निजी स्कूलों की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव से मांगा जवाब...

Umeshwari Baghel | Mar 30, 2026, 19:02 IST
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छत्तीसगढ़ में कुछ स्कूलों ने CBSE के नाम पर एडमिशन देकर बच्चों को अचानक CG बोर्ड परीक्षा देने को कहा। अभिभावकों की शिकायत पर हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए शिक्षा सचिव से जवाब मांगा है।

NEWS IN SHORT

  • CBSE के नाम पर एडमिशन, अब CG बोर्ड परीक्षा देने को कहा
  • स्कूलों के फैसले से अभिभावक परेशान हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
  • पहले CBSE पढ़ाई अब अचानक CG बोर्ड का दबाव
  • बच्चों को बिना तैयारी के बोर्ड परीक्षा में बैठाने का मामला कोर्ट पहुंचा
  • स्कूलों की इस गड़बड़ी पर हाईकोर्ट सख्त शिक्षा सचिव से जवाब

NEWS IN DETAIL

Bilaspur। छत्तीसगढ़ में स्कूलों की मनमानी को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है, जिस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कुछ निजी स्कूलों द्वारा पहले सीबीएसई के नाम पर बच्चों का एडमिशन लेने और बाद में अचानक सीजी बोर्ड की परीक्षा देने का दबाव बनाने की शिकायत कोर्ट तक पहुंची है। इस मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव से जवाब मांगा है।



अभिभावकों में नाराजगी

मामला सामने आने के बाद अभिभावकों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि स्कूलों ने शुरुआत में सीबीएसई पैटर्न की पढ़ाई का भरोसा देकर बच्चों का दाखिला लिया। पूरे साल उसी हिसाब से पढ़ाई और परीक्षा भी करवाई गई, लेकिन अब अचानक सीजी बोर्ड की परीक्षा देने के लिए कहा जा रहा है। इससे बच्चों और माता-पिता दोनों पर दबाव बन गया है।



एक दिन पहले दी गई सूचना

अभिभावकों का आरोप है कि बोर्ड परीक्षा की जानकारी उन्हें बहुत देर से दी गई। कई मामलों में तो बच्चों को परीक्षा से सिर्फ एक दिन पहले ही बताया गया। ऐसे में न तो बच्चों को तैयारी का समय मिला और न ही वे मानसिक रूप से तैयार हो पाए। इसी वजह से कई अभिभावकों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध भी जताया।



CBSE मान्यता पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में एक और बड़ा मुद्दा सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक कक्षा 8 तक सीबीएसई की आधिकारिक मान्यता नहीं होती। इसके बावजूद कुछ स्कूल इस नाम पर फीस वसूल रहे हैं। खासकर एक निजी स्कूल पर आरोप है कि उसने बिना वैध दस्तावेज के सीबीएसई पैटर्न का दावा किया और अभिभावकों से ज्यादा फीस ली।



कोर्ट ने मांगा स्पष्ट जवाब

हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को शिक्षा के अधिकार से जोड़ते हुए गंभीर माना है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस पर विस्तृत शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करें। साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि ऐसे मामलों में जिम्मेदारी किसकी है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।



8 अप्रैल को अगली सुनवाई

अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। माना जा रहा है कि कोर्ट इस मुद्दे पर सख्त फैसला ले सकता है, जिससे भविष्य में स्कूलों की मनमानी पर रोक लग सके।



निष्कर्ष

कुल मिलाकर यह मामला न सिर्फ अभिभावकों की चिंता बढ़ाने वाला है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। अब सबकी नजर कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी है।



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