ESIC Hospital में 13 नर्सों से आधी सैलरी वसूलने का भंडाफोड़, FIR के निर्देश

Umeshwari Baghel | Aug 10, 2026, 22:48 IST
रायपुर ESIC में बड़ा सैलरी घोटाला
रायपुर ESIC अस्पताल की 13 नर्सों ने निजी एजेंसी पर आधी सैलरी हड़पने का आरोप लगाया है। नर्सों का कहना है कि ATM, चेकबुक और पासबुक भी एजेंसी के पास थे। महिला आयोग ने मामले में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 13 नर्सों की सैलरी में गड़बड़ी, एजेंसी पर FIR के निर्देश
  • ESIC की नर्सों का आरोप, आधी सैलरी ले रही थी एजेंसी
  • नर्सों ने खोला वेतन कटौती का मामला, महिला आयोग सख्त
  • ATM और बैंक दस्तावेज रखने का आरोप, एजेंसी पर कार्रवाई
  • 40 हजार की सैलरी में मिलते थे आधे पैसे, जांच शुरू

Raipur। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सुनवाई में एक बड़ा मामला सामने आया है। (esic hospital )रायपुर के ESIC अस्पताल में काम करने वाली 13 नर्सों ने एक निजी एजेंसी पर उनकी सैलरी का आधा हिस्सा लेने का आरोप लगाया है। नर्सों ने महिला आयोग में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं। मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने एजेंसी और संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।



नर्सों ने अपनी शिकायत में बताया कि करीब दो साल पहले उनकी नियुक्ति एक निजी एजेंसी के माध्यम से ESIC अस्पताल रायपुर में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर हुई थी। नियुक्ति के समय उन्हें हर महीने 40 हजार से 48 हजार रुपए तक वेतन मिलने की जानकारी दी गई थी।



वेतन पूरा नहीं मिलने का लगाया आरोप

नर्सों का आरोप है कि काम पूरा करने के बाद भी उन्हें तय वेतन नहीं दिया गया। उनका कहना है कि हर महीने सैलरी खाते में आने के बाद एजेंसी से जुड़े लोग आधी रकम निकाल लेते थे। शिकायत में नर्सों ने आरोप लगाया कि एजेंसी के मालिक, ठेकेदार और सुपरवाइजर इस पूरी प्रक्रिया में शामिल थे। नर्सों ने इसे उनके साथ आर्थिक धोखाधड़ी बताया और कार्रवाई की मांग की।



रायपुर ESIC में बड़ा सैलरी घोटाला


ATM, चेकबुक और पासबुक रखने का आरोप

महिला आयोग में दी गई शिकायत में नर्सों ने बताया कि एजेंसी से जुड़े लोगों ने उनके बैंक से जुड़े दस्तावेज भी अपने पास रखे थे। नर्सों का आरोप है कि उनका ATM कार्ड, चेकबुक और पासबुक एजेंसी के लोगों के पास थे। वेतन आने के बाद एजेंसी के कर्मचारी पैसे निकाल लेते थे और नर्सों को केवल बची हुई राशि दी जाती थी।



महिला आयोग ने लिया गंभीरता से संज्ञान

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्यों सरला कोसरिया, ओजस्वी मंडावी और दीपिका शोरी ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान नर्सों ने अपनी परेशानी और आरोप आयोग के सामने रखे। वहीं, जिन लोगों पर आरोप लगाए गए थे, वे सुनवाई में लगातार उपस्थित नहीं हुए।



इसके बाद महिला आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए नर्सों को पुलिस में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए। आयोग ने कहा कि जरूरत पड़ने पर पीड़ित नर्सों को आगे की कानूनी प्रक्रिया में सहयोग दिया जाएगा।



महिला आयोग में छह मामलों का हुआ समाधान

महिला आयोग की सुनवाई में केवल नर्सों का मामला ही नहीं, बल्कि महिलाओं से जुड़े कई अन्य मामलों की भी सुनवाई हुई। एक महिला ने अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि पति ने तलाक लेकर दूसरी शादी कर ली और उसे व बच्चे के खर्च के लिए कोई आर्थिक मदद नहीं दी।



सुनवाई के दौरान सामने आया कि दोनों का एक साल का बच्चा है, जो बीमार रहता है। इलाज का खर्च भी काफी ज्यादा है। आयोग की समझाइश के बाद पति हर महीने 1500 रुपए भरण-पोषण देने के लिए तैयार हुआ।



मारपीट और आपत्तिजनक फोटो मामले में सलाह

एक अन्य मामले में महिला ने शारीरिक शोषण, मारपीट और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो बनाने की शिकायत की थी। महिला ने आयोग को बताया कि इस मामले में पहले से न्यायालय में सुनवाई चल रही है। आयोग ने उसे भरण-पोषण और परिवार न्यायालय में संबंधित प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी। इसके बाद मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के कारण आयोग स्तर पर बंद कर दिया गया।



पंचायत से बहिष्कार की शिकायत पर अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान एक महिला ने सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और पंचायत में प्रवेश से रोकने की शिकायत भी दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि उसे समाज से अलग कर दिया गया है। इस मामले में दूसरे पक्ष ने अपनी बात रखने के लिए समय मांगा। आयोग ने मामले को अगली सुनवाई के लिए रखा है। महिला आयोग की इस बैठक में कुल छह मामलों का समाधान किया गया। वहीं, बाकी मामलों में शिकायतों के आधार पर जरूरी निर्देश जारी किए गए।



FAQ

  1. नर्सों ने एजेंसी पर क्या आरोप लगाया है?
    13 नर्सों ने आरोप लगाया है कि एजेंसी उनकी तय सैलरी का आधा हिस्सा ले रही थी।
  2. नर्सों का वेतन कितना तय था और उन्हें कितना मिल रहा था?
    नर्सों के अनुसार उनका वेतन 40 हजार से 48 हजार प्रति माह तय था, लेकिन उन्हें पूरी राशि नहीं मिल रही थी।
  3. महिला आयोग ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
    महिला आयोग ने शिकायत के आधार पर एजेंसी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

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