करोड़ों के आलीशान बंगले मिलने पर भी मंत्रियों को पुरानों का मोह, स्पीकर समेत चार माननीयों पर दो सरकारी आवास
पुराने और नए बंगलों पर साल में करीब 6 करोड़ रुपए का सालाना मेंटनेंस का खर्च है। मंत्रियों के पास होने के कारण इनका मेंटनेंस भी बराबर किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार के नियमों के मुताबिक एक मंत्री के पास एक बंगला रखने का अधिकार है फिर भी कुछ मंत्री दो बंगले रखे हुए है। दूसरी ओर 10 मंत्रियों ने नए आवास मिलने के बाद पुराने बंगले छोड़ दिए हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नए आवास उपलब्ध हैं तो पुराने सरकारी बंगलों को बरकरार रखने की जरूरत क्या है। खासकर तब, जब दोनों जगहों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर करोड़ों रुपये का खर्च हो रहा है। पुराने बंगलों के रखरखाव पर पहले करीब 3 करोड़ रुपये सालाना खर्च होते थे, जबकि दोनों जगहों की व्यवस्था के लिए उद्यानिकी विभाग ने करीब 6 करोड़ रुपये की मांग की थी।
इन माननीयों के पास दो बंगले :
- डॉ रमन सिंह - विधानसभा अध्यक्ष
- श्याम बिहारी जायसवाल - स्वास्थ्य मंत्री
- ओपी चौधरी - वित्त मंत्री
- टंकराम वर्मा - राजस्व मंत्री
इन्होंने छोड़ दिया पुराना बंगला :
- अरुण साव - डिप्टी सीएम
- विजय शर्मा - डिप्टी सीएम, इनके पुराने बंगले में कमिश्नरेट बना है।
- रामविचार नेताम - कृषि मंत्री
- केदार कश्यप - वन मंत्री
- दयालदास बघेल - खाद्य मंत्री
- लखनलाल देवांगन - उद्योग मंत्री
- लक्ष्मी राजवाड़े - महिला एवं बाल विकास मंत्री
- राजेश अग्रवाल - पर्यटन मंत्री
- गुरु खुशवंत साहेब - रोजगार मंत्री
- गजेंद्र यादव - स्कूल शिक्षा मंत्री
164 आवासों की परियोजना पर 591 करोड़ :
नवा रायपुर के सेक्टर-24 में मुख्यमंत्री निवास, राजभवन, विधानसभा अध्यक्ष के आवास, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के आवास समेत बड़े पैमाने पर सरकारी आवास तैयार किए गए हैं। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार करीब 164 आवासों वाली इस परियोजना की लागत लगभग 591.75 करोड़ रुपये बताई गई है।
इसमें केवल मंत्रियों के बंगले शामिल नहीं हैं, बल्कि मुख्यमंत्री निवास, राजभवन, स्पीकर हाउस, अधिकारियों के आवास और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल हैं। केवल नए मुख्यमंत्री निवास की लागत करीब 65 करोड़ रुपये है। नए मंत्री आवासों में कई बंगले करीब दो एकड़ क्षेत्र में बनाए गए हैं और इनमें आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
नए बंगलों पर भी लाखों का अतिरिक्त खर्च :
दिलचस्प बात यह है कि नए आवास तैयार होने के बाद भी इनमें लगातार अतिरिक्त निर्माण और बदलाव का काम चल रहा है। 2026 में नवा रायपुर के मंत्री आवास M-02 से M-08 में मोडीफिकेशन के लिए करीब 93.20 लाख रुपये का टेंडर सामने आया। वहीं M-09, M-10, M-11, M-12, M-14 और M-16 में अतिरिक्त निर्माण के लिए करीब एक करोड़ रुपये का टेंडर निकला। इससे पहले भी मंत्री आवासों के लिए करीब 94.50 लाख रुपये का अलग काम सामने आया था।
दोनों जगह मेंटनेंस का खर्च करीब 6 करोड़ :
नए और पुराने दोनों स्थानों पर सरकारी बंगलों की देखरेख भी सरकार के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रही है। पहले रायपुर के पुराने सरकारी बंगलों के रखरखाव पर करीब 3 करोड़ रुपये सालाना खर्च होते थे। नए नवा रायपुर के आवास जुड़ने के बाद दोनों जगहों के बंगलों की देखभाल के लिए उद्यानिकी विभाग ने करीब 6 करोड़ रुपये की मांग की थी।
बंगलों की देखभाल के लिए काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों की संख्या भी करीब 200 से बढ़ाकर 350 किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसमें बागवानी, सफाई और परिसर के रखरखाव से जुड़े काम शामिल हैं। इस तरह एक तरफ सरकार ने मंत्रियों के लिए नवा रायपुर में करोड़ों रुपये की लागत से नए और आधुनिक आवास तैयार किए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुराने रायपुर के कुछ सरकारी बंगले अब भी मंत्रियों के पास बने हुए हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नए आवास उपलब्ध करा दिए गए हैं तो पुराने बंगलों को खाली कराकर उनका उपयोग दूसरे सरकारी कामों के लिए क्यों नहीं किया जा रहा। पुराने और नए दोनों परिसरों के रखरखाव पर होने वाला खर्च अंततः सरकारी खजाने पर ही पड़ता है।
पुराने बंगले का मोह क्यों :
मंत्रियों के करीबी लोग कहते हैं कि पुराने बंगलों से मोह सिर्फ इतना है कि यहां पर आम जनता और कार्यकर्ताओं से मिलना मंत्री के लिए सुलभ होता है। नवा रायपुर के बंगलों की दूरी करीब 30 किलोमीटर होने से वहां न तो आम कार्यकर्ता पहुंच पाता है और न ही आम जनता। यही कारण है कि मंत्री रायपुर में भी अपना कार्यालय बनाए हुए हैं। इन कार्यालयों में मंत्रियों के रहने से जनता के काम आसानी से पूरे हो जाते हैं। हालांकि सभी मंत्री नवा रायपुर में शिफ्ट हो गए लेकिन पुराने सरकारी आवासों पर उनके नाम की नेम प्लेट लटकी हुई है।