छत्तीसगढ़ में 3 महीने के लिए रासुका लागू, कलेक्टरों को मिली बड़ी पावर
Arun Tiwari | Sept 24, 2026, 12:14 IST
छत्तीसगढ़ में रासुका लागू
छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों के कलेक्टरों को NSA यानी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत निवारक कार्रवाई की शक्तियां दी गई हैं।
छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने प्रदेश के सभी 33 जिलों के कलेक्टरों यानी जिला दंडाधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने के लिए अधिकृत किया है। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
सरकार के इस आदेश के बाद प्रदेश के सभी जिला दंडाधिकारी निर्धारित परिस्थितियों में रासुका के तहत निवारक निरोध की कार्रवाई कर सकेंगे। इसका मकसद ऐसी गतिविधियों को पहले ही रोकना है, जिनसे लोक व्यवस्था, राज्य की सुरक्षा या आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति एवं संचालन पर खतरा पैदा होने की आशंका हो। गृह विभाग की अधिसूचना से संबंधित रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार को ऐसी सूचनाएं मिली हैं, जिनमें कुछ तत्वों की गतिविधियों से सांप्रदायिक सौहार्द, लोक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सभी जिलों के जिला दंडाधिकारियों को NSA के तहत निर्धारित शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत किया गया है।
यह अधिकार स्थायी रूप से नहीं दिए गए हैं। आदेश की अवधि तीन महीने निर्धारित की गई है। 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक कलेक्टर इन शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके बाद इसे आगे जारी रखने के लिए नए सरकारी आदेश की जरूरत होगी। इस दौरान जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था से जुड़े संभावित गंभीर मामलों में सामान्य कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ रासुका के तहत उपलब्ध निवारक प्रावधानों का इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 यानी NSA एक निवारक निरोध कानून है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपराध के लिए सजा देना नहीं, बल्कि ऐसी गतिविधियों को रोकना है जिनसे देश या राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था अथवा आवश्यक सेवाओं के संचालन पर खतरा पैदा होने की आशंका हो।रासुका की कार्रवाई सामान्य आपराधिक मामले में होने वाली गिरफ्तारी से अलग होती है। इसमें किसी व्यक्ति की गतिविधियों से भविष्य में संभावित खतरे को देखते हुए कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निरोध का आदेश दिया जा सकता है।
सरकार द्वारा सभी कलेक्टरों को छत्तीसगढ़ में रासुका के तहत शक्तियां देने का मतलब यह नहीं है कि प्रदेश में किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जा सकेगा। संबंधित व्यक्ति के मामले में कानून में निर्धारित परिस्थितियां और वैधानिक प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा।यानी सरकार का यह आदेश सामान्य गिरफ्तारी की नई शक्ति नहीं, बल्कि निर्धारित परिस्थितियों में निवारक निरोध से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल की अनुमति है। किसी व्यक्ति के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई होने पर उसके लिए अलग से कानूनी आधार और प्रक्रिया जरूरी होगी।
यह आदेश ऐसे समय में आया है जब अक्टूबर से दिसंबर के बीच प्रदेश में कई बड़े त्योहार और सार्वजनिक आयोजन होते हैं। गृह विभाग की अधिसूचना से जुड़ी रिपोर्टों में सांप्रदायिक सौहार्द और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली संभावित गतिविधियों को लेकर चिंता का उल्लेख किया गया है।
ऐसे में जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था से जुड़े इनपुट पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए अतिरिक्त वैधानिक अधिकार उपलब्ध रहेंगे। हालांकि, रासुका जैसी निवारक कार्रवाई में प्रशासन के लिए रिकॉर्ड, परिस्थितियों और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण रहेगा। किसी व्यक्ति पर रासुका लगाया जाना अपने आप में उस व्यक्ति के अपराधी होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाता, क्योंकि यह कानून मूल रूप से निवारक कार्रवाई के लिए है।
राज्य सरकार के इस फैसले से जिला स्तर पर कानून-व्यवस्था से जुड़े संभावित खतरों से निपटने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त कानूनी अधिकार मिल गए हैं। अब सभी 33 जिलों के कलेक्टर 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक NSA में निर्धारित शक्तियों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
फिलहाल यह व्यवस्था तीन महीने के लिए सीमित है। 31 दिसंबर के बाद इसकी अवधि बढ़ाने या समाप्त करने को लेकर सरकार को अलग आदेश जारी करना होगा।
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33 जिलों के कलेक्टर कर सकेंगे निवारक कार्रवाई:
1 अक्टूबर से शुरू होकर 31 दिसंबर तक चलेगी व्यवस्था:
रासुका क्या है:
सिर्फ आदेश जारी होने से किसी पर रासुका नहीं लगेगी:
त्योहारों के दौरान बढ़ेगी प्रशासन की जिम्मेदारी:
ऐसे में जिला प्रशासन को कानून-व्यवस्था से जुड़े इनपुट पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए अतिरिक्त वैधानिक अधिकार उपलब्ध रहेंगे। हालांकि, रासुका जैसी निवारक कार्रवाई में प्रशासन के लिए रिकॉर्ड, परिस्थितियों और कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण रहेगा। किसी व्यक्ति पर रासुका लगाया जाना अपने आप में उस व्यक्ति के अपराधी होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाता, क्योंकि यह कानून मूल रूप से निवारक कार्रवाई के लिए है।
प्रशासन को क्या संदेश:
फिलहाल यह व्यवस्था तीन महीने के लिए सीमित है। 31 दिसंबर के बाद इसकी अवधि बढ़ाने या समाप्त करने को लेकर सरकार को अलग आदेश जारी करना होगा।
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