छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियमित भर्ती वालों को मिलेगा स्थायी हक
Rajesh Lahoti | Feb 18, 2026, 23:07 IST
chhattisgarh high court
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने नियमित चयन से नियुक्त कर्मचारियों को स्थायी हक देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि "कॉन्ट्रैक्चुअल" शब्द से कर्मचारियों के अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।
News in Short
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्चुअल बताने पर निर्णय दिया।
- नियमित चयन प्रक्रिया से आए कर्मचारियों को संविदा पर रखने की प्रथा पर प्रहार किया।
- सरगुजा जिले के डेटा एंट्री ऑपरेटर्स को नियमित मानने का आदेश दिया।
- अदालत ने कहा कि लेबल से कर्मचारी के अधिकार नहीं बदल सकते।
- इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों को स्थायी दर्जा मिलने का रास्ता खुलेगा।
News in Detail
अदालत ने माना कि भर्ती की प्रकृति और पद की स्थिति ही असली कसौटी है, न कि नियुक्ति आदेश का लेबल। यानी अगर चयन पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से हुआ है, पद नियमित है और कर्मचारी वर्षों से काम कर रहा है, तो सरकार या विभाग उसे संविदा बताकर उसके वैधानिक अधिकार नहीं रोक सकते।
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क्या था मामला?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिकॉर्ड खंगाले और पाया कि चयन प्रक्रिया नियमित थी, पद स्वीकृत थे और सेवा निरंतर थी। ऐसे में केवल नियुक्ति पत्र में contractual शब्द लिख देने से कर्मचारी के अधिकार खत्म नहीं हो जाते।
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अदालत की कड़ी टिप्पणी
इस फैसले को सरकारी तंत्र में फैली उस प्रवृत्ति पर करारा झटका माना जा रहा है, जिसमें नियमित प्रकृति के काम को संविदा के नाम पर करवाया जाता है, ताकि दीर्घकालिक लाभ और सुरक्षा से बचा जा सके।
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क्या बदलेगा अब?
इस आदेश के बाद:
- नियमित चयन से आए कर्मचारियों को स्थायी दर्जा देने का रास्ता खुलेगा।
- विभागों पर दबाव बढ़ेगा कि वे सेवा लाभ और वेतनमान पर पुनर्विचार करें।
- समान परिस्थितियों में काम कर रहे अन्य कर्मचारी भी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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व्यापक असर
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