पंचायत सचिवों को मिली छुट्टी, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने बांध दिए हाथ
छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत सचिवों के लिए सरकार ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। लेकिन इस राहत के साथ एक ऐसी शर्त भी जोड़ दी है, जिसने सचिवों के हाथ बांध दिए हैं। साल 2025 में हुए बड़े आंदोलन और 31 दिनों की लंबी हड़ताल के दिनों को अब सरकार ने छुट्टी में तो बदल दिया है, लेकिन साफ कह दिया है कि भविष्य में वे कभी भी हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। सरकार की इस 'शर्त' ने अब पंचायत गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
साल 2025 का वो बड़ा आंदोलन
मामला समझने के लिए थोड़ा पीछे चलना होगा। शासकीयकरण की मांग को लेकर प्रदेश के पंचायत सचिव लंबे समय से ताल ठोक रहे थे। कई दौर की बातचीत फेल होने के बाद साल 2025 में सचिवों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया था। 17 मार्च 2025 से 16 अप्रैल 2025 तक, यानी पूरे 31 दिनों तक गांवों में ताले लटके रहे। ग्रामीण विकास की सारी योजनाएं ठप हो गईं। सरकार ने एस्मा लगाया, चेतावनियां दीं, लेकिन सचिव टस से मस नहीं हुए।
जब जला दी थीं सरकारी आदेश की प्रतियां
आंदोलन के दौरान तल्खी इतनी बढ़ गई थी कि जब सरकार ने काम पर लौटने का कड़ा आदेश जारी किया, तो भड़के हुए सचिवों ने उसकी प्रतियां तक जला दीं। आंदोलन और तेज हो गया। आखिरकार 31 दिनों के भारी ड्रामे के बाद दोनों पक्षों में सहमति बनी। सचिव काम पर लौटे तो सही, लेकिन बिना अनुमति गायब रहने और काम बंद करने की सजा के तौर पर सरकार ने उनका वेतन काट दिया था। तब से सचिव इस कटे वेतन और अवधि को संभालने की गुहार लगा रहे थे।
14 जुलाई का सरकारी आदेश
अब जाकर मंत्रालय के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से एक नया आदेश जारी हुआ है। अवर सचिव अंजू सिंह के दस्तखत से 14 जुलाई 2026 को जारी इस आदेश में कहा गया है कि पंचायत सचिवों की उस 31 दिनों की हड़ताल अवधि का समायोजन किया जा रहा है। उनके खातों में मौजूद अर्जित अवकाश (Earned Leave) और बाकी दिनों के लिए विशेष अवकाश स्वीकृत कर दिया गया है। यानी कि कटे हुए पैसे या छुट्टी का मसला तो सुलझ गया, पर असली पेंच इसके नीचे छुपा था।
शर्तों की बेड़ी में बंधे सचिव
सरकार ने साफ लिखा है कि यह राहत 'भविष्य में कभी हड़ताल पर न जाने की शर्त के अधीन' दी जा रही है। एक सीनियर एडिटर के नजरिए से देखें तो सरकार ने सीधे तौर पर सचिवों के लोकतांत्रिक अधिकार पर ताला लगा दिया है। यानी अगर आगे कभी सचिवों की मांग पूरी नहीं होती है, तो भी वे आंदोलन का रास्ता नहीं चुन पाएंगे। अगर वे हड़ताल पर जाते हैं, तो यह सरकारी आदेश का उल्लंघन माना जाएगा और उन पर सीधी कार्रवाई हो सकती है।
आगे क्या होगा सचिवों का रुख?
इस आदेश के बाद पंचायत सचिव संघ में हलचल तेज है। एक तरफ 31 दिनों का वेतन सुरक्षित होने की खुशी है, तो दूसरी तरफ भविष्य के रास्ते बंद होने का डर। ग्रामीण स्तर पर सरकार की रीढ़ कहे जाने वाले इन सचिवों को अब फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा। देखना होगा कि इस 'कंडीशनल' राहत को सचिव संघ पूरी तरह स्वीकार करता है या फिर आने वाले दिनों में अंदर ही अंदर कोई नई रणनीति तैयार होती है।
FAQ
- वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ के पंचायत सचिवों के आंदोलन की मुख्य वजह और अवधि क्या थी?
उत्तर: छत्तीसगढ़ के पंचायत सचिवों के इस ऐतिहासिक आंदोलन की एकमात्र मुख्य मांग "शासकीयकरण" (शासकीय सेवा में समावेशन) थी, ताकि उन्हें पूर्ण सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सुविधाएं मिल सकें। कई दौर की प्रशासनिक वार्ताओं के विफल होने के बाद, सचिवों ने 17 मार्च 2025 से 16 अप्रैल 2025 तक कुल 31 दिनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी। इस दौरान राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य और पंचायत स्तर की सभी सरकारी योजनाएं पूरी तरह से ठप हो गई थीं। - 14 जुलाई 2026 के आदेश के तहत पंचायत सचिवों की हड़ताल अवधि का समायोजन कैसे किया गया है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सचिवों की 31 दिनों की हड़ताल अवधि को दो हिस्सों में बांटकर समायोजित (Regulate) किया गया है। पहला, सचिवों के सर्विस रिकॉर्ड में उपलब्ध अर्जित अवकाश (Earned Leave - EL) को इस अवधि में शामिल किया गया है। दूसरा, अर्जित अवकाश खत्म होने के बाद जितने दिनों की कमी पड़ रही थी, उसके लिए सरकार ने विशेष अवकाश (Special Leave) स्वीकृत कर दिया है, जिससे उनका कटा हुआ वेतन बहाल हो सके।
यह खबरें भी पढ़ें...
नगर निगम सीमा विस्तार में हुजूर विधानसभा के दो टुकड़े, शामिल होंगी 22 पंचायतें
पंचायत-निकाय चुनाव टालने की फिर गुहार, सरकार ने हाई कोर्ट में लगाई अर्जी
छत्तीसगढ़ महासमुंद पंचायत में वित्तीय घोटाला, जांच के दौरान हुआ हंगामा
बिना प्रोत्साहन कैसे सफल होगी वनमित्र योजना, हर पंचायत से होंगे 7 सदस्य