जमीन बेचने का अधिकार निजी कंपनी को, पहले ही कोर्ट पहुंचा प्राधिकरण
Raipur. नया रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरएएनवीपी) ने ऐसा टेंडर जारी किया है, जिसमें सिर्फ सड़क, नाली और दूसरी आधारभूत सुविधाएं बनाने का काम ही निजी कंपनी को नहीं सौंपा जाएगा, बल्कि मिक्स्ड यूज जमीन के विकास अधिकार के साथ उसे जमीन बेचने का अधिकार भी मिलेगा। यानी डेवलपर पहले इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगा और बदले में उसे प्राधिकरण की ओर से तय मिक्स्ड यूज भूमि के विकास एवं बिक्री अधिकार दिए जाएंगे। इस टेंडर की शर्तों को लेकर प्राधिकरण खुद संभावित कानूनी विवाद से बचने के लिए पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया है। वहीं टेंडर खुलने के साथ ही विवाद भी गहरा गए हैं।
अदालत में चुनौती मिलने की आशंका
नया रायपुर प्राधिकरण ने हाईकोर्ट (CG High Court) में कैविएट दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि उसे आशंका है कि कोई भी व्यक्ति या संस्था इस टेंडर अथवा इसके आधार पर आगे होने वाली कार्रवाई को अदालत में चुनौती दे सकती है। इसलिए यदि कोई याचिका दायर होती है तो अदालत पहले प्राधिकरण का पक्ष सुने और उसके बाद ही कोई आदेश पारित करे। यह पूरा मामला 23 अप्रैल 2026 को जारी किए गए टेंडर से जुड़ा है। इस टेंडर का उद्देश्य नया रायपुर के लेयर-2 में टाउन डेवलपमेंट स्कीम (टीडीएस) का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए निजी डेवलपर का चयन करना है, जो चार दिन पहले 25 जून को कर लिया गया है।
बिक्री अधिकार पर सवाल
हालांकि यह कोई सामान्य निर्माण ठेका नहीं है। टेंडर की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि डेवलपर को उसके काम के बदले मिक्स्ड यूज भूमि के डेवलपमेंट राइट्स और सेलिंग राइट्स दिए जाएंगे। यानी डेवलपर को केवल निर्माण एजेंसी नहीं, बल्कि उसे जमीन के व्यावसायिक दोहन का अधिकार भी मिलेगा। यही वजह है कि इस टेंडर ने शुरुआत से ही कई सवाल खड़े किए हैं। डेवलपर को भूमि के विकास और बिक्री अधिकार दिए जाने का मॉडल अपनाया गया है। इससे भविष्य में हजारों करोड़ रुपए मूल्य की जमीन के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता खुल सकता है। इसी बीच प्राधिकरण द्वारा हाईकोर्ट में कैविएट दायर किए जाने से मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। कैविएट में साफ लिखा गया है कि जनरल पब्लिक का कोई भी व्यक्ति इस टेंडर या इससे जुड़ी कार्रवाई के खिलाफ याचिका दायर कर सकता है। इसलिए अदालत कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने से पहले प्राधिकरण को सुनवाई का अवसर दे।
प्राधिकरण आशंकित
कानूनी जानकारों के अनुसार कैविएट दायर करना कानूनन पूरी तरह वैध प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य एकतरफा आदेश से बचना होता है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि जब अभी तक कोई याचिका दायर ही नहीं हुई, तब प्राधिकरण को पहले से जनता की ओर से कानूनी चुनौती मिलने की आशंका क्यों सताने लगी? क्या टेंडर की शर्तों, जमीन के विकास अधिकार या बिक्री अधिकार को लेकर संभावित विवाद का अंदेशा पहले से था? प्राधिकरण का कहना है कि टाउन डेवलपमेंट स्कीम को छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम के तहत विधिवत स्वीकृति मिल चुकी है और इसका राजपत्र में प्रकाशन भी हो चुका है। इसके बावजूद उसने एहतियातन कैविएट दायर की है ताकि किसी भी याचिका पर उसका पक्ष सुने बिना कोई आदेश पारित न हो।
विवादों का साया
हालांकि टेंडर खुल चुका है और उसमें ब्लैकलिस्ट कंपनी की एंट्री की बात कही जा रही है, वहीं प्राधिकरण के प्रबंधक का कहना है कि टेंडर अभी तकनीकी मूल्यांकन के अधीन है। इस पर मूल्यांकन समिति ही अंतिम फैसला लेगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस टेंडर को लेकर यदि जनहित याचिका दायर होती है तो अदालत में केवल टेंडर प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि सरकारी जमीन के विकास और बिक्री अधिकार निजी डेवलपर को देने की पूरी व्यवस्था भी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल इतना तय है कि इस कैविएट ने नया रायपुर की इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
FAQ
- नया रायपुर टेंडर विवाद क्या है?
नया रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (एनआरएएनवीपी) के टाउन डेवलपमेंट स्कीम (टीडीएस) टेंडर में निजी डेवलपर को सड़क, नाली और अन्य आधारभूत सुविधाओं के निर्माण के साथ मिक्स्ड यूज जमीन के विकास और बिक्री अधिकार देने का प्रस्ताव है। - TDS में डेवलपर को जमीन बेचने का अधिकार कैसे मिलेगा?
इस टेंडर के अनुसार निजी डेवलपर पहले इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगा। इसके बदले उसे प्राधिकरण द्वारा तय मिक्स्ड यूज भूमि के डेवलपमेंट राइट्स और सेलिंग राइट्स दिए जाएंगे, जिससे वह निर्धारित नियमों के तहत उस जमीन का विकास और बिक्री कर सकेगा।
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