छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था ध्वस्त : अफसरों ने बंद किए फोन, आधी रात को MD ने उठाए कॉल

Aishwarya Dwivedi | May 21, 2026, 16:52 IST
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छत्तीसगढ़ में 45 डिग्री गर्मी के बीच बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। निचले अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने पर नाराज जनता ने सीधे एमडी को कॉल किया और बिजली दफ्तरों का घेराव किया।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त।
  • 45 डिग्री पारे में घंटों कटौती से पानी का संकट।
  • निचले स्तर के बिजली अधिकारियों ने फोन उठाना बंद किया।
  • परेशान जनता ने सीधे एमडी भीमसिंह कंवर को लगाया कॉल।
  • दफ्तरों में कर्मचारी न मिलने पर लोगों ने किया हंगामा।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों में बिजली की आंख-मिचौली और घंटों की अघोषित कटौती ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि राजधानी रायपुर से लेकर न्यायधानी बिलासपुर तक बिजली व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। न आंधी है, न बारिश, फिर भी तपती गर्मी में घंटों बिजली गुल रहना अब आम हो चुका है। हद तो तब हो गई जब परेशान नागरिकों की शिकायत सुनने के लिए बिजली विभाग के मैदानी अधिकारियों ने फोन उठाना ही बंद कर दिया। थक-हारकर आक्रोशित जनता सीधे बिजली कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को फोन लगाने लगी, जिन्हें आधी रात को कॉल रिसीव कर व्यवस्था संभालनी पड़ रही है।



45 डिग्री पारे में हाहाकार

प्रदेश में गर्मी का पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। बिना पंखे-कूलर के रहना असंभव है, ऊपर से घंटों बिजली गुल होने के कारण कई इलाकों में पानी की किल्लत भी शुरू हो गई है। बिजली कंपनी के अधिकारी दलील दे रहे हैं कि गर्मी के कारण अचानक लोड बढ़ गया है। हालांकि, जनता इस तर्क को मानने को तैयार नहीं है, क्योंकि हर साल गर्मी में डिमांड बढ़ना तय होता है, तो इसके लिए पहले से मेंटेनेंस क्यों नहीं किया गया?



अफसर नदारद, आक्रोशित जनता ने बोला धावा

बिलासपुर के सबसे वीआईपी माने जाने वाले नेहरू नगर जोन के शुभम विहार, गौतम विहार और सिंधी कॉलोनी जैसे इलाकों में पूरी-पूरी रात बिजली गायब रह रही है।



खाली मिले दफ्तर: रात में जब परेशान लोग नेहरू नगर बिजली दफ्तर पहुंचे, तो वहां फ्यूज कॉल सेंटर पर एक भी कर्मचारी मौजूद नहीं था।




महिलाओं का प्रदर्शन: गौतम विहार की नाराज महिलाओं ने पूरी रात बिजली न रहने पर जोन ऑफिस का घेराव कर दिया।




कर्मचारियों से मारपीट: कई जगहों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि जनता और बिजली कर्मचारियों के बीच झड़प हुई। पिछले सप्ताह कुछ इलाकों में कर्मचारियों की पिटाई तक की खबरें आईं।



जब MD भीमसिंह कंवर को संभालनी पड़ी कमान

नेहरू नगर डिवीजन में जूनियर इंजीनियर (JE) से लेकर सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (SE) तक किसी भी अधिकारी ने जब नागरिकों के फोन नहीं उठाए, तब उपभोक्ताओं ने सीधे बिजली कंपनी के एमडी भीमसिंह कंवर को फोन मिला दिया। राहत की बात यह रही कि एमडी ने आधी रात को न सिर्फ कॉल रिसीव किया, बल्कि जनता की समस्या सुनकर तुरंत केबल बदलवाने और सप्लाई बहाल करने के निर्देश दिए।



बड़ा सवाल: जब संकट के समय निचले स्तर के अधिकारी और मैदानी अमला फोन बंद कर गायब हो जाता है, तो क्या हर छोटे फाल्ट को सुधारने के लिए सीधे एमडी को ही हस्तक्षेप करना पड़ेगा? यह लापरवाही कभी भी किसी बड़ी अप्रिय घटना को जन्म दे सकती है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में बिजली संकट और अधिकारियों की लापरवाही से जनता का आक्रोश चरम पर है। जब जमीनी स्तर का अमला जिम्मेदारी से मुंह मोड़ ले, तो पूरी व्यवस्था वेंटिलेटर पर आ जाती है। एमडी द्वारा फोन उठाना सराहनीय है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है; बिजली कंपनी को तुरंत जमीनी जवाबदेही तय करनी होगी।



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