छत्तीसगढ़ नीट यूजी 2026 : जानिए क्यों इस बार बढ़ेगा कटऑफ

Aishwarya Dwivedi | Jul 19, 2026, 15:40 IST
MBBS सीटों में बढ़ोतरी के बावजूद NEET-UG कट-ऑफ अधिक
छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस की 595 सीटें बढ़ने के बावजूद नीट यूजी 2026 का कटऑफ कम नहीं होगा। इस बार छात्रों के हाई स्कोर और भारी प्रतिस्पर्धा के कारण सरकारी कॉलेजों में दाखिला मिलना बेहद मुश्किल हो गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में इस साल एमबीबीएस की 595 सीटें बढ़ी हैं। सीटें बढ़ने के बाद भी सरकारी कॉलेजों में एडमिशन मुश्किल है। इस बार नीट परीक्षा में छात्रों ने हाई स्कोर किया है। ज्यादा नंबर आने की वजह से कटऑफ बढ़ने की उम्मीद है। राज्य में काउंसलिंग की प्रक्रिया अगले महीने शुरू हो सकती है।



सीटें बढ़ीं फिर भी मुकाबला कड़ा

छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के लिए एक बड़ी खबर आई है। प्रदेश में इस साल एमबीबीएस (MBBS - Bachelor of Medicine, Bachelor of Surgery) की 595 सीटें बढ़ गई हैं। यह छात्रों के लिए एक बड़ी राहत हो सकती थी। लेकिन इस बार सरकारी कॉलेजों में दाखिला आसान नहीं होगा।



नीट यूजी (NEET UG - National Eligibility cum Entrance Test Undergraduate) का कटऑफ इस बार ऊपर जा सकता है। इसका मुख्य कारण परीक्षा में छात्रों का शानदार प्रदर्शन है। इस साल नीट का रिजल्ट बहुत हाई स्कोर वाला रहा है। प्रदेश के दो छात्रों ने संयुक्त रूप से 690 अंक हासिल किए हैं।



पिछले साल के मुकाबले यह स्कोर काफी ज्यादा है। पिछले साल ऑल इंडिया टॉपर को 684 अंक मिले थे। तब नीट का प्रश्न पत्र काफी कठिन माना गया था। इस वजह से पिछले साल कटऑफ काफी नीचे गिर गया था। पिछले साल 474 अंक पाने वाले को भी सरकारी कॉलेज मिल गया था। इस बार ऐसी स्थिति बनने की उम्मीद बेहद कम है।



नए और पुराने कॉलेजों का गणित

छत्तीसगढ़ में इस साल चिकित्सा शिक्षा का बड़ा विस्तार हुआ है। प्रदेश में पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता मिली है। इसके साथ ही एक नया निजी मेडिकल कॉलेज भी खुला है। इन नए कॉलेजों के आने से कुल 350 सीटें बढ़ी हैं।



नए सरकारी कॉलेज कवर्धा, जांजगीर-चांपा और मनेंद्रगढ़ में खोले गए हैं। इनके अलावा गीदम और कुनकुरी में भी नए सरकारी कॉलेज शुरू हुए हैं। इन सभी पांच सरकारी कॉलेजों में 50-50 सीटें तय की गई हैं। इस तरह सरकारी क्षेत्र में 250 सीटें बढ़ गई हैं। निजी क्षेत्र में बालाजी ग्रुप के मां पद्मावती कॉलेज को मान्यता मिली है। इस कॉलेज को एमबीबीएस की 100 सीटें दी गई हैं।



पुराने मेडिकल कॉलेजों में भी सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। पुराने कॉलेजों में कुल 245 सीटें जोड़ी गई हैं। नेहरू मेडिकल कॉलेज में 20 नई सीटें बढ़ाई गई हैं। जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में 25 सीटें बढ़ी हैं। रिम्स में 100 सीटें और अभिषेक कॉलेज में 50 सीटें बढ़ी हैं। रावतपुरा कॉलेज में भी 50 सीटों का इजाफा हुआ है।



हाई स्कोर ने बिगाड़ा समीकरण

इस साल प्रदेश से करीब 45 हजार छात्र नीट परीक्षा में शामिल हुए थे। इनमें से लगभग 22 हजार छात्रों ने परीक्षा क्वालीफाई की है। केंद्र सरकार ने पिछले बजट में देश भर में सीटें बढ़ाने का एलान किया था। सरकार ने पांच साल में 75 हजार सीटें बढ़ाने की बात कही थी। इसी योजना का बड़ा फायदा छत्तीसगढ़ को भी मिला है।



साल 2024 के आंकड़ों को देखें तो स्थिति काफी अलग थी। तब नीट का पर्चा काफी सरल आया था। उस समय निजी कॉलेज में सबसे हाई स्कोर 653 अंक था। वहीं सरकारी कॉलेज में ईडब्ल्यूएस (EWS - Economically Weaker Section) कोटे से 579 अंक पर सीट मिली थी। निजी कॉलेजों में कई ऐसे छात्र थे जिनका स्कोर सरकारी कॉलेज वालों से ज्यादा था।



आमतौर पर छात्र पहले सरकारी कॉलेजों को चुनते हैं। सरकारी सीट न मिलने पर ही वे निजी कॉलेजों का रुख करते हैं। इसी वजह से निजी कॉलेजों का कटऑफ सरकारी से कम रहता है। निजी कॉलेजों के मैनेजमेंट कोटे में दूसरे राज्यों के छात्र भी आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा छात्र पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के होते हैं।



एनआरआई कोटे पर बड़ा खुलासा

निजी मेडिकल कॉलेजों में सीटों के आवंटन को लेकर एक चौंकाने वाला ट्रेंड दिखा है। पिछले साल एनआरआई (NRI - Non-Resident Indian) कोटे की सीटों पर बहुत कम स्कोर पर दाखिला हो गया। महज 113 अंक पाने वाले छात्र को भी एमबीबीएस सीट मिल गई।



विशेषज्ञों के अनुसार अब एनआरआई कोटा पूरी तरह स्पांसरशिप पर आधारित हो गया है। इसके तहत कोई भी एनआरआई किसी स्थानीय छात्र को अपना रिश्तेदार बता देता है। इस तरह वे छात्र को आसानी से एनआरआई कोटे का लाभ दिला देते हैं। हालांकि अधिकारी इस बात से पूरी तरह इनकार करते हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग का दावा है कि सभी एडमिशन पूरी तरह मेरिट से होते हैं।



निजी कॉलेजों में फीस का विवाद

छत्तीसगढ़ के निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस को लेकर विवाद चल रहा है। साल 2024 में कुछ कॉलेजों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। वे सालाना फीस को बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना चाहते थे।



हाईकोर्ट ने इस मामले को फीस विनियामक कमेटी के पास भेज दिया था। कमेटी ने निजी कॉलेजों की इस मांग को सीधे खारिज कर दिया। कमेटी का तर्क है कि छत्तीसगढ़ में लोगों की प्रति व्यक्ति आय कम है। पड़ोसी राज्यों की स्थिति को देखकर ही यहां फीस तय की गई है। दूसरी तरफ कॉलेजों का कहना है कि यहां फीस दूसरे राज्यों से बहुत कम है। इसलिए कॉलेज प्रबंधन लगातार फीस बढ़ाने की मांग पर अड़ा हुआ है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में इस साल एमबीबीएस की कुल कितनी सीटें बढ़ी हैं?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ में इस साल एमबीबीएस की कुल 595 सीटें बढ़ी हैं। इनमें से 350 सीटें नए कॉलेजों को मिली हैं और 245 सीटें पुराने कॉलेजों में बढ़ाई गई हैं।
  2. छत्तीसगढ़ में स्टेट कोटे की मेडिकल काउंसलिंग कब से शुरू होगी?
    उत्तर: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से रिजल्ट का पूरा डेटा मिलने के बाद तैयारी होगी। ऑल इंडिया कोटे का शेड्यूल जारी होने के बाद अगले महीने के अंत तक राज्य की काउंसलिंग शुरू हो सकती है।
  3. सीटें बढ़ने के बाद भी नीट यूजी 2026 का कटऑफ क्यों नहीं घटेगा?
    उत्तर: इस साल नीट परीक्षा का रिजल्ट बहुत हाई स्कोर वाला रहा है। राज्य के टॉपरों ने 690 अंक हासिल किए हैं, जिसके कारण प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और कटऑफ ऊपर रहने का अनुमान है।

यह खबरें भी पढ़ें...

5 मेडिकल कॉलेज रिजेक्ट, 250 एमबीबीएस सीटें गईं...जिम्मेदार कौन?



एमपी में एआई से बनी रही एमबीबीएस डिग्री, नकली डॉक्टर कर रहे इलाज, जांच के आदेश



छत्तीसगढ़ में अब सिर्फ ऑन-कॉल रहेंगे विशेषज्ञ डॉक्टर, आपातकालीन सेवाओं की कमान संभालेंगे एमबीबीएस चिकित्सा अधिकारी



एमबीबीएस छात्रों ने फर्जी वारंट भेजकर युवक से वसूले 1 लाख, ऐसे हुआ मामले का खुलासा



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • NEET UG
  • चिकित्सा शिक्षा विभाग
  • EWS
  • NRI