प्रदेश में एक भी नहीं सरकारी फॉर्मेसी कॉलेज, निजी पर सरकार मेहरबान
छत्तीसगढ़ मे फार्मेसी कॉलेजों की तरफ सरकार का ध्यान नहीं है इसी कारण 26 साल बाद भी प्रदेश में एक भी शासकीय कॉलेज नहीं है। ऐसे में फॉर्मेसी पढ़ने की चाह रखने वाले युवाओ को भारी-भरकम फीस देकर निजी कॉलेज मे एडमिशन लेना होता है।
इस बार शासन ने दिलदारी दिखाते हुए निजी कॉलेजों में फीस का निर्धारण किया लेकिन वह भी न्यूनतम...छात्रो ंसे वसूली जारी रहे इसके लिए मॉनिटरिंग कमेटी तक नहीं बनाई गई। इधर अब भी कई कॉलेज हैं जहां फीस का निर्धारण नहीं किया जा सका है।
छात्रों के सामने मजबूरी
सरकारी कॉलेज नहीं होने का सीधा असर करीब 13 हजार छात्रों की जेब पर पड़ रहा है। फार्मेसी करने वाले युवाओं के पास निजी संस्थानों में दाखिला लेने के अलावा दूसरा बड़ा विकल्प नहीं है।
आरोप है कि कई संस्थान अलग-अलग नाम पर मोटी रकम वसूलते रहे हैं। कुछ जगह फीस एक से डेढ़ लाख रुपए तक पहुंचने की बात सामने आई है। ऐसे में कॉलेज तर्क दे रहे हैं कि सरकार ने न्यूनतम फीस तय की है अधिकतम नहीं।
फीस पर अब लगाम
इसी बीच प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने सत्र 2026-27 के लिए फार्मेसी कोर्स की अनंतिम न्यूनतम फीस तय की है। डी. फार्मेसी के लिए 35 हजार रुपए सालाना, बी. फार्मेसी के लिए 30 हजार रुपए प्रति सेमेस्टर और एम. फार्मेसी के लिए 52,200 रुपए प्रति सेमेस्टर की न्यूनतम फीस तय की गई है। यह फैसला भी प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद लिया गया है। इसी बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जानबूझकर फीस का निर्धारण करने मे देरी की गई।
न्यूनतम फीस का खेल
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। जब निजी कॉलेजों की फीस पर नियंत्रण की जरूरत थी, तब अधिकतम फीस तय करने के बजाय न्यूनतम फीस तय की गई। न्यूनतम रकम से नीचे तो कॉलेज नहीं जा सकते, लेकिन इससे ऊपर कितना लेंगे, इस पर तस्वीर साफ नहीं है। ऐसे में छात्रों को वास्तविक राहत कितनी मिलेगी, यह बड़ा सवाल है।
शपथ-पत्र भी देना होगा
तकनीकी शिक्षा विभाग ने निजी संस्थानों के लिए 50 रुपए के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर शपथ-पत्र देना जरूरी किया है। इसमें संस्थानों को कहना होगा कि अंतिम फीस तय होने तक वे छात्रों से अतिरिक्त या मनमानी रकम नहीं लेंगे। जिन कॉलेजों की नई फीस अभी तय नहीं हुई है, उन्हें पिछले साल वाली फीस लेने के निर्देश हैं।
18 निजी विवि पर सवाल
फार्मेसी समेत दूसरे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी निजी विश्वविद्यालयों की फीस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि 18 निजी विश्वविद्यालयों में फीस तय करने की प्रक्रिया एक समान नहीं है।
फीस विनियामक समिति के स्तर पर निर्धारण नहीं होने से छात्रों और अभिभावकों के सामने भ्रम की स्थिति बनी रहती है। सवाल यह है कि अगर फीस पर निगरानी जरूरी है तो व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है?
सरकार की प्राथमिकता पर सवाल
फार्मेसी सिर्फ एक डिग्री या डिप्लोमा नहीं है। फार्मासिस्ट दवाओं की गुणवत्ता, उनके इस्तेमाल और अस्पतालों में दवा वितरण से जुड़े अहम काम करते हैं। इसके बावजूद 26 साल में राज्य एक सरकारी फार्मेसी कॉलेज तक नहीं बना पाया। इससे साफ है कि इस क्षेत्र में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कितनी प्राथमिकता दी गई।
मांग उठी, व्यवस्था बदली
फीस को लेकर इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना से जुड़े फार्मासिस्ट राहुल वर्मा ने तकनीकी शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन देकर एक जैसी और पारदर्शी फीस व्यवस्था की मांग की थी। इसके बाद अब अंतरिम न्यूनतम फीस तय की गई है। लेकिन असली परीक्षा तब होगी, जब कॉलेज छात्रों से तय रकम से ज्यादा वसूलने की कोशिश करेंगे।
सरकारी कॉलेज कब बनेगा?
फिलहाल सरकार ने निजी कॉलेजों की फीस को लेकर अंतरिम व्यवस्था तो कर दी है, लेकिन मूल सवाल वहीं खड़ा है। प्रदेश में फार्मेसी की पढ़ाई के लिए एक भी स्वतंत्र सरकारी कॉलेज क्यों नहीं है?
जब 18 निजी कॉलेज इस क्षेत्र में सक्रिय हैं तो सरकारी संस्थान खोलने की पहल क्यों नहीं हुई? जब तक इसका जवाब नहीं मिलता, फार्मेसी शिक्षा का बोझ छात्रों की जेब पर ही पड़ता रहेगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में कुल कितने सरकारी फार्मेसी कॉलेज हैं?
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 26 साल बाद भी प्रदेश में एक भी शासकीय (सरकारी) फार्मेसी कॉलेज नहीं है। - निजी फार्मेसी कॉलेजों में सालाना फीस कितनी तय की गई है?
सत्र 2026-27 के लिए डी. फार्मेसी की न्यूनतम फीस ₹35,000 सालाना, बी. फार्मेसी की ₹30,000 प्रति सेमेस्टर और एम. फार्मेसी की ₹52,200 प्रति सेमेस्टर तय की गई है। - न्यूनतम फीस तय होने से छात्रों को क्या परेशानी हो रही है?
समिति ने केवल न्यूनतम फीस तय की है, अधिकतम सीमा स्पष्ट न होने के कारण निजी कॉलेज छात्रों से मनमानी और अधिक फीस वसूल रहे हैं।
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