छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की किल्लत, सप्लाई रुकने से पेट्रोल पंपों पर लगे ताले

Aishwarya Dwivedi | May 14, 2026, 09:18 IST
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छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति घटने से कई पंप बंद हो गए हैं। रेलवे ने डीजल इंजन घटाए हैं, वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ईंधन बचत के लिए अपने काफिले से पाँच वाहन कम किए।

NEWS IN SHORT

  • राजधानी रायपुर के कई प्रमुख पेट्रोल पंप तेल खत्म होने से बंद।
  • एडवांस पेमेंट नियमों की सख्ती से टैंकरों की आपूर्ति में भारी देरी।
  • रायपुर रेल मंडल ने बचत हेतु बारह डीजल इंजन संचालन से हटाए।
  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने काफिले से पाँच वाहन कम किए।
  • महासमुंद और बस्तर के अधिकांश पंपों पर पेट्रोल-डीजल का संकट गहराया।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत देखी जा रही है। राजधानी रायपुर समेत बस्तर और महासमुंद जैसे क्षेत्रों में स्थिति गंभीर हो गई है, जहाँ कई पेट्रोल पंप खाली हो चुके हैं। इस संकट ने न केवल आम जनता को पैनिक मोड में डाल दिया है, बल्कि रेलवे और सरकारी तंत्र को भी अपने खर्चों में कटौती करने पर मजबूर कर दिया है।



पंपों पर नो स्टॉक के बोर्ड और बढ़ती भीड़

राजधानी के जीई रोड सहित कई प्रमुख इलाकों में पेट्रोल पंप अचानक बंद होने लगे हैं। आपूर्ति में कमी और मांग में अप्रत्याशित वृद्धि ने समस्या को और जटिल बना दिया है। पंप संचालकों के अनुसार, किल्लत की खबरों के बीच लोग पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) कर रहे हैं। जो लोग पहले केवल जरूरत भर का तेल लेते थे, वे अब गाड़ियों की टंकियां फुल करवा रहे हैं। इस संकट के पीछे आपूर्ति श्रृंखला में आए बदलाव को मुख्य कारण माना जा रहा है। पेट्रोलियम कंपनियों ने अब 'एडवांस पेमेंट' का नियम सख्ती से लागू कर दिया है; जब तक टैंकर की पूरी कीमत पहले जमा नहीं होती, तब तक डिपो से वाहन रवाना नहीं किए जा रहे हैं।



रेलवे और जिलों की स्थिति

ईंधन संकट का असर रायपुर रेल मंडल पर भी पड़ा है। मंडल ने डीजल की खपत कम करने के लिए अपने 40 में से 12 डीजल इंजनों को संचालन से बाहर कर दिया है। अब केवल 28 इंजन और पावर कार ही संचालित होंगे, जिससे सालाना लगभग 4 करोड़ रुपए की बचत का लक्ष्य रखा गया है।



अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक है:

महासमुंद : शहर के पांच में से चार पंप सूख चुके हैं।


जगदलपुर : 15 पेट्रोल पंपों पर शाम तक तेल उपलब्ध नहीं था।


बस्तर संभाग : दंतेवाड़ा और कांकेर में भी अधिकांश पंपों पर ताले लटक गए हैं।



मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने घटाया काफिला

ईंधन की कमी और ऊर्जा संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्य की 'साय सरकार' ने एक प्रतीकात्मक और प्रभावी पहल की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने कारकेड (काफिले) से 5 वाहन कम करने का निर्णय लिया है। इसी राह पर चलते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी अपने काफिले से 4 गाड़ियां हटा दी हैं।



मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी दौरों में केवल अनिवार्य वाहनों का ही उपयोग किया जाएगा। उन्होंने अन्य मंत्रियों और अधिकारियों से भी संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील की है। साथ ही, सरकार अब चरणबद्ध तरीके से सरकारी बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।



निष्कर्ष

पेट्रोल-डीजल की किल्लतफिलहाल स्थिति आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन की है। जहाँ एक तरफ जनता को धैर्य रखने और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदने की सलाह दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की यह पहल संदेश देती है कि संकट के समय में नेतृत्व को स्वयं बचत का उदाहरण पेश करना चाहिए। यदि आपूर्ति व्यवस्था जल्द दुरुस्त नहीं हुई, तो कृषि और परिवहन क्षेत्र पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।



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