छत्तीसगढ़ OBC सर्वे : कामकाजी लोगों को दिखाया बेरोजगार
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति जानने के लिए सर्वे चल रहा है। लेकिन इसमें भारी गड़बड़ी सामने आई है। पढ़े-लिखे लोगों को अनपढ़ और काम करने वाले लोगों को बेरोजगार दर्ज किया जा रहा है।
राज्य के पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने इन गड़बड़ियों को उजागर करते हुए सख्त चेतावनी दी है। नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निकायों को तुरंत सही डेटा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
क्यों हो रहा है यह सर्वे
छत्तीसगढ़ में ओबीसी (OBC – Other Backward Class) वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए यह सर्वे चलाया जा रहा है। भविष्य में इसी सर्वे के आधार पर OBC कल्याण की नीतियाँ बनेंगी।
इसीलिए इस सर्वे में की जा रही लापरवाही राज्य के एक बड़े वर्ग के भविष्य के लिए खतरनाक है।
शॉर्टकट का खेल — क्या-क्या गड़बड़ी मिली
आयोग ने 8 प्रमुख बिंदुओं पर गड़बड़ियाँ पकड़ी हैं। नगर निकाय स्तर पर काम में जल्दबाजी और मेहनत से बचने के लिए मनमाना डेटा भरा जा रहा है। पोर्टल पर 54 बिंदुओं के आधार पर जानकारी भरनी होती है। लेकिन अधिकारी सर्वे प्रपत्र देखे बिना अनुमान के आधार पर आंकड़े दर्ज कर रहे हैं।
पढ़े-लिखों को अनपढ़ क्यों दिखाया
इसके पीछे एक साफ वजह है। जब किसी सदस्य को 'शिक्षित' दर्ज किया जाता है तो पोर्टल पर स्कूल में प्रवेश की उम्र, विद्यालय का प्रकार, शैक्षणिक योग्यता और पढ़ाई छोड़ने का कारण जैसी कई अतिरिक्त जानकारियाँ भरनी पड़ती हैं। इस मेहनत से बचने के लिए अधिकारी सदस्य को सीधे अनपढ़ दर्ज कर देते हैं। इसी तरह कामकाजी लोगों को बेरोजगार दिखा दिया जाता है।
सरकारी योजनाओं का लाभ छिपाया
कई परिवार आवास योजना, ऋण अनुदान और पेंशन जैसी सरकारी योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं। लेकिन पोर्टल में केवल 'राशन कार्ड' का लाभ दर्ज किया गया है। वार्षिक आय के कॉलम में भी बड़ी गड़बड़ी है। कहीं कॉलम खाली छोड़ दिया गया है तो कहीं एक ही निकाय के सभी परिवारों की आय एकसमान भर दी गई है।
संपत्ति का विवरण भी गायब
कई परिवारों के बारे में यह तो दर्ज है कि उनका खुद का मकान है। लेकिन चल-अचल संपत्ति के कॉलम में शून्य भरा गया है। जाति प्रमाण पत्र और आरक्षण से मिले लाभ वाले कॉलम भी या तो खाली हैं या गलत भरे गए हैं।
कोरबा की केस स्टडी
आयोग ने एक ठोस उदाहरण सामने रखा है। कोरबा के एक परिवार में 55 वर्षीय महिला मुखिया हैं। परिवार में पाँच सदस्य हैं — तीन बच्चों सहित। पोर्टल पर पाँचों को अशिक्षित दर्ज किया गया है। पाँचों को बेरोजगार बताया गया है। परिवार की वार्षिक आय शून्य दर्ज है। कोई चल या अचल संपत्ति नहीं बताई गई है। लेकिन यह जरूर दर्ज है कि परिवार का खुद का मकान है। यह विरोधाभास ही इस डेटा की झूठ की पोल खोलता है।
आयोग ने दी सख्त चेतावनी
पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने साफ कहा है कि अगर यह गलत डेटा नहीं सुधारा गया तो यह सर्वे अन्य सरकारी एजेंसियों के आंकड़ों से मेल नहीं खाएगा। इससे पूरे सर्वे का उद्देश्य ही खतरे में पड़ जाएगा। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी निगम आयुक्त, नगर पालिका और नगर पंचायत के सीएमओ (CMO – Chief Municipal Officer) को पत्र जारी किया है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत क्षेत्र में जाकर परिवारों से दोबारा संपर्क करें और सही जानकारी पोर्टल पर दर्ज करें।
FAQ
- छत्तीसगढ़ OBC सर्वे में क्या गड़बड़ी मिली?
उ. पढ़े-लिखे लोगों को अनपढ़ और कामकाजी लोगों को बेरोजगार दर्ज किया गया। सरकारी योजनाओं का लाभ छिपाया गया और वार्षिक आय के कॉलम या तो खाली छोड़े गए या एक जैसे भरे गए। आयोग ने 8 बिंदुओं पर इन गड़बड़ियों को चिन्हित किया है। - भारत में पिछड़ा वर्ग आयोग क्या है और इसका काम क्या है?
उ. राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC – National Commission for Backward Classes) एक संवैधानिक संस्था है। यह OBC सूची में जातियों को शामिल या हटाने की सिफारिश करता है। राज्यों में भी इसी तरह के आयोग होते हैं जो स्थानीय स्तर पर OBC कल्याण की निगरानी करते हैं। - OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग क्या होता है?
उ. OBC यानी Other Backward Class — वे जातियाँ और समुदाय जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े माने जाते हैं। भारत में OBC को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। यह वर्गीकरण मंडल आयोग की 1980 की रिपोर्ट के आधार पर लागू हुआ।
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