छत्तीसगढ़ में सरकारी नियमों का मकड़जाल,एमपी में महौल नहीं, इसीलिए नहीं आता निवेश
Raipur : देश के कई राज्यों की अर्थव्यवस्था में इन्वेस्टमेंट का बड़ा रोल होता है। निवेशकों की पसंद में गुजरात,महाराष्ट्र,तमिलनाडु और गोवा जैसे राज्य बहुत आगे हैं। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में निवेशकों की रुचि थोड़ी कम है। नीति आयोग ने आठ पैमानों पर वजह जानने की कोशिश की है। 100 नंबर में से एमपी और छत्तीसगढ़ के पचास नंबर भी नहीं आए। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में कुछ अहम कारण सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ में सरकारी नियमों का मकड़जाल है। सरकार भले ही कहे कि उसने इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली उद्योग नीति बनाई है लेकिन नियम कायदों का जाल निवेशकों को उलझा देता है। इसीलिए निवेश के करार जमीन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं । वहीं एमपी में उलझन दूसरी है। नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि मध्यप्रदेश में माहौल नहीं है। हालांकि दूसरे पैमानों पर इन राज्यों को फ्रंट रनर माना गया है। राज्यों के लिए निवेश इसलिए जरुरी है क्योंकि इसका सीधा संबध रोजगार,औद्योगिक विकास और अर्थव्यवस्था है। यही राज्य निवेश में कमी के कारण रोजगार की समस्या से जूझ रहे हैं।
8 पैमानों पर खुली राज्यों की पोल
किसी कंपनी को नया कारखाना लगाना हो, हजारों करोड़ रुपए का निवेश करना हो या किसी शहर में कारोबार शुरू करना हो, तो सिर्फ जमीन और बिजली काफी नहीं होती। सड़क-रेल से लेकर इंटरनेट, सरकारी नीतियां, मंजूरी मिलने की आसानी, बैंकिंग सुविधा, कानून-व्यवस्था और पर्यावरण तक कई चीजें देखी जाती हैं। अब इन्हीं कसौटियों पर राज्यों को परखने के लिए नीति आयोग ने पहली बार Investment Friendliness Index 2026 जारी किया है। इस रिपोर्ट में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों को 84 संकेतकों के आधार पर परखा गया है। इसमें सरकारी आंकड़ों के साथ निवेशकों और उद्योग से जुड़े लोगों की राय भी शामिल की गई है। कुल स्कोर 100 का है। आठ बड़े पैमाने हैं जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस क्लाइमेट, संसाधन, सरकारी नीति, नियामकीय आसानी, संस्थागत माहौल, वित्तीय सेहत और पर्यावरणीय मजबूती जैसे बिंदु शामिल हैं। इस तस्वीर में मध्य प्रदेश 48.9 अंक के साथ देश में 7वें और बड़े राज्यों में 5वें स्थान पर है। वहीं छत्तीसगढ़ 47.5 अंक के साथ देश में 12वें और बड़े राज्यों में 9वें स्थान पर है। दोनों राज्य फ्रंट रनर वाली श्रेणी में हैं। यानी दोनों राज्यों को निवेश के लिए पूरी तरह पिछड़ा नहीं माना गया, लेकिन गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा और गोवा जैसे शीर्ष राज्यों तक पहुंचने के लिए अभी कई मोर्चों पर सुधार की गुंजाइश है।
गुजरात सबसे आगे, MP सातवें और CG 12वें नंबर पर
देश के बड़े राज्यों में गुजरात 56.6 अंक के साथ पहले महाराष्ट्र 53.7 के साथ दूसरे, तमिलनाडु 53.3 तीसरे, ओडिशा 52.4 चौथे और मध्य प्रदेश 48.9 अंक के साथ पांचवें स्थान पर है। इसके बाद आंध्र प्रदेश 48.7 और कर्नाटक 48.7, राजस्थान 48.1 और छत्तीसगढ़ 47.5 अंक पर हैं। यानी MP और CG के बीच सिर्फ 1.4 अंक का अंतर है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों पड़ोसी राज्यों की ताकत अलग-अलग है। मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत सरकारी नीति और संसाधन हैं, जबकि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों, नियामकीय आसानी और पर्यावरणीय मजबूती में बेहतर दिखाई देता है।
आठ पैमानों पर एमपी और छत्तीसगढ़ की पूरी तस्वीर :
इंफ्रास्ट्रक्चर :
मध्यप्रदेश को 25 में से 10.5 अंक मिले हैं, जबकि छत्तीसगढ़ को 9.1 अंक। इस पैमाने पर एमपी आगे है।
. बिजनेस क्लाइमेट:
मध्यप्रदेश को 20 में से सिर्फ 5.5 अंक और छत्तीसगढ़ को 5.7 अंक मिले। यानी इस मामले में छत्तीसगढ़ मामूली बढ़त के साथ आगे है।
. संसाधन:
15 में से मध्यप्रदेश को 7.7 अंक और छत्तीसगढ़ को 8 अंक मिले। प्राकृतिक और खनिज संसाधनों के मामले में छत्तीसगढ़ आगे है।
. सरकारी नीति:
10 में से मध्य प्रदेश को 5.4 अंक मिले, जबकि छत्तीसगढ़ को सिर्फ 2.6 अंक। इस पैमाने पर मध्यप्रदेश की बढ़त काफी बड़ी है।
. नियामकीय आसानी:
मध्यप्रदेश को 12 में से 7.9 अंक और छत्तीसगढ़ को 8.4 अंक मिले। यानी नियमों और प्रक्रियाओं को आसान बनाने के मामले में छत्तीसगढ़ आगे है।
. संस्थागत माहौल:
6 में से मध्यप्रदेश को 4.2 अंक और छत्तीसगढ़ को 4.5 अंक मिले। यहां भी छत्तीसगढ़ आगे है।
.वित्तीय सेहत:
मध्यप्रदेश को 7 में से 4 अंक, जबकि छत्तीसगढ़ को 5.4 अंक मिले। राज्य की वित्तीय स्थिति के पैमाने पर छत्तीसगढ़ बेहतर स्थिति में है।
. पर्यावरणीय मजबूती:
5 में से मध्य प्रदेश को 3.6 अंक और छत्तीसगढ़ को 4 अंक मिले। इस मामले में भी छत्तीसगढ़ आगे है।
. कुल स्कोर
सभी आठ पैमानों को मिलाकर 100 में मध्यप्रदेश को 48.9 अंक मिले हैं, जबकि छत्तीसगढ़ का स्कोर 47.5 अंक है। यानी कुल मिलाकर मध्यप्रदेश 1.4 अंक की बढ़त के साथ छत्तीसगढ़ से आगे है। सीधी भाषा में कहें तो: आठ में से सिर्फ दो पैमानों इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी नीति में मध्यप्रदेश आगे है। बाकी छह पैमानों बिजनेस क्लाइमेट, संसाधन, नियामकीय आसानी, संस्थागत माहौल, वित्तीय सेहत और पर्यावरणीय मजबूती में छत्तीसगढ़ ने बेहतर स्कोर किया है।
निवेश के मामले में एमपी-छत्तीसगढ़ की कहानी क्या कहती है
अगर पूरी रिपोर्ट को आम आदमी की भाषा में समझें तो मध्यप्रदेश की कहानी है नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत, लेकिन बिजनेस इकोसिस्टम और वित्तीय क्षेत्र में सुधार की जरूरत है। वहीं छत्तीसगढ़ की कहानी है खनिज और प्राकृतिक संसाधन, आसान रेगुलेशन और मजबूत पर्यावरणीय स्थिति, लेकिन सड़क-रेल-एयर कनेक्टिविटी, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और बिजनेस विस्तार पर ज्यादा काम की जरूरत है। यानी निवेशक की नजर से दोनों राज्यों की जेब में अलग-अलग मजबूत कार्ड हैं। एमपी के पास नीति और कनेक्टिविटी का कार्ड है तो छत्तीसगढ़ के पास संसाधन और आसान रेगुलेशन का।
गुजरात से कितना पीछे
गुजरात 56.6 अंक के साथ नंबर-1 है। मध्यप्रदेश उससे 7.7 अंक और छत्तीसगढ़ 9.1 अंक पीछे है। महाराष्ट्र 53.7 और तमिलनाडु 53.3 अंक के साथ अगले दो स्थानों पर हैं। शीर्ष राज्यों को देखें तो फर्क केवल सरकारी घोषणा का नहीं है। गुजरात की मजबूत स्थिति में पोर्ट की तेज टर्नअराउंड टाइम और भरोसेमंद बिजली जैसी चीजें अहम हैं। महाराष्ट्र बिजनेस क्लाइमेट में सबसे आगे है, जबकि ओडिशा संसाधनों में बड़े राज्यों में शीर्ष पर है।
सबसे बड़ा संदेश
नीति आयोग की यह रिपोर्ट केवल रैंकिंग नहीं है। इसमें निवेशकों की जमीन पर महसूस होने वाली दिक्कतों को भी शामिल किया गया है। कुल 1,850 निवेशकों के सर्वे और 165 हितधारकों से परामर्श के आधार पर इंडेक्स तैयार किया गया है। इसलिए MP और CG के लिए असली चुनौती अब सिर्फ कितने MoU हुए नहीं है। चुनौती यह है कि निवेशक के लिए जमीन, बिजली, सड़क, बैंकिंग, मंजूरी, कुशल कर्मचारी, डिजिटल सेवाएं और स्थिर नीति वास्तव में कितनी आसानी से उपलब्ध होती हैं। रिपोर्ट का संदेश साफ है कि दोनों राज्य निवेश के लिए दौड़ में हैं, लेकिन देश के टॉप राज्यों से मुकाबले में अगला कदम MoU से ज्यादा जमीन पर दिखने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल का होगा।
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