छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी, बिल अनुमानित ! जनता से एडवांस वसूली का नया खेल

VINAY VERMA | Jun 18, 2026, 12:05 IST
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छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) के नए तरीके से बवाल मचा हुआ है। जिसके तहत बिना रीडिंग लोगों को अनुमानित बिल भेजा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि ऐसे में 24 प्रतिशत अतिरिक्त पैसा जमा करना पड़ रहा है।

समझें क्या है पूरा मामला

बिना मीटर रीडिंग के भेजे जा रहे बिजली बिल


20-24% तक अतिरिक्त भुगतान का खतरा


1 जुलाई से बिजली दरों में औसतन 6.23% बढ़ोतरी


56 लाख उपभोक्ताओं से करोड़ों की अतिरिक्त वसूली


5600 मीटर रीडर्स की नौकरी पर संकट गहराया



छत्तीसगढ़ में बिजली विभाग ने अपनी कमाई के लिए उपभोक्ताओं पर डबल अटैक किया है। न केवल बिजली का ट्रेरिफ बढ़ाया गया है बल्कि ऑटो जनरेट बिल भी भेज रहा है। यानी उपभोक्ताओं को बिना वास्तविक मीटर रीडिंग के बिजली बिल जमा करना होगा। इसीलिए इस बार लोग बढ़े हुूए बिजली बिल की शिकायत कर रहे हैं। तर्क दिया जा रहा है कि मीटर रीडिंग होने के बाद उपभोक्ताओं से वास्तविक बिल ही लिया जाएगा।



अनुमानित बिल में 24% तक ज्यादा रकम

उपभोक्ताओं का कहना है कि कई मामलों में अनुमानित बिल वास्तविक खपत से 20 से 24 प्रतिशत तक ज्यादा है। ऐसे में लोगों को मजबूरी में अतिरिक्त पैसा जमा करना होगा। विभाग कह रहा है कि फिलहाल ट्रायल बेस पर कुछ जगहो में ऐसा किया जा रहा है। अतिरिक्त बिल आएगा तो बाद में समायोजन कर दिया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जनता हर महीने अतिरिक्त रकम क्यों जमा करे?



विभाग का तर्क, अगले बिल में एडजस्टमेंट

बिजली कंपनी का दावा है कि वास्तविक मीटर रीडिंग मिलने के बाद अतिरिक्त राशि अगले बिल में समाहित हो जाएगी। यानी पैसा अभी जमा कराइए और हिसाब बाद में कीजिए। लेकिन उपभोक्ता पूछ रहे हैं कि क्या बिजली कंपनी को जनता के पैसों पर बिना ब्याज के काम चलाने का अधिकार मिल गया है?



56 लाख उपभोक्ता, करोड़ों का फ्लोट

प्रदेश में करीब 56 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। यदि प्रत्येक उपभोक्ता से औसतन कुछ सौ रुपए भी अतिरिक्त जमा होते हैं तो हर महीने करोड़ों रुपए कंपनी के पास पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि इस व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। क्या यह नकदी बढ़ाने का नया मॉडल है?



बिजली महंगी करने का फैसला भी साथ-साथ

इधर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दे दी है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। कृषि और व्यावसायिक श्रेणियों पर भी अतिरिक्त बोझ डाला गया है।



छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी, बिल अनुमानित


कंपनी ने मांगे थे 6300 करोड़

जानकारी के अनुसार बिजली कंपनियों ने लगभग 24 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। इससे करीब 6300 करोड़ रुपए अतिरिक्त राजस्व मिलता। आयोग ने पूरी मांग नहीं मानी। फिर भी 1662 करोड़ रुपए की अतिरिक्त वसूली का रास्ता साफ कर दिया। औसतन 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी मंजूर की गई।



हाफ बिजली वालों को भी लगेगा झटका

सरकार 400 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक हाफ बिजली योजना का लाभ देती है। लेकिन टैरिफ बढ़ने का असर इन उपभोक्ताओं पर भी दिखाई देगा। राहत का प्रचार अलग है, जबकि बढ़े हुए शुल्क का असर बिल में अलग दिखाई देगा। इससे मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ना तय है।



मीटर रीडर्स बोले, नौकरी खत्म करने की तैयारी

प्रदेश के करीब 5600 मीटर रीडर्स इस फैसले से परेशान हैं। उनका आरोप है कि ऑटो जनरेटेड बिलिंग व्यवस्था उनकी जरूरत खत्म करने की तैयारी है। विभाग कह रहा है कि मीटर रीडिंग भी जारी रहेगी। लेकिन कर्मचारी इसे ट्रायल फेज बता रहे हैं।



अगर रीडिंग होगी तो ऑटो बिल क्यों?

मीटर रीडर्स का सबसे बड़ा सवाल यही है। यदि कर्मचारी घर-घर जाकर रीडिंग लेंगे तो फिर ऑटो जनरेटेड बिल की जरूरत क्या है? और यदि ऑटो बिल ही भविष्य है तो फिर रीडर्स की भूमिका क्या बचेगी? कर्मचारियों को आशंका है कि यह चरणबद्ध तरीके से रोजगार समाप्त करने की रणनीति है।



जनता की जेब पर डबल अटैक?

छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी। दूसरी तरफ अनुमानित बिल की व्यवस्था। दोनों फैसले एक साथ लागू होते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या उपभोक्ताओं की जेब से दोहरे तरीके से पैसा निकालने की तैयारी है? पहले महंगी बिजली का झटका और फिर अनुमानित बिल के नाम पर एडवांस वसूली। आखिर इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी कौन है?



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में औसतन कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा बिजली दरों में औसतन 6.23% की वृद्धि को मंजूरी दी गई है।
  2. नई बिजली दरें छत्तीसगढ़ में किस तारीख से लागू होंगी?
    उत्तर: नई दरें 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी।
  3. 'हाफ बिजली योजना' क्या है और इसका लाभ किसे मिलता है?
    उत्तर: इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार उपभोक्ताओं को 400 यूनिट तक की खपत करने पर 200 यूनिट तक बिजली बिल हाफ (आधा) करने का लाभ देती है। (टैरिफ बढ़ने से अब इन उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा)।

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