नकटी गांव में घर नहीं लेंगे कांग्रेस विधायक, सीएम को चिट्ठी लिखकर किया इनकार
Arun Tiwari | Jul 02, 2026, 11:51 IST
नकटी गांव में कांग्रेस विधायक नहीं लेंगे घर
छत्तीसगढ़ के नकटी में गरीबों के मकान हटाकर प्रस्तावित विधायक आवास परियोजना का कांग्रेस विधायकों और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने विरोध करते हुए वहां घर लेने से साफ इनकार कर दिया है।
RAIPUR : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक आवास परियोजना को लेकर कांग्रेस के भीतर आक्रामकता बढ़ती जा रही है। गरीब परिवारों के मकान हटाकर विधायकों के लिए आवास बनाए जाने के विरोध में अब कांग्रेस के चार विधायकों ने सार्वजनिक रूप से ऐसे आवास लेने से इनकार कर दिया है।
इससे पार्टी के सामने नैतिक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौती खड़ी हो गई है। जानकारी के अनुसार कांग्रेस विधायक जनकराम ध्रुव के बाद महिला विधायक विद्यावती सिदार, चातुरी नंद, जनक ध्रुव और कविता प्राण लहरे ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे ऐसे आवास को स्वीकार नहीं करेंगी, जिसके लिए गरीबों को विस्थापित करना पड़े। इन विधायकों का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि का घर गरीबों के आशियाने की कीमत पर नहीं बनना चाहिए।
इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पार्टी विधायकों से अपील की है कि वे नकटी में प्रस्तावित आवास लेने से इंकार करें। बैज का कहना है कि सरकार के पास पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, इसलिए गरीबों के घर उजाड़कर विधायकों के लिए कॉलोनी बनाने का कोई औचित्य नहीं है।
उनका कहना है कि सरकार चाहें तो दूसरी जगह भी आवास परियोजना विकसित कर सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस मामले को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि गरीबों का पुनर्वास सुनिश्चित किए बिना उनके घरों को हटाना न्यायसंगत नहीं होगा।
सूत्रों के मुताबिक इस पूरे मामले पर जल्द ही कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है। बैठक में सभी विधायकों की राय लेकर पार्टी की ओर से एक साझा निर्णय लिया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि विधायक दल नकटी परियोजना के वर्तमान स्वरूप का विरोध करते हुए सरकार से वैकल्पिक जमीन पर विधायक आवास बनाने की मांग कर सकता है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी संकेत दिए हैं कि इस विषय पर विधायक दल के भीतर विस्तार से चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी भी विधायक के अंतिम निर्णय की आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन सभी साथियों से बातचीत के बाद सामूहिक रुख तय किया जाएगा।
कांग्रेस के भीतर यह भी चर्चा है कि यदि पार्टी इस मुद्दे पर स्पष्ट और एकजुट रुख अपनाती है तो यह सरकार पर नैतिक दबाव बना सकता है। कई नेताओं का मानना है कि जनता के बीच यह संदेश जाना चाहिए कि कांग्रेस गरीबों के अधिकारों के साथ खड़ी है और उनके आशियाने की कीमत पर किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए सुविधा नहीं चाहती।
उधर, पार्टी के कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि यदि सरकार वास्तव में विधायक आवास बनाना चाहती है तो पहले प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास किया जाए और उसके बाद ही किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर परियोजना को आगे बढ़ाया जाए। उनका तर्क है कि विकास और जनसुविधाओं के नाम पर गरीबों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
नकटी आवास परियोजना को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजनीतिक संवेदनशीलता, सामाजिक न्याय और जनप्रतिनिधियों की नैतिक जिम्मेदारी का मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में कांग्रेस विधायक दल की बैठक और उसके बाद पार्टी के आधिकारिक रुख पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
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इससे पार्टी के सामने नैतिक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौती खड़ी हो गई है। जानकारी के अनुसार कांग्रेस विधायक जनकराम ध्रुव के बाद महिला विधायक विद्यावती सिदार, चातुरी नंद, जनक ध्रुव और कविता प्राण लहरे ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे ऐसे आवास को स्वीकार नहीं करेंगी, जिसके लिए गरीबों को विस्थापित करना पड़े। इन विधायकों का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि का घर गरीबों के आशियाने की कीमत पर नहीं बनना चाहिए।
कांग्रेस की विधायकों से अपील:
उनका कहना है कि सरकार चाहें तो दूसरी जगह भी आवास परियोजना विकसित कर सकती है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस मामले को केवल राजनीतिक विरोध के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए। पार्टी का मानना है कि गरीबों का पुनर्वास सुनिश्चित किए बिना उनके घरों को हटाना न्यायसंगत नहीं होगा।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक:
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी संकेत दिए हैं कि इस विषय पर विधायक दल के भीतर विस्तार से चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी भी विधायक के अंतिम निर्णय की आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन सभी साथियों से बातचीत के बाद सामूहिक रुख तय किया जाएगा।
कांग्रेस के सभी विधायक कर सकते हैं घर वापस:
उधर, पार्टी के कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि यदि सरकार वास्तव में विधायक आवास बनाना चाहती है तो पहले प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक पुनर्वास किया जाए और उसके बाद ही किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर परियोजना को आगे बढ़ाया जाए। उनका तर्क है कि विकास और जनसुविधाओं के नाम पर गरीबों के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
निष्कर्ष:
FAQ
- नकटी गाँव कहाँ स्थित है और यह हाल ही में राष्ट्रीय/राज्य स्तर पर क्यों चर्चा में आया?
उत्तर: नकटी गाँव छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंतर्गत आता है। चर्चा का कारण: यह गाँव तब सुर्खियों में आया जब राज्य सरकार ने यहाँ 'प्रस्तावित विधायक आवास परियोजना' (विधायकों के रहने के लिए आधुनिक कॉलोनी) बनाने का निर्णय लिया। इस परियोजना के लिए वहाँ रह रहे गरीब परिवारों के मकानों को हटाने (विस्थापन) की योजना है, जिसका कड़ा विरोध हो रहा है। - छत्तीसगढ़ विधानसभा में 'नेता प्रतिपक्ष' की भूमिका में कौन हैं और उनकी क्या प्रतिक्रिया रही?
उत्तर: वर्तमान में छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) डॉ. चरणदास महंत हैं। उनकी प्रतिक्रिया: इस संवेदनशील मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक दल के भीतर इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। उन्होंने सामूहिक लोकतांत्रिक निर्णय पर जोर देते हुए कहा कि सभी साथी विधायकों से बातचीत के बाद ही पार्टी इस पर कोई आधिकारिक और एकजुट रुख तय करेगी। - छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कौन हैं और इस विवाद पर उनका क्या स्टैंड है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (CG PCC) के वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज हैं। उनका स्टैंड: दीपक बैज ने इस पूरी परियोजना का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने अपने दल के सभी विधायकों से अपील की है कि वे नकटी में आवास लेने से पूरी तरह इनकार कर दें। उनका तर्क है कि सरकार के पास भारी मात्रा में खाली जमीन मौजूद है, इसलिए गरीबों के आशियाने उजाड़कर जनप्रतिनिधियों के लिए घर बनाना नैतिक रूप से गलत है।
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