NCRB रिपोर्ट: भ्रष्टाचार में टॉप 10 राज्यों में शामिल हैं एमपी और राजस्थान, सीजी में बढ़े मामले
भ्रष्टाचार एक ऐसी अमरबेल है जो हर राज्य में और हर सरकार में फैली है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट कहती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में मध्यप्रदेश और राजस्थान देश के टॉप टेन राज्यों में शुमार हैं। राजस्थान चौथे नंबर है तो एमपी आठवें नंबर पर है। छत्तीसगढ़ की स्थिति थोड़ी बेहतर है लेकिन यहां भी दो साल में साढ़े तीन गुना मामले बढ़ गए हैं। बीजेपी शासित महाराष्ट्र देश में अव्वल नंबर पर है। एनसीआरबी की यह रिपोर्ट साल 2024 के मामले बता रही है। इस समय इन तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार बन चुकी थी।
भ्रष्टाचार की अमरबेल:
भ्रष्टाचार देश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में बना हुआ है। सरकारें बदलती हैं, दावे बदलते हैं, लेकिन रिश्वतखोरी, घोटाले और पद के दुरुपयोग के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर इस गंभीर समस्या की तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार के मामलों में मध्यप्रदेश और राजस्थान देश के टॉप-10 राज्यों में शामिल हैं, जबकि छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों में साढ़े तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह सारे मामले प्रिवेंशन ऑफ करॅप्शन एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं। यह मामले एसीबी, लोकायुक्त या विजिलेंस ने दर्ज किए हैं।
भ्रष्टाचार के इतने मामले :
मध्यप्रदेश :
साल 2022- 294
साल 2023-262
साल 2024- 237
राजस्थान :
साल 2022- 511
साल 2023- 316
साल 2024- 318
छत्तीसगढ़ :
साल 2022- 13
साल 2023-0
साल 2024- 47
महाराष्ट्र सबसे ऊपर, राजस्थान चौथे नंबर पर :
एनसीआरबी की रिपोर्ट (NCRB report) वर्ष 2024 के दर्ज मामलों (corruption in india) पर आधारित है। खास बात यह है कि रिपोर्ट जिन राज्यों की तस्वीर पेश कर रही है उस समय मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बीजेपी की सरकारें थीं। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में महाराष्ट्र देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद अन्य बड़े राज्यों का नंबर आता है। राजस्थान चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि मध्यप्रदेश आठवें नंबर पर दर्ज हुआ है। इन राज्यों में रिश्वत लेने, सरकारी पद का दुरुपयोग करने, टेंडर और खरीद प्रक्रियाओं में अनियमितता जैसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है।
छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़े मामले :
छत्तीसगढ़ की स्थिति भले ही टॉप-10 राज्यों जैसी गंभीर नहीं दिखती, लेकिन यहां भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो वर्षों में राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों में साढ़े तीन गुना तक इजाफा हुआ है। राज्य में हाल के वर्षों में कई विभागों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले चर्चा में रहे हैं। इनमें भर्ती घोटाले, टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी और विभागीय खरीद में अनियमितताओं के आरोप प्रमुख रहे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की कार्रवाईयों में भी वृद्धि हुई है।
कार्रवाई बेहद कम :
भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर देशभर में सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़े जांच और कार्रवाई की असली तस्वीर सामने ला रहे हैं। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के अधिकांश मामले अब भी जांच के स्तर पर अटके हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि हजारों मामलों के बावजूद विभागीय कार्रवाई बेहद सीमित रही है।
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा लंबित जांच :
आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के 56 मामले जांच स्तर पर लंबित हैं और यह कुल मामलों का 97.4 फीसदी है। यानी राज्य में दर्ज लगभग सभी मामलों की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। यह स्थिति बताती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया बेहद धीमी है। राजस्थान में भ्रष्टाचार के 1685 मामले जांच में लंबित हैं। यह कुल मामलों का 91.6 फीसदी है। यानी हर दस में से नौ से अधिक मामलों की जांच पूरी नहीं हुई।
हालांकि विभागीय कार्रवाई के मामले में राजस्थान बाकी राज्यों से आगे दिखता है।मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के 626 मामले जांच में लंबित हैं, जो कुल मामलों का 84.5 फीसदी है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने मामलों के बावजूद राज्य में किसी भी आरोपी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई दर्ज नहीं की गई। यानी न तो किसी को निलंबित किया गया और न ही बर्खास्त। इससे जांच एजेंसियों और विभागीय कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ये है इन्वेस्टीगेशन में पेंडिंग केस की स्थिति :
मध्यप्रदेश - 626 84.5 फीसदी
राजस्थान - 1685 91.6 फीसदी
छत्तीसगढ़ - 56 97.4 फीसदी
इतने हुए विभागीय एक्शन :
मध्यप्रदेश : कोई विभागीय एक्शन नहीं।
राजस्थान : 17 को डिसमिस किया।
छत्तीसगढ़ : 1 के खिलाफ कार्रवाई की
क्या कहते हैं जानकार :
विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सबसे बड़ी समस्या लंबी जांच प्रक्रिया है। कई मामलों में सालों तक जांच पूरी नहीं होती, जिससे आरोपी अधिकारी सेवा में बने रहते हैं। विभागीय कार्रवाई नहीं होने से सिस्टम में जवाबदेही भी कमजोर पड़ती है। पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि जब तक जांच समयबद्ध नहीं होगी और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।
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