बिना सहमति कर्मचारी को नहीं भेज सकते प्रतिनियुक्ति पर, हाईकोर्ट ने रोका आदेश
Harrison Masih | Jun 19, 2026, 19:07 IST
harry - 2026-06-19T190725.360
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक ट्रांसफर और प्रतिनियुक्ति आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी को बिना उसकी सहमति के प्रतिनियुक्ति पर नहीं भेजा जा सकता।
समझें क्या है पूरा मामला
क्या था सरकार का आदेश
साथ ही सक्ती की वर्तमान डीईओ डॉ कुमुदिनी वाघ द्विवेदी को डाइट यानी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET - District Institute of Education and Training) में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। डॉ कुमुदिनी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
क्या है कानूनी आधार
कानून के अनुसार किसी सरकारी कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजने से पहले उसकी अनिवार्य सहमति लेनी जरूरी है। बिना सहमति का यह आदेश कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने 11 जून के विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
सक्ती में अब दो DEO की उलझन
एक ओर विजय तांडे को सक्ती का नया डीईओ बनाया गया है। दूसरी ओर डॉ कुमुदिनी अभी भी अपने पद पर बनी रहेंगी क्योंकि उनके प्रतिनियुक्ति आदेश पर रोक है।
यह स्थिति स्कूल शिक्षा विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। आने वाले दिनों में कामकाज को लेकर विवाद की आशंका है।
कर्मचारी को डेपुटेशन पर कब भेजा जा सकता है
FAQ
- सक्ती में दो DEO की स्थिति क्यों बनी?
सरकार ने विजय तांडे को सक्ती का नया डीईओ बनाया। लेकिन हाईकोर्ट ने डॉ कुमुदिनी के प्रतिनियुक्ति आदेश पर रोक लगा दी। इस कारण वे अभी भी अपने पद पर हैं। अब एक ही जिले में दो डीईओ हो गए हैं। - क्या सरकार किसी को डेपुटेशन पर भेज सकती है?
नहीं। कानूनन किसी भी सरकारी कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर भेजने से पहले उसकी अनिवार्य सहमति लेनी जरूरी है। बिना सहमति का आदेश कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन माना जाता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। - प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) और ट्रांसफर में क्या अंतर है?
प्रतिनियुक्ति में किसी कर्मचारी को अस्थायी रूप से किसी दूसरे विभाग, संस्था या पद पर काम करने के लिए भेजा जाता है, जबकि उसका मूल विभाग बना रहता है। वहीं ट्रांसफर (स्थानांतरण) में कर्मचारी को अपने ही विभाग के अंदर या किसी अन्य स्थान पर नियमित रूप से पदस्थ किया जाता है।
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