नकटी गांव मामला : कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, मांगा न्याय
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर के नकटी गांव में हाल ही में प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई से कई गरीब परिवार बेघर हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी इन प्रभावित परिवारों के समर्थन में लगातार प्रदर्शन कर रही है। शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। राज्यपाल ने विधानसभा सत्र के बाद मुख्यमंत्री से बातचीत का भरोसा दिया है।
राजभवन पहुंचे कांग्रेस नेता
शुक्रवार को कांग्रेस का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल लोकभवन पहुंचा। नेताओं ने वहां राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा। इस ज्ञापन में नकटी गांव की घटना का जिक्र था। कांग्रेस ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं को उठाया। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में दखल देने की मांग की। नेताओं ने कहा कि पीड़ित परिवारों को तुरंत न्याय मिलना चाहिए।
पीड़ितों के पुनर्वास की मांग
कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल को पूरी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि बुलडोजर कार्रवाई से लोग बेघर हो गए हैं। इन परिवारों के पास अब रहने की जगह नहीं है। बरसात के इस मौसम में वे खुले आसमान के नीचे हैं। उन्हें खाने-पीने की भी भारी दिक्कत हो रही है। कांग्रेस ने मांग की कि सरकार इनका उचित पुनर्वास करे। इन पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।
राज्यपाल ने दिया आश्वासन
राज्यपाल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की बातों को बहुत ध्यान से सुना। उन्होंने पूरे मामले पर अपनी गंभीर चिंता भी व्यक्त की। राज्यपाल ने नेताओं को एक बड़ा आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर जल्द ही बात करेंगे। विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद वह मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। राज्यपाल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से इस मुद्दे पर बात करेंगे। इस आश्वासन से कांग्रेस नेताओं को राहत की उम्मीद है।
14 किलोमीटर लंबी पदयात्रा
इससे पहले बुधवार को कांग्रेस ने बड़ा प्रदर्शन किया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पदयात्रा का नेतृत्व किया था। यह पदयात्रा नकटी गांव से शुरू हुई थी। कार्यकर्ता पैदल चलकर राजभवन की तरफ बढ़े थे। यह यात्रा लगभग 14 किलोमीटर लंबी थी। पदयात्रा वीआईपी (VIP - Very Important Person) चौक होते हुए आगे बढ़ी थी। यह पूरी यात्रा शांतिपूर्ण तरीके से निकाली गई थी।
राजभवन के बाहर का प्रदर्शन
बुधवार को पदयात्रा लोकभवन तक पहुंच गई थी। हालांकि उस दिन राज्यपाल से मुलाकात नहीं हो सकी थी। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने समय मांगा था। उन्होंने प्रशासन को तीन दिन की चेतावनी भी दी थी। कांग्रेस ने कहा था कि समय न मिलने पर आंदोलन तेज होगा। इसके बाद शुक्रवार को उन्हें मुलाकात का समय मिला।
छत्तीसगढ़ में गर्म है सियासत
छत्तीसगढ़ में इस कार्रवाई को लेकर राजनीति काफी गर्म है। कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेर रही है। विपक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह एकतरफा है। उन्होंने गरीबों के आशियाने उजाड़ने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार का कहना है कि यह अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई थी। अब राज्यपाल के दखल के बाद नया मोड़ आ सकता है। देखना होगा कि मुख्यमंत्री इस पर क्या फैसला लेते हैं।
क्या है कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि प्रशासन ने बिना पूर्व सूचना के बुलडोजर चलाया। लोगों को अपना सामान निकालने का मौका भी नहीं मिला। कई सालों से ये परिवार वहां रह रहे थे। अचानक की गई इस कार्रवाई ने सबको सड़क पर ला दिया। कांग्रेस इसे मानवाधिकारों का हनन बता रही है। वे सरकार से पीड़ित परिवारों के लिए पक्के मकानों की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष भी समझें
प्रशासन का इस मामले पर अलग तर्क है। अधिकारियों के अनुसार यह सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा था। कब्जे को हटाने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद ही यह कार्रवाई की गई। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात था। हालांकि विपक्ष इस तर्क को मानने के लिए तैयार नहीं है।
आंदोलन तेज करने की थी चेतावनी
दीपक बैज ने पहले ही साफ कर दिया था। यदि राज्यपाल से मुलाकात नहीं होती तो वे चुप नहीं बैठते। कांग्रेस पूरे छत्तीसगढ़ में बड़ा आंदोलन शुरू करने वाली थी। जिला मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन की तैयारी की जा रही थी। शुक्रवार की मुलाकात के बाद फिलहाल कांग्रेस ने राहत की सांस ली है। अब वे राज्यपाल के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।
बेघर परिवारों का दर्द
रायपुर नकटी गांव के प्रभावित लोग अभी बेहद परेशान हैं। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। उनके पास न तो राशन है और न ही छत। सामाजिक संगठनों ने भी इनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे इन परिवारों के साथ खड़े हैं। वे तब तक लड़ेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
FAQ
- नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई क्यों की गई थी?
प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए की गई थी। इसके लिए प्रभावित लोगों को पहले नोटिस भी जारी किए गए थे। - भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर जनहित के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया जाता है?
उत्तर: संविधान के अनुच्छेद 163 और 167 के तहत नागरिकों और विपक्ष को यह अधिकार मिलता है कि वे राज्य के संवैधानिक प्रमुख (राज्यपाल) से मिलकर जनहित, कानून-व्यवस्था या प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा कर सकें और ज्ञापन सौंप सकें।
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