इसरो सैटेलाइट और रडार से नक्सलियों का गुप्त खजाना खोजेगी पुलिस

Aishwarya Dwivedi | May 28, 2026, 15:51 IST
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छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबल इसरो सैटेलाइट, रडार और ड्रोन तकनीक की मदद से 'ऑपरेशन खजाना' चलाकर नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाए गए 200 करोड़ के हथियार और कैश निकाल रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने अब तक का सबसे अनोखा और हाईटेक अभियान शुरू किया है। बस्तर से नक्सलियों के पैर उखड़ने के बाद, अब जंगलों के भीतर जमीन में छिपाए गए उनके 'गुप्त खजाने' और घातक विस्फोटकों को खोदकर बाहर निकालने के लिए "ऑपरेशन खजाना" चलाया जा रहा है। इस महा-अभियान में देश की सबसे आधुनिक तकनीक यानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सैटेलाइट और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) की मदद ली जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का अनुमान है कि नक्सलियों ने जमीन के नीचे करीब 200 करोड़ रुपए से अधिक के हथियार, बारूद और कैश दबा रखे हैं।



थर्मल स्कैनिंग से हो रहा है प्रहार

घने जंगलों के कारण जो इलाके इंसानी आंखों से ओझल हैं, उन पर नजर रखने के लिए इसरो के अत्याधुनिक 'रिसैट-2बी' (RISAT-2B) सैटेलाइट का उपयोग किया जा रहा है। यह सैटेलाइट घने जंगलों के बीच भी संदिग्ध खुदाई, नई बनी पगडंडियों और जमीन के तापमान में आने वाले अंतर (थर्मल सिग्नेचर) के जरिए डंप लोकेशंस को ट्रेस कर रहा है।



इसके साथ ही, आसमान से ड्रोन के जरिए थर्मल स्कैनिंग की जा रही है, जबकि जमीन पर बम निरोधक दस्ता (BDS) डीप मेटल डिटेक्टर और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार लेकर जंगलों की खाक छान रहा है। पिछले तीन महीनों में ही बलों ने 8 करोड़ रूपए से अधिक के अत्याधुनिक हथियार और नकदी बरामद कर ली है।



क्या है नक्सलियों की 'थ्री-लेयर डंप पॉलिसी'?

पूछताछ और जांच में सामने आया है कि नक्सली अपनी लेवी (वसूली) का करीब 50 फीसदी हिस्सा कैश और असलहे के रूप में जमीन के नीचे गाड़ देते थे। इसके लिए वे 'थ्री-लेयर सिक्योरिटी' का इस्तेमाल करते थे:



1. सबसे ऊपरी परत: मिट्टी और बबूल के कांटे (ताकि कोई आसानी से वहां न जाए)।


2. मध्यम परत: खतरनाक आईईडी (IED) विस्फोटक (ताकि ढूंढने वाले की जान जा सके)।


3. सबसे निचली परत : वॉटरप्रूफ प्लास्टिक में पैक चमचमाते हथियार, कारतूस और करोड़ों का कैश।



इस गुप्त खजाने के कोड वर्ड सिर्फ शीर्ष नक्सली सरगनाओं के पास होते थे। हाल ही में सरेंडर करने वाले एक बड़े नक्सली लीडर के मोबाइल से पुलिस ने ऐसी ही 22 गुप्त लोकेशंस को डिकोड किया है, जिससे इस ऑपरेशन को बड़ी सफलता मिल रही है।



क्यों जरूरी है यह निर्णायक प्रहार?

भले ही बस्तर में नक्सल नेटवर्क अंतिम सांसें गिन रहा है, लेकिन जमीन में दबे हथियार और फंड अब भी बड़ा खतरा हैं। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि नक्सली इस छिपे हुए धन का इस्तेमाल नए स्थानीय युवाओं को लालच देकर संगठन में जोड़ने या भविष्य में किसी बड़ी हिंसक वारदात के लिए कर सकते हैं।



"जब तक बस्तर की मिट्टी से आखिरी डेटोनेटर और विस्फोटक नहीं निकाल लिया जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। सुरक्षा बल अब केवल नक्सलियों की मौजूदगी खत्म करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके पूरे आर्थिक और हथियार नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। जंगलों में गड़े हुए नक्सलवाद पर यह हमारा निर्णायक प्रहार है।" — सुंदरराज पी., आईजी, बस्तर रेंज



सुरक्षा बलों का यह ऑल-आउट ऑपरेशन साफ संकेत देता है कि अब बस्तर में नक्सलवाद को न सिर्फ जमीन के ऊपर, बल्कि जमीन के नीचे से भी हमेशा-हमेशा के लिए उखाड़ फेंका जाएगा।



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