एनएमसी मान्यता का जुगाड़ : मंजूरी मिलते ही नए मेडिकल कॉलेजों से 12 प्रोफेसर बाहर
छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा का दायरा बढ़ाने के नाम पर सरकार ने पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेज शुरू करने का ऐलान किया। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कबीरधाम, जांजगीर चांपा, मनेंद्रगढ़, कुनकुरी और गीदम में कॉलेज शुरू होने हैं। हर कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटें हैं। यानी कुल 250 नई सीटें।
इसके लिए छग ने नेशनल मेडिकल कमीशन ने अनुमति मांगी। एनएमसी ने जब पहली बार मान्यता देने से इनकार किया तो स्वास्थ्य विभाग ने टीचिंग स्टॉफ की लंबी लिस्ट तैयार कर दी। जबकि उनकी नई नियुक्ति नहीं, बल्कि छग के दूसरे मेडिकल कॉलेजों से भेजा गया था। अब मान्यता मिलने के बाद राज्य ने संशोधित आदेश जारी कर उन्हें वापस बुला लिया है।
एनएमसी ने पकड़ ली कमी
कागज पर कॉलेज तैयार थे, लेकिन मौके पर तस्वीर कमजोर थी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी एनएमसी ने इंफ्रास्ट्रक्चर, मशीनरी और सबसे अहम टीचिंग फैकल्टी की कमी पर सवाल उठाए। पर्याप्त संसाधन नहीं होने से मान्यता अटक गई। इसके बाद विभाग ने कमियां दूर करने के साथ फैकल्टी की व्यवस्था शुरू की।
दूसरे कॉलेजों से उधार की फैकल्टी
यहीं से असली खेल शुरू हुआ। नए मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों को वहां भेज दिया गया। यानी नई नियुक्ति करने की जगह पुराने कॉलेजों की टीम को ही नए कॉलेज में खड़ा कर दिया गया। इन डॉक्टरों को बेहतर वेतन और दूसरी सुविधाएं देकर नई जगह भेजा गया।
मान्यता मिली, कहानी पलटी
एनएमसी की मंजूरी मिलने के बाद अब वही डॉक्टर नए कॉलेजों से हटाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संशोधित पदस्थापना आदेश जारी कर 12 डॉक्टरों को दूसरी जगह भेज दिया है। जिस फैकल्टी के भरोसे नए कॉलेजों की मान्यता का रास्ता साफ हुआ, वही टीम मंजूरी के बाद बिखरने लगी। यही सबसे बड़ा सवाल है।
क्या सिर्फ दिखाने के लिए टीम थी?
पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि क्या नए कॉलेजों के लिए स्थायी फैकल्टी तैयार करने के बजाय निरीक्षण और मान्यता के समय दूसरे कॉलेजों से डॉक्टर भेजकर संख्या पूरी की गई? अगर पुराने कॉलेजों से डॉक्टर हटाने ही थे, तो वहां पहले से फैकल्टी की कमी का समाधान कैसे हुआ? और नए कॉलेजों में अब पढ़ाई किस टीम के भरोसे चलेगी?
12 डॉक्टरों का बड़ा फेरबदल
संशोधित आदेश के मुताबिक डॉ. स्निग्धा जैन बंसल को कबीरधाम से रायपुर, डॉ. मनीष पाटिल को जांजगीर-चांपा से दुर्ग और डॉ. नितिन वले को महासमुंद से दुर्ग भेजा गया है। डॉ. विशाल कुलकर्णी दंतेवाड़ा से कांकेर और डॉ. राजीव रतन जैन बिलासपुर से रायपुर कैंसर संस्थान भेजे गए हैं।
बाकी डॉक्टर भी लौटे
डॉ. शशिकला कोसम जशपुर से कबीरधाम, डॉ. नरेंद्र नरसिंह मनेंद्रगढ़ से महासमुंद, डॉ. केशव कश्यप जांजगीर चांपा से बिलासपुर और डॉ. चंद्रपाल भगत जशपुर से दुर्ग भेजे गए हैं। डॉ. अजय हलवाई जांजगीर से दुर्ग, डॉ. राजेंद्र रात्रे कबीरधाम से महासमुंद और डॉ. विवेक शर्मा कबीरधाम से दुर्ग भेजे गए हैं।
250 सीटों पर बड़ा सवाल
सरकार ने 250 नई एमबीबीएस सीटों का सपना दिखाया है। लेकिन सवाल अब डॉक्टरों की संख्या का है। अगर मान्यता के लिए फैकल्टी जुटाई गई और मंजूरी मिलते ही वही फैकल्टी हटने लगी, तो नए मेडिकल कॉलेजों की असली ताकत क्या है? मेडिकल शिक्षा में जुगाड़ नहीं, स्थायी व्यवस्था चाहिए। वरना 250 सीटें बढ़ेंगी, लेकिन डॉक्टरों की कमी वहीं की वहीं रह जाएगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026-27 के लिए कितने नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी मिली है?
छत्तीसगढ़ में कुल 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दी गई है। - छत्तीसगढ़ में नए मेडिकल कॉलेज किन-किन जिलों/स्थानों पर खोले गए हैं?
1. कबीरधाम (कवर्धा) 2. जांजगीर-चांपा 3. मनेंद्रगढ़ 4. कुनकुरी (जशपुर) 5. गीदम (दंतेवाड़ा) - भारत में मेडिकल कॉलेजों को मान्यता कौन सी संस्था देती है?
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission - NMC)।
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