मानिकपुर खदान विस्तार : पूर्व मंत्री ने खोला मोर्चा, दांव पर ग्रामीणों का अस्तित्व, SECL में मुआवजे का खेल
NEWS IN SHORT
- मुआवजे में धांधली और पुराने सर्वे से ग्रामीण नाराज।
- जमीन और मकान बचाने ग्रामीणों ने खोला मोर्चा।
- SECL की मनमानी से ग्रामीणों का भविष्य दांव पर।
- नए मकानों को मुआवजे से बाहर रखना बड़ा अन्याय।
- बाजार दर पर मुआवजा और नौकरी की उठी मांग।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ की औद्योगिक नगरी कोरबा के मानिकपुर खदान विस्तार परियोजना ने एक बार फिर विकास और विस्थापन के बीच की कड़वी जंग को हवा दे दी है। एक तरफ SECL कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ भिलाई खुर्द सहित आसपास के गांवों में 'अस्तित्व का संकट' खड़ा हो गया है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस मुद्दे पर ग्रामीणों का पक्ष लेते हुए SECL प्रबंधन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है।
तकनीक की आड़ में हक मारने की साजिश
इस पूरे विवाद के केंद्र में है SECL का 'पुराना ड्रोन सर्वे'। प्रशासनिक विफलता का आलम यह है कि प्रबंधन सालों पुराने सर्वे के आधार पर आज के मुआवजे का निर्धारण कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिग्रहण क्षेत्र में जो मकान पिछले कुछ वर्षों में बनकर तैयार हुए हैं, उन्हें सर्वे में शामिल ही नहीं किया गया।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इसे 'मुआवजे में बड़ा खेला' करार देते हुए CMD को लिखे पत्र में सवाल उठाया है कि आखिर नई बसाहटों और नव-निर्मित मकानों को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है? यह तकनीकी खामी नहीं, बल्कि ग्रामीणों को उनके उचित हक से वंचित रखने की सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है।
पुराने जख्म और अधूरी उम्मीदें
मानवीय दृष्टिकोण से देखें तो भिलाई खुर्द क्रमांक 1, 2 और 3 के ग्रामीणों की पीड़ा गहरी है।
धोखा: पूर्व में लगभग 80 एकड़ भूमि के अधिग्रहण के दौरान ग्रामीणों को नौकरी और बेहतर पुनर्वास का वादा किया गया था, जो आज तक कागजों तक सीमित है।
नई त्रासदी: अब फिर से 60 एकड़ भूमि अधिग्रहण की तलवार लटक रही है।
आजीविका का अंत: खेती की जमीन छीन जाने के बाद स्थानीय युवाओं के पास न तो रोजगार है और न ही भविष्य की कोई निश्चित योजना।
"यह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, ग्रामीणों की विरासत है। प्रबंधन की संवेदनहीनता ने लोगों को अपने ही घर में बेगाना बना दिया है।" - जयसिंह अग्रवाल, पूर्व मंत्री
तीन सूत्रीय मांगें: न्याय की पुकार
पूर्व मंत्री ने प्रबंधन के सामने स्पष्ट चेतावनी रखी है। यदि इन तीन बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन होगा:
1.पारदर्शी मुआवजा: सभी प्रभावितों को वर्तमान बाजार दर पर मुआवजा मिले।
2.नया सर्वे: पुराने ड्रोन सर्वे को रद्द कर, मौके पर फिर से सर्वे हो ताकि नए मकानों को शामिल किया जा सके।
3.स्थायी रोजगार: प्रभावित परिवारों के युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी दी जाए।
निष्कर्ष
प्रशासनिक उदासीनता और मुआवजे में अनियमितता ने मिलकर मानिकपुर क्षेत्र में असंतोष की चिंगारी सुलगा दी है। यदि SECL के उच्च अधिकारियों और क्षेत्रीय महाप्रबंधक ने समय रहते इस मानवीय और प्रशासनिक संकट का समाधान नहीं निकाला, तो यह चिंगारी एक बड़े जन-आक्रोश का रूप ले सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
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