छत्तीसगढ़ में रिकॉर्डतोड़ गर्मी : नौतपा में 700 से अधिक वन्यजीवों ने दम तोड़ा
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में 700 से अधिक वन्यजीवों की मौत हुई।
- चमगादड़ और अन्य पक्षियों की मौत केवल गर्मी के कारण हुई।
- कांकेर, कोरबा, खैरागढ़ जैसे जिलों में प्रभावित क्षेत्र।
- निर्जलीकरण और ठंडे आश्रयों की कमी मुख्य कारण।
- प्रशासन ने निगरानी और राहत कार्य शुरू किया।
NEWS IN DETAIL
मध्य भारत में तापमान में लगातार वृद्धि से वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ा है। छत्तीसगढ़ में 2026 की गर्मी बेहद तीव्र रही, खासकर मई के अंत में नौतपा के दौरान, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में था। इस अवधि में 500 से अधिक चमगादड़ और लगभग 200 अन्य पक्षी व जानवर मृत पाए गए। यह मौतें सिर्फ गर्मी के कारण हुईं, न कि किसी बीमारी या शिकार से।
चमगादड़ पर तापमान का असर
कांकेर जिले के सरोना इलाके में ग्रामीणों ने तीन-चार दिनों तक चमगादड़ों को पेड़ों से गिरते हुए देखा। अधिकांश चमगादड़ कुछ ही मिनटों में मर गए। कोरबा जिले में इसी प्रकार की घटना में लगभग 200 चमगादड़ मृत पाए गए। चमगादड़ गर्म रक्त वाले स्तनधारी होते हैं और वे तापमान की चरम स्थितियों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं।
वे दिनभर पेड़ों पर ही रहते हैं और शरीर का तापमान नियंत्रित करने के लिए छाया और ठंडी हवा पर निर्भर रहते हैं। जब ऐसा नहीं हो पाता, जैसे इस गर्मी में हुआ, तो वे कुछ घंटों में ही जानलेवा गर्मी के शिकार हो जाते हैं।
निर्जलीकरण और मौसमी आपातकाल
वन अधिकारियों ने बताया कि भीषण गर्मी और शुष्क हवाओं के लंबे संपर्क में रहने से चमगादड़ और अन्य वन्यजीव गंभीर निर्जलीकरण का शिकार हुए। चमगादड़ों को मरते हुए देखना स्थानीय लोगों के लिए भयावह था और वे अब घने पेड़ों वाले इलाकों से दूर रहने लगे हैं।
अन्य प्रभावित जीव
खैरागढ़ जिले के दल्लीखोली-लछना वन क्षेत्र में मोर और ताड़ सिवेट सहित 15 से अधिक जंगली पक्षी और जानवर मृत पाए गए। यह संकेत करता है कि गर्मी का प्रभाव केवल चमगादड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक वन्य जीवन पर गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
पर्यावरणीय चेतावनी
भारत में ग्रीष्म ऋतु हर साल अधिक भीषण होती जा रही है। वन्यजीव ठंडे और सुरक्षित आश्रयों के अभाव में गर्मी का सामना नहीं कर पा रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते राहत और अनुकूलन उपाय नहीं किए गए, तो भविष्य में वन्यजीवों का नुकसान बढ़ेगा। यह घटना वन्य जीवन और पारिस्थितिकी के संतुलन पर गंभीर लंबी अवधि का प्रभाव डाल सकती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में संपूर्ण निगरानी और नुकसान का आकलन शुरू किया है। अधिकारियों ने कहा कि वे स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं और आवश्यक राहत और बचाव उपायों को लागू करने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन और वैज्ञानिक वन्यजीवों के संरक्षण के उपाय पर काम कर रहे हैं।
तापमान और मौसमी पैटर्न
विशेषज्ञों के अनुसार, नौतपा अवधि (मई के अंत में लगभग नौ दिन) भारत में साल का सबसे गर्म समय माना जाता है। इस समय सूर्य रोहिणी नक्षत्र के सबसे करीब होता है। छत्तीसगढ़ में इस वर्ष यह गर्मी विशेष रूप से तीव्र रही, जिससे वन्यजीवों के लिए पारिस्थितिक आपातकाल उत्पन्न हुआ।
FAQ
- कितने जानवर और पक्षी प्रभावित हुए?
लगभग 700 जानवर और पक्षी मृत पाए गए। - मौतों का मुख्य कारण क्या है?
गर्म जलवायु और अत्यधिक तापमान के कारण। - कौन-कौन से जिले प्रभावित हुए?
कांकेर, कोरबा, खैरागढ़ और अन्य वन क्षेत्र। - प्रशासन ने क्या किया?
प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी, नुकसान का आकलन और राहत प्रयास शुरू किए।
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