नाबालिग को कार की चाबी देना पड़ा भारी, 3 मौतों पर पिता को राहत नहीं

Umeshwari Baghel | Jul 09, 2026, 16:04 IST
नाबालिग को कार देना पिता को पड़ा भारी
बिलासपुर हाईकोर्ट ने 3 लोगों की मौत वाले सड़क हादसे में नाबालिग बेटी को कार की चाबी देने वाले पिता की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कार्रवाई रद्द करने से इनकार किया।

समझें क्या है पूरा मामला

Bilaspur। सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत के मामले में नाबालिग बेटी को वाहन चलाने की अनुमति देने वाले पिता को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पिता की याचिका खारिज करते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत की कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में अपराध की सामग्री मौजूद है, इसलिए इस स्तर पर पूरी कार्यवाही खत्म नहीं की जा सकती।



मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। याचिका रायगढ़ निवासी घनश्याम महिलाने की ओर से दायर की गई थी। घनश्याम पर आरोप है कि उन्होंने अपनी नाबालिग बेटी को कार की चाबी दी, जिसके बाद हुए हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई।



अक्टूबर 2025 में हुआ था दर्दनाक हादसा

यह पूरा मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के कापू रोड स्थित छाल मोड़ खमहार के पास एक कार हादसा हुआ था। हादसे में तीन लोगों की जान चली गई थी। मृतकों में एक महिला और दो पुरुष शामिल थे।



पुलिस जांच में सामने आया कि दुर्घटना के समय कार नाबालिग लड़की चला रही थी। पुलिस के अनुसार, पिता घनश्याम महिलाने को यह जानकारी थी कि उनकी बेटी की उम्र वाहन चलाने के लिए कानूनी रूप से निर्धारित सीमा से कम है। इसके बावजूद उन्होंने उसे कार चलाने की अनुमति दी और वाहन की चाबी सौंप दी।



इसी आधार पर पुलिस ने पिता को भी मामले में आरोपी बनाया। पुलिस का कहना था कि नाबालिग को वाहन देना खुद में गंभीर लापरवाही है, जिससे सड़क पर अन्य लोगों की जान को खतरा पैदा हो सकता है।



पिता ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

घनश्याम महिलाने ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वह न तो वाहन का पंजीकृत मालिक है और न ही हादसे के समय कार चला रहा था।



पिता की ओर से कोर्ट में दावा किया गया कि हादसे के समय कार उनकी नाबालिग बेटी नहीं चला रही थी, बल्कि अभिषेक भास्कर नाम का एक बालिग व्यक्ति वाहन चला रहा था। याचिका में एक रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया।



याचिकाकर्ता का कहना था कि बेटी केवल कार की आगे वाली सीट पर बैठी थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह सरकारी कर्मचारी हैं और इस मामले की वजह से उनके करियर पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसलिए उनके खिलाफ दर्ज पूरी कार्रवाई को समाप्त किया जाना चाहिए।



हाईकोर्ट ने कहा- सीसीटीवी और फॉरेंसिक रिपोर्ट का फैसला ट्रायल में होगा

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका के स्तर पर अदालत साक्ष्यों की गहराई से जांच नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट किसी मामले में मिनी ट्रायल नहीं कर सकता।



डिवीजन बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट उनके बचाव का हिस्सा हैं। इनकी वास्तविकता और प्रमाणिकता का परीक्षण निचली अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान किया जाएगा।



कोर्ट ने कहा कि पुलिस की चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि पिता ने जानकारी होने के बावजूद नाबालिग को वाहन चलाने दिया। ऐसे में शुरुआती स्तर पर अपराध के तत्व दिखाई देते हैं।



निचली अदालत की कार्रवाई रहेगी जारी

हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा मामले में संज्ञान लेने के आदेश को सही माना है। साथ ही पिता को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वह मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपने सभी तर्क और साक्ष्य पेश कर सकते हैं।



पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 105, धारा 3(5) और मोटर व्हीकल एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है। इनमें नाबालिग द्वारा वाहन चलाने देना और लापरवाही से वाहन चलाने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।



क्यों अहम है यह फैसला?

हाईकोर्ट का यह आदेश उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां अभिभावक नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति देते हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि केवल यह दावा करना पर्याप्त नहीं होगा कि अभिभावक खुद वाहन नहीं चला रहे थे।



अगर जांच में यह सामने आता है कि नाबालिग को वाहन उपलब्ध कराया गया और इससे दुर्घटना हुई, तो जिम्मेदारी तय करने के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट में पेश साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।



IMP FACTS

हादसा 30 अक्टूबर 2025 को रायगढ़ जिले में हुआ था।



दुर्घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी।



पुलिस ने नाबालिग चालक के पिता को सह आरोपी बनाया।



पिता ने एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने की मांग की थी।



हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर ट्रायल जारी रखने का आदेश दिया।



FAQ

  1. बिलासपुर सड़क हादसा मामला क्या है?
    यह मामला रायगढ़ जिले में 30 अक्टूबर 2025 को हुए सड़क हादसे का है, जिसमें कार की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई थी।
  2. हाईकोर्ट ने पिता की याचिका क्यों खारिज की?
    हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सामने आए हैं कि पिता ने नाबालिग बेटी को वाहन चलाने के लिए दिया था। इसलिए इस स्तर पर केस खत्म नहीं किया जा सकता।
  3. क्या सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने फैसला दिया?
    नहीं, कोर्ट ने कहा कि इन साक्ष्यों की जांच ट्रायल कोर्ट में होगी। हाईकोर्ट इस चरण पर साक्ष्यों का मूल्यांकन या मिनी ट्रायल नहीं कर सकता।

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