायदा मिलने लगा।
बारह महीने तक चुपचाप आता रहा पैसा
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह गड़बड़ी किसी को महीनों तक नजर ही नहीं आई। ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड बताता है कि खाते में 12 महीने तक योजना की राशि लगातार पहुंचती रही। न विभाग को शक हुआ, न किसी अधिकारी ने रिकॉर्ड खंगाला। सवाल यह उठता है कि अगर यह मामला सामने नहीं आता, तो क्या भुगतान आज भी जारी रहता। यह सिर्फ एक गलती नहीं, बल्कि पूरे सत्यापन सिस्टम की नींद को उजागर करने वाला मामला है।
आवेदक ने बताई अपनी कहानी
तिलोक साहू ने खुद अपनी सफाई दी है। उसका कहना है कि वह सीएससी (CSC - Common Service Centre) सेंटर चलाता है। योजना का पोर्टल शुरू होने के शुरुआती दिनों में उसने प्रक्रिया समझने और ट्रायल के लिए खुद आवेदन कर दिया था।
उसके मुताबिक खाते में कुल 10 हजार रुपए आए थे, इसके बाद भुगतान रुक गया। विभाग की रिकवरी कार्रवाई के बाद उसने यह राशि वापस भी कर दी।
रिकॉर्ड में एक और गड़बड़ी
मामला यहीं खत्म नहीं होता। ऑनलाइन रिकॉर्ड में 12 महीने के भुगतान की जानकारी है, लेकिन विभाग के पत्र में सिर्फ 10 हजार रुपए की वसूली का जिक्र है। खैरागढ़ की एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना ने 3 जुलाई को बैंक को यह वसूली का पत्र भेजा था। अगर 12 महीने पैसा गया, तो वसूली सिर्फ 10 महीने के बराबर राशि की क्यों हुई। बाकी भुगतान कहां गया, इसका जवाब अभी विभाग के पास नहीं है।
अधिकारी बोलीं, रिकवरी हो चुकी है
परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव का कहना है कि संबंधित हितग्राही से रिकवरी कर ली गई है। बाकी जानकारी के लिए उन्होंने रिकॉर्ड देखने की बात कही। लेकिन असली सवाल अभी बाकी हैं। एक पुरुष का आवेदन योजना में कैसे दर्ज हुआ। आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर स्तर पर किस आधार पर इसे सत्यापित किया गया। 12 महीने तक भुगतान क्यों नहीं रुका। इन सवालों के जवाब अभी विभागीय जांच पर टिके हैं।
अभी भी अटका है मामला
वर्तमान में आवेदन की स्थिति परमानेंट होल्ड पर है। साथ ही लाभ त्याग अनुरोध स्वीकृत दिखाया गया है। यानी कागजों पर मामला बंद जरूर दिख रहा है, लेकिन जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है। क्या सिर्फ राशि वापस लेना काफी है, या गलत सत्यापन करने वालों पर भी कार्रवाई होगी, इस पर अब सबकी नजर है।
FAQ
- महतारी वंदन योजना क्या है?
उत्तर: यह छत्तीसगढ़ सरकार की योजना है जो पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देती है। इसका मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना का लाभ केवल पात्र महिला हितग्राहियों को ही मिलता है। - सरकारी योजनाओं में सत्यापन (verification) प्रक्रिया क्यों जरूरी होती है?
उत्तर: सत्यापन से यह सुनिश्चित होता है कि योजना का लाभ सही और पात्र व्यक्ति तक ही पहुंचे। यह फर्जी और अपात्र आवेदनों को रोकने का मुख्य तरीका है। इसमें कई स्तर पर जांच होती है, जैसे आंगनबाड़ी और सुपरवाइजर स्तर। - सीएससी सेंटर क्या होता है?
उत्तर: सीएससी (CSC - Common Service Centre) एक ऐसा केंद्र होता है जहां लोगों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़े ऑनलाइन काम कराने में मदद मिलती है। यह गांव और कस्बों में सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाता है। इसे आमतौर पर निजी संचालक चलाते हैं।
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