सड़क दुर्घटना में मौत की संख्या कम करने की योजना, 17 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी बढ़ गए आंकड़े

छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में मौतें कम करने के सरकारी दावे सवालों के घेरे में हैं। तेंदुआ गांव में 17 करोड़ की लागत से बने इंस्टिट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च में प्रशिक्षण के बावजूद दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।

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VINAY VERMA
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NEWS IN SHORT :

  • 17 करोड़ की लागत से 20 एकड़ में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित
  • 1,46,308 में 1,46,307 पास, सिर्फ एक फेल
  • 2021 से 2025 तक सड़क मौतों में लगातार वृद्धि
  • 90 लाख से अधिक वाहन, ओवरस्पीड और शराब प्रमुख कारण

NEWS IN DETAIL :

Raipur. छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों में मौतें कम करने का दावा फेल होता दिख रहा है। जबकि सरकार ने प्रशिक्षण मॉडल खड़ा किया था। नया रायपुर के तेंदुआ गांव में केंद्र बनाया।

नाम रखा गया इंस्टिट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च रखा गया। 20 एकड़ में बने इस इंस्टिट्यूट को 17 करोड़ की लागत से तैयार किया गया था। जिसमें क्लासरूम, ड्राइविंग ट्रैक, सिम्यूलेटर जैसी ऑटोमैटिक मशीनरी थी।

21 दिन का कोर्स मॉड्यूल तैयार किया गया। इसके अलावा लाइसेंस रिनुवल के लिए 29 घंटे का कोर्स भी है जिसमें 21 घंटे थ्योरी और 8 घंटे का प्रैक्टिकल है। कोर्स के बाद लाइसेंस जारी हुआ लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में मौतो का आंकड़ा बढ़ गया।

पांच साल में लगातार बढ़ता ग्राफ

2021 में 5,371 लोगों की मौत
2022 में 5,834 मौतें दर्ज
2023 में 6,166 लोगों ने जान गंवाई
2024 में 6,945 मौतों का आंकड़ा
2025 में 6,898 लोगों की मौत

1,46,308 में सिर्फ एक अभ्यर्थी फेल

मामला पूरा उल्टा कैसे हो गया हम हमने इसकी पड़ताल तो पता चला इंस्टिट्यूट खुले 20 महीने हो चुके हैं। इसके अलावा 12 जिलों में ड्रिस्टिक सेंटर भी हैं।

चौकाने वाली बात यह है कि इन जगहों पर 1,46,308 लोगों ने आवेदन किया। कोर्स पूरा करने के बात परीक्षा दी जिसमें 1,46,307 पास हो गए। यानी केवल 1 अभ्यर्थी फेल....।

लाइसेंस वितरण पर बड़ा सवाल

सर्टिफिकेट की पारदर्शिता को लेकर सवाल इसलिए भी जायज है कि इसके परीक्षा की वीडियो रिकॉर्डिग भी विभाग के पास मौजूद नहीं है। ऐसे में लगता है कि कोर्स महज औपचारिकता है। क्योंकि कोर्स के बाद लाइसेंस देने का प्रावधान है। परीक्षा में पास की प्रतिशतता लगभग 100 है तो फिर हादसों का आंकड़ा क्यों बढ़ा?

कैमरों से मॉनिटरिंग और चालान

जबकि छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग यह दावा कर रहा है कि पूरे छग के ट्रेफिक की मॉनिटरिंग कैमरों के जरिए हो रही है। लेकिन उसकी असर यातायात दुर्घटना नहंी बल्कि चालानी कार्रवाई मे ज्यादा दिख रहा।

2024 में जहां 19 करोड़ 96 लाख रुपए वसूले गए, वहीं साल 2025 में चालानी रकम बढ़कर 30 करोड़ 55 लाख रुपए हो गई।

मुफ्त इलाज का दावा भी फेल

जुलाई 2025 में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने यह दावा किया था कि रोड एक्सीडेंट में घायल व्यक्ति का सरकार 1,50 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज करेगी। लेकिन बीते 8 महीने मे सरकार इसकी व्यवस्था नहीं बना पाई।

न तो निजी अस्पताल संचालकों से कोई मीटिंग हुई और न ही अस्पताल पहुंचाने की कोई व्यवस्था बन पाई। ऐसे में लोग अभी सरकारी अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। 

90 लाख वाहन, सड़कों पर बेलगाम रफ्तार

अक्टूबर 2025 तक की बात करें तो प्रदेश में 90 लाख वाहन पंजीकृत हुए हैं। सड़कें उतनी नहीं बढ़ीं जितनी वाहनों की संख्या तेज़ी से बढ़ी। बल की संख्या कम होने से यातायात का निगरानी तंत्र कमजोर हुआ है।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार एक्सीडेंट का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीड है इसके अलावा शराब पीकर ड्राइविंग, बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट चलन और सड़कों पर बडे़-बडे़ गड्ढे भी लोगों की जान ले रहे।

व्यवस्था पुख्ता कर रहे

सड़क दुर्घटना में होने वाली मौत को लेकर परिवहन मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि हम चिंतित है। प्रदेश के हर जिलें में ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट डाल रहे। निष्पक्ष परीक्षा के लिए कैमरों से मॉनिटरिंग करेंगे।

केंद्र सरकार के साथ मिलकर घायलों को निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज की योजना 13 फरवरी से लागू हो चुकी है। जल्द असर दिखेगा।

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