NMC की आपत्तियों के बीच मेडिकल कॉलेजों में डीन और अधीक्षकों की तैनाती

VINAY VERMA | Jun 24, 2026, 22:34 IST
5 मेडिकल कॉलेजों को मिले नए डीन
छत्तीसगढ़ के 5 नए मेडिकल कॉलेजों में NMC की आपत्तियों के बीच सरकार ने डीन और अस्पताल अधीक्षकों की पूर्णकालिक नियुक्तियां की हैं। इसका उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को मजबूत कर मेडिकल शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाना है।

Raipur। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने संशोधित आदेश जारी कर डीन, अस्पताल अधीक्षक और संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक की नियुक्तियां की हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब इन नए मेडिकल कॉलेजों को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने विभिन्न स्तरों पर आपत्तियां दर्ज की थीं और मान्यता प्रक्रिया अटकी हुई है।



NMC की आपत्तियों के बाद सक्रिय हुई सरकार

जानकारी के अनुसार मनेंद्रगढ़, कुनकुरी (जशपुर), कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और दंतेवाड़ा में स्थापित नए मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिलाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। NMC निरीक्षण के दौरान फैकल्टी, प्रशासनिक ढांचे और अस्पताल प्रबंधन से जुड़ी कमियां सामने आई थीं। माना जा रहा है कि इन्हीं कमियों को दूर करने और संस्थानों में जवाबदेही तय करने के लिए अनुभवी चिकित्सकों को पूर्णकालिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।



अतिरिक्त प्रभार हटाकर दिए गए पूर्णकालिक डीन

पहले इन कॉलेजों का संचालन अतिरिक्त प्रभार के भरोसे किया जा रहा था। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अब व्यवस्था में बदलाव करते हुए पूर्णकालिक डीन नियुक्त किए हैं। मनेंद्रगढ़ मेडिकल कॉलेज में डॉ. रंजना सिंह ठाकुर, कुनकुरी में डॉ. एस.पी. कुजूर, कबीरधाम में डॉ. अनुराग कौशिक, जांजगीर-चांपा में डॉ. राकेश नहरेले और दंतेवाड़ा में डॉ. टीक सिंहा को डीन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।



अस्पतालों के संचालन के लिए भी अलग जिम्मेदारी

सरकार ने मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए अलग से अस्पताल अधीक्षकों की नियुक्ति भी की है। कुनकुरी में डॉ. बी.आर. सिंह को संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक बनाया गया है। वहीं मनेंद्रगढ़ में डॉ. अरुणेश सिंह, कबीरधाम में डॉ. सुरेश कुमार ठाकुर, जांजगीर-चांपा में डॉ. ए.आर. बेन और दंतेवाड़ा में डॉ. भगत बघेल को अस्पताल अधीक्षक का दायित्व सौंपा गया है।





मान्यता के लिए प्रशासनिक ढांचे को किया जा रहा मजबूत

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का मानना है कि किसी भी मेडिकल कॉलेज की मान्यता में फैकल्टी, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, बुनियादी सुविधाएं और प्रशासनिक नेतृत्व अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में डीन और अस्पताल अधीक्षकों की नियमित नियुक्ति को NMC की शर्तों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि अगले निरीक्षण तक सभी संस्थानों में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं।





प्रदेश में मेडिकल शिक्षा विस्तार की बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ सरकार मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए लगातार नए कॉलेज खोल रही है, लेकिन इन संस्थानों को NMC की मान्यता दिलाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में ताजा नियुक्तियों को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मान्यता हासिल करने की रणनीतिक कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है। यदि कॉलेज NMC की सभी शर्तें पूरी कर लेते हैं, तो प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ा लाभ मिल सकता है।



FAQ

  1. यह प्रशासनिक फेरबदल क्यों किया गया है?
    सरकार ने NMC की आपत्तियों को दूर करने और मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया तेज करने के लिए यह कदम उठाया है।
  2. किन मेडिकल कॉलेजों में नई नियुक्तियां हुई हैं?
    मनेंद्रगढ़, कुनकुरी, कबीरधाम, जांजगीर-चांपा और दंतेवाड़ा के मेडिकल कॉलेजों में नई नियुक्तियां की गई हैं।
  3. क्या यह बदलाव स्थायी समाधान माना जा रहा है?
    हां, सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक ढांचे को मजबूत कर NMC की शर्तों को पूरा करना और कॉलेजों को मान्यता दिलाना है।

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