आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को HC ने दी बड़ी राहत, 48 महीने का एरियर्स, 6% ब्याज के साथ भुगतान के आदेश
Neel Tiwari | Apr 30, 2026, 19:58 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 48 महीने के एरियर्स का 6% ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया। ग्रेच्युटी का भुगतान भी कानूनी तरीके से होगा।
News In Short
- 2019 से 2023 तक का 48 माह का एरियर्स देने के आदेश।
- 6% वार्षिक ब्याज के साथ करना होगा भुगतान।
- 90 दिनों के भीतर पूरी राशि चुकाने का निर्देश।
- ग्रेच्युटी तय करने में सरकार का मनमाना नियम निरस्त।
- अब Payment of Gratuity Act के फार्मूले से मिलेगा भुगतान।
News In Detial
चार साल के बकाया पर हाईकोर्ट की सख्ती
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि जून 2019 से जून 2023 के बीच जो बढ़ा हुआ मानदेय कार्यकर्ताओं को नहीं दिया गया, वह उनका वैधानिक अधिकार है।
अदालत ने यह भी माना कि इतने लंबे समय तक भुगतान न होना न केवल प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि इससे कार्यकर्ताओं के अधिकारों का हनन भी हुआ है। इस आदेश के बाद अब राज्य सरकार पर यह बाध्यता आ गई है कि वह चार वर्षों का पूरा बकाया तत्काल प्रभाव से चुकाए।
90 दिन में भुगतान, 6% ब्याज भी देना होगा
खास बात यह है कि कोर्ट ने केवल मूल राशि के भुगतान तक ही आदेश को सीमित नहीं रखा, बल्कि इस देरी को अनुचित मानते हुए 6% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश भी दिया है।
इसका मतलब यह है कि कार्यकर्ताओं को अब न सिर्फ उनका रुका हुआ पैसा मिलेगा, बल्कि उस पर ब्याज भी मिलेगा। यह आदेश सरकार की जवाबदेही तय करने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी लापरवाही पर अंकुश लगाने वाला भी माना जा रहा है।
कैसे रुका था वेतन बढ़ोतरी का लाभ
यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर कार्यकर्ताओं की आय में सुधार लाने के उद्देश्य से की गई थी। लेकिन उसी समय तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने राज्य के हिस्से से दी जाने वाली राशि में कटौती कर दी, जिससे यह बढ़ोतरी कागजों तक सीमित रह गई और कार्यकर्ताओं को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाया। इस निर्णय के कारण कार्यकर्ताओं का वेतन पहले जैसा ही बना रहा।
मोहन सरकार ने लागू किया, पर एरियर्स नहीं मिला
यानी कार्यकर्ताओं को बढ़ा हुआ वेतन तो आगे मिलने लगा, लेकिन पिछले चार वर्षों का उनका बकाया लगातार लंबित रहा। इसी लंबित एरियर्स को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। जिस पर अब जस्टिस विशाल धगत की सिंगल बेंच ने स्पष्ट और निर्णायक आदेश पारित किया है।
ग्रेच्युटी पर भी कोर्ट का बड़ा फैसला
अधिवक्ता के अनुसार, यह व्यवस्था पूरी तरह मनमानी और गैरकानूनी थी, क्योंकि ग्रेच्युटी का निर्धारण एक तय कानूनी प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। कोर्ट ने इस मनमाने आदेश को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी का भुगतान केवल कानून के प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
अब कानून के फार्मूले से तय होगी ग्रेच्युटी
इसका सीधा असर यह होगा कि पहले जहां कार्यकर्ताओं को मात्र एक लाख या 1.25 लाख रुपए तक सीमित ग्रेच्युटी मिल रही थी, अब वही राशि बढ़कर लगभग 2.5 लाख से तीन लाख रुपए तक पहुंच सकती है। यह बदलाव कार्यकर्ताओं के लिए रिटायरमेंट के समय एक बड़ी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।
लाखों महिलाओं को मिलेगा सीधा फायदा
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