4 दशक से जंगलों में सक्रिय खूंखार नक्सली दंपती ने किया सरेंडर

Umeshwari Baghel | May 26, 2026, 21:10 IST
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तेलंगाना में माओवादी संगठन के दो वरिष्ठ नेताओं ने सरेंडर कर दिया। इनमें सेंट्रल कमेटी मेंबर पसुनूरी नरहरी और उसकी पत्नी मेदारा दनम्मा शामिल हैं। नरहरी 1982 से संगठन में सक्रिय था और हथियार निर्माण का विशेषज्ञ माना जाता था।

NEWS IN SHORT

  • 44 साल बाद हथियार छोड़ लौटा बड़ा नक्सली नेता
  • तेलंगाना में हार्डकोर नक्सली दंपती का सरेंडर
  • रॉकेट और बूबी ट्रैप एक्सपर्ट नक्सली ने डाले हथियार
  • बिहार-झारखंड नेटवर्क संभालने वाला नक्सली गिरफ्तार नहीं सरेंडर हुआ
  • जंगल छोड़ मुख्यधारा में लौटे माओवादी संगठन के दो बड़े चेहरे

NEWS IN DETAIL

Jagdalpur। तेलंगाना में आज मंगलवार को नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा। माओवादी संगठन के दो वरिष्ठ कैडर्स ने तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। दोनों ने आज 26 मई को डीजीपी सीवी आनंद के सामने हथियार डाले।सरेंडर करने वालों में सेंट्रल कमेटी मेंबर पसुनूरी नरहरी उर्फ विश्वनाथ उर्फ सलई दा और उसकी पत्नी मेदारा दनम्मा उर्फ लता उर्फ पूनम शामिल हैं। दोनों लंबे समय से माओवादी संगठन में सक्रिय थे।



बिहार-झारखंड नेटवर्क संभाल रहा था नरहरी

तेलंगाना पुलिस के मुताबिक नरहरी माओवादी संगठन का बेहद अहम चेहरा माना जाता था। वह बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सचिव भी था। 64 वर्षीय नरहरी तेलंगाना के हनमकोंडा जिले के सोमिडी गांव का रहने वाला है। उसने 1982 में अंडरग्राउंड दलम सदस्य के तौर पर संगठन जॉइन किया था।



इसके बाद वह लगातार संगठन में ऊपर बढ़ता गया। साल 1986 में कमांडर बना। फिर 2000 में रीजनल कमेटी मेंबर बनाया गया। बाद में उसे बिहार और झारखंड क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई।



हथियार और विस्फोटक बनाने में था माहिर

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार नरहरी नक्सलियों के टेक्निकल विंग का बड़ा एक्सपर्ट था। वह हथियार तैयार करने और तकनीकी ट्रेनिंग देने का काम संभालता था। उसे मोर्टार, रॉकेट, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड, ग्रेनेड और बूबी ट्रैप बनाने में महारत हासिल थी। वह हथियारों की रिपेयरिंग और रखरखाव की ट्रेनिंग भी देता था। 2010 में बनी टेक्निकल टीम का वह प्रमुख रहा। बाद में उसे बिहार स्टेट कमेटी और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो में भी अहम जिम्मेदारियां मिलीं।



कोल्हान इलाके में भी रहा सक्रिय

जानकारी के मुताबिक 2018 से 2020 तक नरहरी झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय रहा। इस दौरान वह स्टेट मिलिट्री कमीशन का प्रभारी भी था। साल 2026 में उसे बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी का सचिव बनाया गया था। सुरक्षा एजेंसियां उसे संगठन के बड़े रणनीतिक चेहरों में गिनती थीं।



पत्नी भी थी संगठन की सीनियर सदस्य

सरेंडर करने वाली मेदारा दनम्मा भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रही थी। वह बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी में स्टेट कमेटी मेंबर के पद पर सक्रिय थी। 55 वर्षीय दनम्मा आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की रहने वाली है। संगठन में उसे लता, पूनम और जोबा जैसे कई नामों से जाना जाता था। दोनों पति-पत्नी लंबे समय से नक्सल संगठन के लिए काम कर रहे थे और अलग-अलग इलाकों में कैडर संचालन की जिम्मेदारी संभालते रहे।



सुरक्षा एजेंसियां की बड़ी सफलता

(छत्तीसगढ़ तेलंगाना बॉर्डर ) तेलंगाना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस सरेंडर को बड़ी कामयाबी मान रही हैं। माना जा रहा है कि इससे बिहार-झारखंड क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लग सकता है। हाल के महीनों में लगातार दबाव और ऑपरेशन के चलते कई नक्सली संगठन छोड़ रहे हैं।



FAQ

  1. किन नक्सली नेताओं ने सरेंडर किया?
    पसुनूरी नरहरी और उसकी पत्नी मेदारा दनम्मा ने सरेंडर किया।
  2. सरेंडर कहां हुआ?
    दोनों ने तेलंगाना में डीजीपी सीवी आनंद के सामने सरेंडर किया।
  3. नरहरी संगठन में कौन सा पद संभाल रहा था?
    वह सेंट्रल कमेटी मेंबर और BJSAC सचिव था।
  4. नरहरी की खास भूमिका क्या थी?
    वह हथियार और विस्फोटक बनाने का विशेषज्ञ माना जाता था।

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