कोयला लेवी घोटाले में नारायण साहू को सुप्रीम कोर्ट से राहत
समझें क्या है पूरा मामला
- कोयला परिवहन पर अवैध लेवी वसूली का आरोप है।
- नारायण साहू पर सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप लगा।
- हाईकोर्ट ने मई 2026 में जमानत याचिका खारिज की थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने लंबी हिरासत को देखते हुए राहत दी।
- जमानत के साथ आरोपी को कई शर्तों का पालन करना होगा।
छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी घोटाला मामले में आरोपी नारायण साहू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने नारायण साहू की जमानत याचिका मंजूर करते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है। इससे पहले बिलासपुर हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
नारायण साहू को जांच एजेंसियों ने इस मामले में मुख्य आरोपी सूर्यकांत तिवारी से जुड़े सिंडिकेट का सदस्य बताया था। आरोप है कि वह कोयला परिवहन से जुड़ी अवैध वसूली में अहम भूमिका निभा रहा था।
हाईकोर्ट ने क्यों नहीं दी थी जमानत?
बिलासपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 7 मई 2026 को नारायण साहू की पहली जमानत याचिका खारिज की थी। अदालत ने अपने आदेश में आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने और जांच प्रक्रिया से दूर रहने का जिक्र किया था।
हाईकोर्ट ने माना था कि आर्थिक अपराधों का असर व्यापक होता है। ऐसे मामलों में अदालत को जमानत देते समय सावधानी बरतनी होती है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि केस डायरी और उपलब्ध शुरुआती साक्ष्य आरोपी की भूमिका की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने ट्रायल में देरी के लिए आरोपी के व्यवहार को भी जिम्मेदार माना था।
सुप्रीम कोर्ट ने किस आधार पर दी राहत?
हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए नारायण साहू ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। 15 जुलाई 2026 को इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। इस पीठ में सीजेआई के साथ जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि इस मामले के कई अन्य आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं। अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले का ट्रायल पूरा होने में अभी समय लग सकता है। ऐसे में किसी आरोपी को लंबे समय तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने इसी आधार पर नारायण साहू को जमानत देने का फैसला लिया।
जमानत के लिए रखी गई शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने नारायण साहू को निचली अदालत की संतुष्टि के अनुसार जमानत बांड जमा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा उसे उन सभी शर्तों का पालन करना होगा, जो इस मामले में अन्य सह-आरोपियों के लिए तय की गई थीं।
आरोपी को जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना होगा। अदालत के निर्देशों का उल्लंघन होने पर उसकी जमानत प्रभावित हो सकती है।
क्या है छत्तीसगढ़ का कोयला लेवी मामला?
छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन से जुड़ी अवैध वसूली के आरोपों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध शाखा कर रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, एक कथित सिंडिकेट कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन के हिसाब से अवैध राशि वसूलता था।
आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों तक पैसा पहुंचाने के लिए किया जाता था। इस मामले में नारायण साहू पर आईपीसी की धारा 420, 120-बी, 384 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि नारायण साहू अवैध रकम के लेनदेन में एक अहम कड़ी था। वहीं, जमानत मिलने के बाद अब मामले की आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से नारायण साहू को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, कोयला लेवी घोटाले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
IMP FACTS
मामला: छत्तीसगढ़ कोयला लेवी घोटाला
आरोपी: नारायण साहू
सुप्रीम कोर्ट फैसला: 15 जुलाई 2026
जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर की
हाईकोर्ट आदेश: 7 मई 2026 को जमानत खारिज
हाईकोर्ट: छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट पीठ: CJI, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस वी. मोहना
मुख्य आरोपी: सूर्यकांत तिवारी
जांच एजेंसी: ACB और EOW
आरोप: कोयला परिवहन पर अवैध लेवी वसूली
धाराएं: IPC 420, 120-B, 384 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम
नारायण साहू की भूमिका: सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य होने का आरोप
सुप्रीम कोर्ट आधार: ट्रायल में देरी और लंबी हिरासत
जमानत शर्त: निचली अदालत की शर्तों का पालन करना होगा
मामले की स्थिति: ट्रायल जारी है
FAQ
- नारायण साहू को किस मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है?
नारायण साहू को छत्तीसगढ़ के कोयला लेवी घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। - हाईकोर्ट ने नारायण साहू की जमानत क्यों खारिज की थी?
बिलासपुर हाईकोर्ट ने आरोपी के लंबे समय तक फरार रहने और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका खारिज की थी। - सुप्रीम कोर्ट ने नारायण साहू को जमानत क्यों दी?
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल में देरी और लंबे समय से न्यायिक हिरासत को देखते हुए जमानत मंजूर की।
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