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Photograph: (the sootr)
News In Short
- पूर्व मंत्री गोलमा देवी ने सोशल मीडिया पर जारी की भावुक अपील।
- यह अपील एक लोकगायक के विवादास्पद गीत के बाद आई है।
- गीत में गोलमा पर उनके नि:संतान होने पर व्यक्तिगत टिप्पणी जोड़ी।
- इस विवादास्पद गीत के बाद गायक का हो गया था सामाजिक बहिष्कार।
- गोलमा ने कहा, मैंने गायक को किया माफ, बहिष्कार वापस लिया जाए।
News In Detail
​राजस्थान की राजनीति में सादगी और बेबाकी के लिए पहचानी जाने वाली पूर्व मंत्री गोलमा देवी फिर चर्चा में है। इस बार यह चर्चा उन पर हुए व्यक्तिगत टिप्पणियों और उसके बाद सोशल मीडिया पर आई उनकी भावुक पोस्ट को लेकर है।
दरअसल, गोलमा ने इस पोस्ट के माध्यम से 'निःसंतान' होने की अपनी पीड़ा और समाज के तल्ख रवैये पर पहली बार अपना मौन तोड़ा है। उन्होंने रामायण की चौपाई का सहारा लेते हुए अपने विरोधियों को जो जवाब दिया है, वह न केवल दिल को छू लेने वाला है, बल्कि समाज के लिए बड़ा सबक भी है।
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नियति को सहर्ष स्वीकार किया
कैबिनेट मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की पत्नी ​गोलमा देवी ने अपनी पोस्ट की शुरुआत आध्यात्मिक गहराई के साथ की। उन्होंने लिखा कि जीवन में संतान का सुख मिलना या न मिलना मनुष्य के वश में नहीं है। उन्होंने तुलसीदास जी की पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा, हानि-लाभ, जीवन-मरण, जस-अपजस विधि हाथ।
76 वर्षीय गोलमा ने कहा कि यदि ईश्वर की यही इच्छा थी कि उनकी कोख सूनी रहे, तो उन्होंने इसे 'हरि इच्छा' मानकर स्वीकार कर लिया। मुझे व्यक्तिगत रूप से इस बात का कोई दुख नहीं है, क्योंकि मैंने पूरे राजस्थान के बेटे-बेटियों को अपनी ही संतान माना है।
​मेल में लोकगायक का कटाक्ष
​गोलमा की यह पोस्ट हाल ही में हुए नईनाथ मेले के बाद आई है, जिसमें एक लोक गायक ने अपने गीत में उनके निःसंतान होने पर व्यक्तिगत कटाक्ष किया था। हालांकि, बाद में मीणा समाज ने उस लोकगायक का सामाजिक बहिष्कार भी कर दिया।
गोलमा ने लिखा, इस घटना से समाज में आक्रोश है। सभी ने अपना विरोध दर्ज कराया है। मैं इसके लिए सभी की आभारी हूं। यह भी पता चला है कि लोकगायक ने अपने कृत्य के लिए क्षमा याचना की है।
​विवाद को विराम और क्षमादान की अपील
गोलमा ने अपनी पोस्ट में पंच-पटेलों से आग्रह किया कि गायक का सामाजिक बहिष्कार वापस लिया जाए। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि इस प्रसंग को अब यहीं विराम दें, क्योंकि व्यक्ति की जैसी समझ होती है, वह वैसी ही बात करता है। मैं उस गायक को ह्रदय से क्षमा करती हूं। सभी बेटे-बेटियों से भी आग्रह है कि अब इस विषय को आगे न बढ़ाया जाए।
नि:संतान महिला को देखते हैं हेय दृष्टि से
गोलमा ने अपनी पोस्ट में इस 'टीस' का जिक्र करते हुए लिखा, समाज की विडंबना है कि निःसंतान महिला को आज भी हेय दृष्टि से देखा जाता है। जब नरेश मीणा जैसे लोग, जिन्हें मैंने पुत्र समान माना, या कोई कलाकार मेरे इस अभाव पर व्यंग्य करता है, तो मन में एक टीस उठती है। उस क्षण मनुष्य अपने भाग्य को कोसने पर मजबूर हो जाता है।
​अक्षर ज्ञान नहीं, पर जनता में सक्रिय
अशोक गहलोत के दूसरे मुख्यमंत्रित्व काल में मंत्री रही गोलमा देवी पूर्णतः निरक्षर हैं। उन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा, लेकिन उनके संघर्ष की कहानी किसी मिसाल से कम नहीं है। वे अलवर जिले में राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ सीट से दो बार विधायक चुनीं गईं। उन्हें गहलोत सरकार के 2008 से 2013 के कार्यकाल में राज्य मंत्री बनने का मौका मिला।
गोलमा ने लिखा, लाखों संतानों की मां हूं
गोलमा देवी ने लिखा कि ईश्वर ने उन्हें जैविक संतान भले न दी हो, लेकिन उनका सौभाग्य उससे कहीं बड़ा है। आज राजस्थान के हजारों-लाखों युवा उन्हें मां कहकर पुकारते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, जब तक आप सभी का प्रेम मेरे साथ है,
मुझे अपने निःसंतान होने पर कभी दुख नहीं हो सकता।
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