छत्तीसगढ़ मनरेगा घोटाला : EOW की बड़ी करवाई, 8 अफसरों पर शिकंजा

Umeshwari Baghel | Jul 27, 2026, 20:21 IST
मनरेगा घोटाला
मनरेगा सामग्री खरीदी घोटाले में 18 साल बाद EOW ने बड़ी कार्रवाई की है। कांकेर के तत्कालीन जिला पंचायत CEO समेत 8 पूर्व अधिकारियों के खिलाफ 1.69 करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता मामले में 6000 पेज का चालान कोर्ट में पेश किया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मनरेगा खरीदी घोटाला: 18 साल बाद EOW ने कोर्ट में पेश चालान
  • 1.69 करोड़ रुपए की अनियमितता में आठ पूर्व अधिकारी आरोपी
  • जिला स्तर पर नियमों की अनदेखी कर केंद्रीयकृत खरीदी का आरोप
  • सात जनपद पंचायतों में आर्थिक गड़बड़ी के साक्ष्य मिले
  • मुख्य आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज हैं दो अन्य भ्रष्टाचार मामले

Raipur। छत्तीसगढ़ में मनरेगा योजना के तहत सामग्री खरीदी में हुई कथित आर्थिक गड़बड़ी के 18 साल पुराने मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में आठ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में करीब 6000 पन्नों का चालान पेश किया है। आरोप है कि वर्ष 2006-07 और 2007-08 के दौरान मनरेगा सामग्री खरीदी में नियमों को दरकिनार कर 1.69 करोड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक अनियमितता की गई।



EOW ने अपराध क्रमांक 31/2008 में जांच पूरी करने के बाद 27 जुलाई 2026 को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) कांकेर की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409 और 420 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।



जिला स्तर पर खरीदी कराने पर उठे सवाल

जांच में सामने आया कि मनरेगा के लिए जरूरी सामग्री की खरीदी निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई थी। आरोप है कि उस समय जिला पंचायत कांकेर के तत्कालीन CEO केपी देवांगन ने जिला स्तर पर एक साथ सामग्री खरीदी कराई।



जबकि नियमों के अनुसार सामग्री खरीदने की जिम्मेदारी संबंधित जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों की थी। EOW की जांच में पाया गया कि फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल, रोजगार गारंटी योजना से जुड़ी सामग्री, फाइल कवर और श्रमिक जानकारी पत्रक जैसी चीजों की खरीदी में तय नियमों का पालन नहीं किया गया।



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क्रय नियमों के उल्लंघन का आरोप

EOW के मुताबिक जांच के दौरान छत्तीसगढ़ पंचायत सामग्री एवं माल क्रय नियम, भंडार क्रय नियम और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं के उल्लंघन के साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि अधिकारियों ने आपसी मिलीभगत से पद का दुरुपयोग किया और सरकारी राशि का गलत इस्तेमाल किया। इससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा।



इन आठ अधिकारियों को बनाया गया आरोपी

इस मामले में कुल आठ तत्कालीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों में तत्कालीन जिला पंचायत CEO केपी देवांगन के अलावा जनपद पंचायतों के तत्कालीन CEO राधाकांत कर, गोवर्धन गजबल्ला, परदेशी राम मरकाम, भारत राम नेताम, रामकिशुन ध्रुव, जीआर ठाकुर और संवालदास बघेल शामिल हैं। इन सभी पर मनरेगा सामग्री खरीदी में अनियमितता और नियमों की अनदेखी करने का आरोप है।



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सात जनपद पंचायतों में मिली गड़बड़ी

जांच के दौरान जिला पंचायत कांकेर और सात जनपद पंचायतों में आर्थिक अनियमितता सामने आई।



रिपोर्ट के अनुसार

जिला पंचायत कांकेर में करीब 39.90 लाख रुपए की अनियमितता मिली।


कोयलीबेड़ा जनपद में करीब 51.98 लाख रुपए।


चारामा में करीब 22.92 लाख रुपए।


नरहरपुर में करीब 20.62 लाख रुपए।


अंतागढ़ में करीब 19.91 लाख रुपए।


कांकेर जनपद में करीब 7.55 लाख रुपए।


भानुप्रतापपुर में करीब 4.51 लाख रुपए।


दुर्गकोंदल में करीब 1.72 लाख रुपए की अनियमितता सामने आई।



मुख्य आरोपी पर पहले भी दर्ज हैं मामले

EOW के अनुसार मुख्य आरोपी केपी देवांगन के खिलाफ पहले से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से जुड़े दो अन्य मामले दर्ज हैं। इनमें एक मामला फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने से जुड़ा है। वहीं दूसरे मामले में करीब 8.44 करोड़ रुपए के कथित सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है। दोनों मामलों में न्यायालय में चालान पेश किया जा चुका है।



अब कोर्ट में होगी आगे की सुनवाई

18 साल पुराने इस मामले में लंबी जांच के बाद EOW ने न्यायालय में चालान पेश कर दिया है। अब विशेष न्यायालय में मामले की सुनवाई होगी। कोर्ट में आरोपों और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।



FAQ

  1. मनरेगा खरीदी घोटाला किस मामले से जुड़ा है?
    मनरेगा योजना के तहत सामग्री खरीदी में कथित आर्थिक अनियमितता से जुड़ा है। इसमें करीब 1.69 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का आरोप है।
  2. EOW ने किन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है?
    EOW ने तत्कालीन जिला पंचायत CEO केपी देवांगन समेत 8 पूर्व अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है।
  3. मामले में अब आगे क्या होगा?
    6000 पन्नों का चालान पेश होने के बाद अब विशेष न्यायालय में मामले की सुनवाई होगी। कोर्ट आरोपों और सबूतों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा।

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