मुंगेली कलेक्टर ने खुद पर लगाया 500 रुपए का जुर्माना, लेट लतीफी पर पेनाल्टी

VINAY VERMA | Sept 24, 2026, 15:55 IST
मुंगेली कलेक्टर ने खुद पर लगाया जुर्माना
मुंगेली में सरकारी फाइलों की लेटलतीफी रोकने के लिए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने सख्त व्यवस्था लागू की है। फाइल का निपटारा नहीं होने पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जा रहा है। कलेक्टर ने खुद पर भी 500 रुपए का अर्थदंड लगाया है।

मुंगेली में सरकारी फाइलों की लेटलतीफी रोकने के लिए कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने सख्त तरीका अपनाया है। यहां तय समय में फाइल का काम पूरा नहीं हुआ तो सिर्फ नोटिस या जवाब नहीं मांगा जा रहा, बल्कि 500 रुपए का जुर्माना भी लगाया जा रहा है। खास बात यह है कि कलेक्टर कार्यालय की फाइल समय-सीमा से बाहर हुई तो कलेक्टर ने खुद पर भी 500 रुपए का फाइन लगा दिया और राशि जमा कर दी।



अपनों पर भी कार्रवाई

अफसरों की बैठक में दूसरे विभागों की लंबित फाइलों पर सवाल उठते हैं और संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जाता है। लेकिन मुंगेली में कलेक्टर ने इस व्यवस्था को अपने कार्यालय पर भी लागू किया। कलेक्टर कार्यालय की एक-दो फाइल तय समय में पूरी नहीं हो सकीं तो जिम्मेदारी तय करते हुए खुद पर ही अर्थदंड लगाया गया।



नियम पद देखकर नहीं बदला

कलेक्टर के इस कदम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि समय-सीमा का नियम सिर्फ छोटे कर्मचारियों के लिए नहीं है। जिस व्यवस्था के तहत अधिकारियों-कर्मचारियों से लेट हुई फाइल का जुर्माना लिया जा रहा है, उसी दायरे में कलेक्टर कार्यालय को भी रखा गया। खुद पर जुर्माना लगाकर कलेक्टर ने इसी बात को सामने रखा है।



हर फाइल पर 500 रुपए

जिला प्रशासन में तय समय के भीतर फाइल या प्रकरण का निराकरण नहीं होने पर प्रति फाइल 500 रुपए का अर्थदंड लगाया जा रहा है। यानी फाइल कितनी भी छोटी हो या किसी भी स्तर पर अटकी हो, समय निकलने के बाद जिम्मेदारी तय होगी। इसका मकसद सरकारी दफ्तरों में फाइलों को बेवजह रोकने की आदत पर लगाम लगाना है।



जनता के काम को प्राथमिकता

इस व्यवस्था का सीधा असर आम लोगों से जुड़े कामों पर पड़ना है। आवेदन, प्रमाण-पत्र, जनदर्शन, सीएम हेल्पलाइन और दूसरी सरकारी सेवाओं से जुड़े मामलों में देरी होने पर लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। समय-सीमा में काम पूरा होने से लोगों का इंतजार कम होगा और अफसरों पर भी काम निपटाने का दबाव रहेगा।



लोक सेवा गारंटी का समय

अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा तय है। दफ्तरों में इसकी जानकारी भी प्रदर्शित की जाती है। यानी किसी काम के लिए नागरिक से तय समय से ज्यादा इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत मुंगेली प्रशासन ने देरी की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है।



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