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Photograph: (the sootr)
News In Short
- जल जीवन मिशन घोटले में एक और आरोपी छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार।
- एसीबी अब तक घोटाले में 10 आरोपियों को कर चुकी है​ गिरफ्तार।
- पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल अभी भी एसीबी की गिरफ्त से बाहर।
- एसीबी कोर्ट ने सभी आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर सौंपा
- एसीबी ने राजस्थान, दिल्ली, बिहार व झाड़खंड में मारे थे छापे।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े 900 करोड़ रुपए के घोटाले में एक और आरोपी गिरफ्तार हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने छत्तीसगढ़ से मुकेश पाठक को पकड़ा है। इसके साथ ही एसीबी ने दो दिन में अब तक 10 आरोपी को अपनी गिरफ्त में लिया है। एसीबी ने मंगलवार को राजस्थान, दिल्ली, बिहार और झारखंड में 15 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की थी। इसमें नौ अधिकारी गिरफ्तार किए गए थे। इस घोटाले में अभी रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल की तलाश की जा रही है।
अहम है मुकेश पाठक की भूमिका
इस घोटाले में मुकेश पाठक की अहम भूमिका बताई जा रही है। उसने टेंडर लेने दिए गए फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र तैयार किया था। पाठक ने श्री श्याम, गणपति ट्यूबवेल फर्म के लिए इरकॉन के नाम का यह फर्जी प्रमाण पत्र बनाया था।
एसीबी कोर्ट ने दिया तीन दिन का रिमांड
एसीबी ने मुकेश पाठक समेत सभी 10 आरोपियों को बुधवार को एसीबी मामलो की स्पेशल कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी आरोपियों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर एसीबी को सौंप दिया है। एसीबी रिमांड के दौरान आरोपियों से पूछताछ कर घोटाले के बारे में विस्तृत सबूत जुटाएगी।
ये हो चुके हैं गिरफ्तार
एसीबी ने मंगलवार को जल जीवन मिशन घोटाले में दिनेश गोयल, चीफ इंजीनियर (प्रशासन), केडी गुप्ता,चीफ इंजीनियर (ग्रामीण), शुभांशु दीक्षित, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर द्वितीय, सुशील शर्मा, वित्तीय सलाहकार (नवीकरणीय ऊर्जा), नीरिल कुमार, मुख्य अभियंता (चूरू), विशाल सक्सेना,निलंबित XEN, रिटायर्ड अतिरिक्त मुख्य अभियंता अरुण श्रीवास्तव, रिटायर्ड मुख्य अभियंता और तकनीकी सदस्य डी. के. गौड़ तथा रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता महेंद्र प्रकाश सोनी को गिरफ्तार किया है।
है क्या जल जीवन मिशन घोटाला
आरोप है कि जल जीवन मिशन के टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी कर ठेकेदारों को करोड़ों के काम दिए गए। इसके लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर ठेके हासिल किए गए। राजस्थान में कई जगह घटिया पाइप लगाए व काम अधूरा रहने के बावजूद भुगतान कर दिया गया।
जांच में पता चला कि श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के मालिक महेश मित्तल और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी के मालिक पदमचंद जैन ने कथित तौर पर आईआरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा जारी फर्जी कार्यपूर्णता प्रमाणपत्रों के आधार पर लगभग 960 करोड़ रुपये की काम हासिल किए थे।
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