छत्तीसगढ़ शहरी संपत्ति नियम 2026 : ई-टेंडरिंग अनिवार्य, पुरानी व्यवस्था खत्म

Umeshwari Baghel | Jun 16, 2026, 22:41 IST
छत्तीसगढ़ में अब अचल संपत्ति नियम 2026 लागू
छत्तीसगढ़ सरकार ने अचल संपत्ति व्ययन नियम 2026 लागू किए हैं। अब शहरी निकायों की जमीन, दुकान और भवन की बिक्री व लीज प्रक्रिया पूरी तरह ई-टेंडर से होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। PPP मॉडल और फ्रीहोल्ड सुविधा से शहरी विकास तेज होगा।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ में शहरी संपत्ति प्रबंधन में बड़ा बदलाव, 2026 के नए नियम लागू
  • ई-टेंडरिंग अनिवार्य होने से शहरी निकायों में बढ़ी पारदर्शिता
  • अचल संपत्ति व्ययन नियम से लीज और बिक्री प्रक्रिया होगी डिजिटल
  • फ्रीहोल्ड और PPP मॉडल से शहरी विकास को मिलेगी नई गति
  • पुराने नियम खत्म, पूरे राज्य में एक समान व्यवस्था लागू

NEWS IN DETAIL

Raipur। छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी संपत्तियों के प्रबंधन को पूरी तरह आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका नियम, 2026 को पूरे राज्य में लागू कर दिया है। यह नियम राज्य के सभी नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों पर समान रूप से लागू होंगे। इस बदलाव के बाद शहरी संपत्तियों के आवंटन, लीज और बिक्री की पूरी प्रक्रिया में सुधार देखने को मिलेगा।



शहरी संपत्तियों के प्रबंधन में एक समान व्यवस्था लागू

सरकार का मानना है कि पहले शहरी निकायों में संपत्तियों के उपयोग और प्रबंधन को लेकर अलग-अलग तरीके अपनाए जाते थे, जिससे कई बार असमानता और विवाद की स्थिति बनती थी। नए नियमों के लागू होने के बाद अब पूरे राज्य में एक जैसी व्यवस्था लागू होगी। सभी निकायों को संपत्ति से जुड़े हर निर्णय में तय नियमों और डिजिटल प्रक्रिया का पालन करना होगा। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।



ई-टेंडरिंग प्रणाली से खत्म होगी मनमानी

नए नियमों का सबसे बड़ा बदलाव ई-टेंडरिंग प्रणाली को अनिवार्य करना है। अब किसी भी शहरी निकाय की अचल संपत्ति जैसे भूमि, दुकान या भवन का विक्रय, लीज या हस्तांतरण मुख्य रूप से ऑनलाइन ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसी भी तरह की मनमानी या पक्षपात की संभावना कम होगी। डिजिटल प्रणाली लागू होने से हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।



जनहित मामलों में विशेष छूट का प्रावधान

नए नियमों में यह भी प्रावधान रखा गया है कि यदि किसी सरकारी संस्था या सार्वजनिक हित से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए भूमि या संपत्ति की आवश्यकता हो, तो राज्य सरकार की अनुमति से बिना ई-टेंडर के भी आवंटन किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह है कि अस्पताल, स्कूल, सामुदायिक भवन या अन्य जरूरी सार्वजनिक सेवाओं के लिए प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ सकें।



संपत्ति मूल्य निर्धारण को बनाया गया वैज्ञानिक

अब शहरी संपत्तियों का मूल्य निर्धारण अधिक पारदर्शी और तकनीकी आधार पर किया जाएगा। किसी भी संपत्ति का रिजर्व प्राइस तय करने के लिए दो मुख्य आधार होंगे, जिनमें कलेक्टर द्वारा निर्धारित गाइडलाइन मूल्य और निर्माण तथा विकास की वास्तविक लागत शामिल होगी। इन दोनों को जोड़कर अंतिम मूल्य तय किया जाएगा, जिससे संपत्तियों का सही मूल्य सुनिश्चित होगा और राजस्व नुकसान की संभावना कम हो जाएगी।



लीज और किराया व्यवस्था में सुधार

नए नियमों के तहत शहरी संपत्तियों को सामान्य रूप से 30 वर्षों की लीज पर दिया जाएगा। इसके साथ ही न्यूनतम लीज रेंट 0.5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। किराया व्यवस्था को भी अधिक लचीला और समयानुसार संशोधित करने योग्य बनाया गया है। इससे नगर निकायों को नियमित और स्थिर आय प्राप्त होगी और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।



फ्रीहोल्ड अधिकार का विकल्प मिलेगा नागरिकों को

नए नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि लीज पर दी गई संपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क के माध्यम से फ्रीहोल्ड में बदला जा सकेगा। इससे नागरिकों को संपत्ति पर पूर्ण स्वामित्व का अधिकार मिलेगा। साथ ही नगर निकायों को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।



PPP मॉडल से बढ़ेगा शहरी विकास

सरकार ने शहरी विकास को गति देने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को भी बढ़ावा दिया है। इसके तहत पार्क, बस स्टैंड, ऑडिटोरियम और सामुदायिक भवन जैसी संपत्तियों का संचालन निजी भागीदारी से किया जा सकेगा। हालांकि इन संपत्तियों का स्वामित्व पूरी तरह नगर निकायों के पास रहेगा और निजी कंपनियां केवल संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएंगी।



ई-लॉटरी और आरक्षण से बढ़ेगी पारदर्शिता

संपत्ति आवंटन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ई-लॉटरी प्रणाली लागू की गई है। इसके माध्यम से आवंटन पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से किया जाएगा। इसके अलावा समाज के विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है, जिससे सभी वर्गों को समान अवसर मिल सके।



नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान

यदि कोई लीज धारक तय शर्तों का उल्लंघन करता है, तो नगर निकायों को लीज निरस्त करने और संपत्ति वापस लेने का अधिकार दिया गया है। इससे अवैध कब्जों और अनुबंध उल्लंघन पर सख्त नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा और व्यवस्था में अनुशासन बना रहेगा।



पुराने नियम समाप्त, नई व्यवस्था लागू

इन नए नियमों के लागू होने के साथ ही वर्ष 1994 और 1996 के पुराने नियम पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं। अब पूरे राज्य में केवल एक समान और अपडेटेड नियम प्रणाली लागू होगी, जिससे प्रशासनिक असमानता खत्म हो जाएगी।



नए नियमों का संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से नगर निकायों की आय में वृद्धि होगी, संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। इसके अलावा शहरी संपत्तियों का बेहतर उपयोग होगा और नागरिकों को अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक सुविधाएं प्राप्त होंगी।



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