छत्तीसगढ़ श्रम कानून में बड़ा बदलाव, ड्राफ्ट तैयार, डिलेवरी बॉयज भी आएंगे दायरे में
छत्तीसगढ़ सरकार बड़े सशोधन के साथ नया श्रम कानून लागू करने जा रही है। जिसमें हर वर्ग का मजदूर सिस्टम में दर्ज होगा। श्रम विभाग ने इसे सामाजिक सुरक्षा संहिता नियम 2026 नाम दिया है। जिसका ड्राफ्ट भी तैयार हो गया है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव डिलेवरी ब्वायज को लेकर देखा जा रहा है। नए नियम के अनुसार अब वे भी श्रम कानून के दायरे में आएंगे। दावा है कि इससे ब्लिंकिट-स्वीगी, फ्लिपकार्ट, अमेजान जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों पर श्रम विभाग की निगरानी होगी। सिस्टम पारदर्शी होगा, मजदूरों के अधिकार सुरक्षित होंगे।
पुराने कानून OUT, नया सिस्टम IN
सरकार ने साफ कर दिया है कि पुराने सभी कानून बंद हो जाएंगे, उनकी जगह एक ही कानून लागू रहेगा। यानी सभी नियमों को सामाजिक सुरक्षा संहिता नियम 2026 में ही शामिल कर दिया जाएगा। सरकार इसे “Ease of Doing” और “Ease of Living” का कॉम्बिनेशन बता रही है, लेकिन असल परीक्षा तब होगी जब मजदूर को बिना चक्कर लगाए लाभ मिलना शुरू होगा।
डिजिटल युग का मजदूर
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा हथियार डिजिटल पंजीकरण है। हर श्रमिक का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर रहेगा। मतलब साफ है,अब “कागज खो गया” या “फाइल अटक गई” जैसे बहाने नहीं चलेंगे। हालांकि, जिन मजदूरों के पास डिजिटल पहुंच नहीं है, उनके लिए ये सुविधा वरदान बनेगी या परेशानी, यह देखना बाकी है।
नोडल अधिकारी और नया बोर्ड
ड्राफ्ट में हर स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान है। यानी अब पंजीकरण या लाभ में देरी हुई तो जिम्मेदार कौन, यह साफ रहेगा। साथ ही ‘छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल’ का गठन होगा, जिसकी कमान श्रम मंत्री के हाथ में हो गी।इस बोर्ड में SC, ST, OBC और महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना, सरकार का बड़ा सामाजिक संदेश माना जा रहा है।
Gig Workers भी सिस्टम में
अब तक सिस्टम से बाहर रहे गिग वर्कर्स, जैसे डिलीवरी बॉय, ऐप ड्राइवर,अब इस दायरे में आएंगे। ओला, उबर, जोमैटो, स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े युवाओं को पहली बार सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिलेगा। यानी “फ्रीलांसर” टैग के पीछे छिपी असुरक्षा अब धीरे-धीरे खत्म करने की कोशिश है।
ग्रैच्युटी का गेम बदल गया
फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट वालों के लिए बड़ी राहत है। अब उन्हें भी आनुपातिक आधार पर ग्रैच्युटी मिलेगी। पहले ये नियम इतने जटिल थे कि ज्यादातर कर्मचारी इसका लाभ ही नहीं उठा पाते थे। सरकार इसे “वर्कर-फ्रेंडली रिफॉर्म” बता रही है।
आधार अनिवार्य: फर्जीवाड़े पर सीधा वार
अब बिना आधार नंबर के कोई लाभ नहीं मिलेगा। सब्सिडी हो या मेडिकल सुविधा पहचान आधार से ही होगी। सरकार का तर्क है, इससे फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी। लेकिन सवाल ये भी है कि क्या इससे जरूरतमंदों को बाहर तो नहीं कर दिया जाएगा?
अब खुद करें रजिस्ट्रेशन: दफ्तरों से छुट्टी
श्रमिक अब खुद पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन (CG Labour Law) कर सकेंगे। यानी दलालों और बाबुओं की भूमिका कम होगी। सिस्टम अगर सही चला, तो ये सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
निरीक्षण भी होगा डिजिटल: भ्रष्टाचार पर लगाम?
नई निरीक्षण प्रणाली पूरी तरह वेब-आधारित होगी। इंस्पेक्टर अब मनमर्जी से नहीं, बल्कि सिस्टम के जरिए रैंडम चयन के आधार पर जांच करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे भ्रष्टाचार कम होगा, लेकिन सिस्टम की पारदर्शिता ही इसकी असली परीक्षा होगी।
45 दिन का मौका: जनता दे सकती है राय
फिलहाल “सामाजिक सुरक्षा संहिता नियम 2026” का यह केवल ड्राफ्ट रूप है, जिसे अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने आम जनता, श्रमिक संगठनों और संबंधित पक्षों से 45 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसका मतलब है कि अभी भी नियमों में बदलाव की पूरी गुंजाइश बनी हुई है, और यदि लोग सक्रिय रूप से अपनी राय रखते हैं तो यह कानून और अधिक प्रभावी तथा व्यावहारिक बनाया जा सकता है।
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