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Photograph: (the sootr)
​यह सप्ताह राजस्थान के लिए मिश्रित भावनाओं वाला रहा। जहां यूपीएससी 2025 में टॉपर बने अनुज अग्निहोत्री की सफलता ने हमें भविष्य के प्रति आश्वस्त किया, वहीं विधानसभा की तस्वीरों ने वर्तमान व्यवस्था पर सोचने को मजबूर किया। होली का रंग उतर चुका है, लेकिन घोटालों की जांच और सियासत के दांव-पेंचों का रंग आने वाले दिनों में और गहरा होने वाला है।
शिखर पर राजस्थान, अनुज की सुनहरी सफलता
होली पर्व खत्म होने के साथ ही जब यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम आए तो प्रदेश की खुशियां दोगुनी हो गई। रावतभाटा के ​अनुज अग्निहोत्री ने अखिल भारतीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया। ​यह जीत इसलिए बड़ी नहीं है कि वे टॉपर बने, बल्कि इसलिए प्रेरणादायी है, क्योंकि उन्होंने यह मुकाम अपने तीसरे प्रयास में हासिल किया।
वर्तमान में दिल्ली में एसडीएम के पद पर कार्यरत अनुज ने अपनी रैंक सुधारने की जो जिद पकड़ी, उसने उन्हें देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा के शिखर पर बैठा दिया। राजस्थान के लिए यह 'सूखा' 7 साल बाद खत्म हुआ है। इससे पहले 2018 में कनिष्क कटारिया और 2013 में गौरव अग्रवाल ने यह गौरव प्रदेश को दिलाया था।
​इस बार की सूची में राजस्थान का 'दबदबा' साफ दिखा। छोटे शहरों से निकली 36 प्रतिभाओं ने साबित कर दिया कि प्रतिभा अब केवल मेट्रो शहरों की बपौती नहीं है। आर्यन (31वीं रैंक), मयंक (33वीं रैंक), साक्षी (37वीं रैंक) और रोहित जाखड़ (39वीं रैंक) जैसे नामों ने प्रदेश के उन हजारों युवाओं की आंखों में चमक भर दी है, जो संसाधनों के अभाव में बड़े सपने देखने से कतराते थे।
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जब मरुधरा तक पहुंची युद्ध की तपिश
दुनिया के नक्शे पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ती तल्खी ने समंदर पार सात हजार किलोमीटर दूर बैठे राजस्थानियों के माथे पर भी पसीना ला दिया। मिडिल ईस्ट के इस तनाव का सीधा असर राजस्थान के पर्यटन और व्यापार पर पड़ा है।
​जयपुर एयरपोर्ट से खाड़ी देशों की उड़ानें पिछले एक सप्ताह से स्थगित हैं। सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाली खबर जोधपुर से आई, जहां आध्यात्म यात्रा पर गए रामस्नेही समुदाय के 120 यात्री दुबई में फंस गए। हालांकि, कूटनीतिक प्रयासों के बाद उनकी सकुशल वापसी हो गई है, लेकिन अभी भी कई लोग वतन वापसी की राह देख रहे हैं।
इस युद्ध जैसी स्थिति ने हाड़ोती के प्रसिद्ध चावल निर्यात की कमर तोड़ दी है। खाड़ी देश राजस्थान के कृषि उत्पादों के बड़े खरीदार हैं, और सप्लाई चेन बाधित होने से करोड़ों का टर्नओवर अधर में लटका है।
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सियासत की 'पिच' पर भ्रष्टाचार की गुगली
​राजस्थान की राजनीति में इस सप्ताह 'भ्रष्टाचार' शब्द सबसे ज्यादा गूंजा। राज्य सरकार अब जीरो टॉलरेंस की नीति को आक्रामक तरीके से लागू करती दिख रही है। ​जल जीवन मिशन घोटाले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल पर कार्रवाई के बाद अब गाज पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना पर गिरती दिख रही है।
मामला वर्ष 2022-23 में ग्राम सेवा सहकारी समितियों में हुई 1100 से अधिक नियुक्तियों का है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर 'चहेतों' को प्रबंधकों की कुर्सी बांट दी गई। एसीबी की जांच में पात्रता मानदंडों की धज्जियां उड़ाने के सबूत मिले हैं। हालांकि, आंजना इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, लेकिन एसीबी की एफआईआर की तैयारी ने सियासी गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है।
विधानसभा या 'अखाड़ा', मर्यादाएं हुईं तार-तार
​लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को जो दृश्य दिखा, उसने संसदीय गरिमा पर कई सवाल खड़े कर दिए। राजस्थान दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान संशोधन विधेयक-2026 पर चर्चा होनी थी, लेकिन चर्चा की जगह 'गाली-गलौज' और हंगामे ने ले ली। ​सभापति की कुर्सी पर बैठे संदीप शर्मा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं।
जब डोटासरा ने समय सीमा को लेकर आपत्ति जताई, तो मामला व्यक्तिगत आक्षेपों तक जा पहुंचा। सभापति द्वारा विपक्षी विधायकों के लिए 'सड़क छाप' जैसे शब्दों का इस्तेमाल और बदले में डोटासरा द्वारा 'मानसिक जांच' की मांग ने सदन को अखाड़ा बना दिया। पक्ष और विपक्ष के विधायक वेल (Well) में आकर एक-दूसरे से भिड़ने को उतारू थे। यह दृश्य राजस्थान की संसदीय परंपरा के लिए एक काला अध्याय जैसा था।
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अजमेर घोटाले पर सरकार बैकफुट पर
​शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने एक बार फिर साबित किया कि वे सदन में तथ्यों के साथ उतरते हैं। अजमेर नगर निगम में हुए पट्टा घोटाले और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के मुद्दे पर उन्होंने सरकार को इस कदर घेरा कि नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा को चार अधिकारियों को तत्काल एपीओ करने की घोषणा करनी पड़ी।
भाटी ने उजागर किया कि कैसे सरकारी तंत्र और भूमाफिया की जुगलबंदी ने करोड़ों की सरकारी जमीन को खुर्द-बुर्द करने का खेल रचा। यह मामला केवल एक जमीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे उन 'दीमकों' का है जो जनता की संपत्ति को चट कर रहे हैं।
उदयपुर फाइल्स: जांच के चेहरे बदले, पर क्या नीयत बदलेगी
उदयपुर के चर्चित 'वीडियो-ब्लैकमेलिंग और रेप' कांड में पुलिस मुख्यालय को आखिरकार झुकना पड़ा। 22 दिनों तक भारी विवाद और डीएसपी गोपाल चंदेल की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बाद अब जांच एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाडा को सौंपी गई है।
​इस हाई-प्रोफाइल मामले ने भाजपा की एक महिला नेता और एक वकील के बीच के विवाद को जिस तरह सार्वजनिक किया, उसने पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। सवाल यह है कि क्या जांच अधिकारी बदलने से उस 'राजनीतिक दबाव' का असर खत्म होगा, जो इस मामले को शुरुआत से ही दबाने की कोशिश कर रहा है?
दरअसल, सफलता के आसमान पर उड़ते राजस्थान को अपनी जमीनी सियासत की मर्यादा और प्रशासनिक शुचिता को बचाने की सख्त जरूरत है।
अगले सप्ताह फिर मिलते हैं चिट्ठी के साथ।
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