विवि परीक्षा समय-सारिणी में बड़ा फेरबदल, सैकड़ों छात्रों का पेपर छूटा

Aishwarya Dwivedi | Jul 14, 2026, 14:28 IST
PRSU परीक्षा समय-सारणी में बदलाव: छात्र अनुपस्थित
रविवि द्वारा परीक्षा समय-सारणी में बार-बार बदलाव करने से छात्रों को सटीक सूचना नहीं मिल सकी। इस लापरवाही के कारण 10 जुलाई की परीक्षा में रिकॉर्ड 10% छात्र अनुपस्थित रहे।

समझें क्या है पूरा मामला

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने परीक्षा की समय-सारणी में बार-बार बदलाव किया। इस कारण बहुत से छात्रों को परीक्षा की सही तारीख का पता नहीं चला। करीब 10 प्रतिशत छात्र 10 जुलाई को हुई परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। इन सभी छात्रों को अब अनिवार्य रूप से पूरक परीक्षा देनी होगी। विश्वविद्यालय के इस फैसले से छात्रों और प्राध्यापकों में भारी आक्रोश है।



परीक्षा बदलाव से छात्र हुए परेशान

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (PRSU - Pandit Ravishankar Shukla University) की लापरवाही का बड़ा खामियाजा छात्रों को उठाना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हाल ही में परीक्षाओं की समय-सारणी में कई बदलाव किए। इन बदलावों की सटीक और सही जानकारी समय पर छात्रों तक नहीं पहुंच सकी। इसका सीधा असर परीक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति पर पड़ा है। 10 जुलाई को हुई परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्र अनुपस्थित दर्ज किए गए।



बीसीए परीक्षा में बड़ी लापरवाही

सबसे गंभीर मामला बीसीए (BCA - Bachelor of Computer Applications) द्वितीय वर्ष की परीक्षा में सामने आया। इसके अंतर्गत जेनेरिक इलेक्टिव विषय की परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा पहले जून महीने में होनी तय की गई थी। बाद में विश्वविद्यालय ने इस परीक्षा की तारीख बदलकर 10 जुलाई कर दी। तारीख में हुए इस बड़े बदलाव की जानकारी कई छात्रों को नहीं मिल पाई।



विशेषकर निजी तौर पर पढ़ाई कर रहे छात्र इस सूचना से वंचित रह गए। जानकारी के अभाव में सैकड़ों छात्र तय तारीख पर परीक्षा देने नहीं पहुंच पाए। अलग-अलग कॉलेजों में अनुपस्थित छात्रों का आंकड़ा 5 से 10 प्रतिशत तक रहा। यह किसी भी सामान्य परीक्षा के लिए एक बहुत बड़ा आंकड़ा है। परीक्षा से वंचित इन सभी छात्रों को अब पूरक परीक्षा देनी होगी।



विवि परीक्षा समय-सारिणी में बड़ा फेरबदल


थोक में बदली गई समय-सारणी

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार विभिन्न संकायों की समय-सारणी में थोक में बदलाव किए। जब विवि पहली बार समय-सारणी जारी करता है, छात्र उसे ही अंतिम मान लेते हैं। वे उसी के अनुसार अपनी तैयारी का शेड्यूल तय करते हैं। बार-बार होने वाले बदलावों का अपडेट न मिलने से छात्र भ्रमित हो जाते हैं।



सबसे ज्यादा बदलाव जेनेरिक इलेक्टिव विषयों की परीक्षा में देखे गए हैं। जेनेरिक इलेक्टिव वे विषय होते हैं, जिन्हें छात्र अपने मुख्य संकाय से बाहर जाकर चुनते हैं। अलग संकाय होने के कारण इन विषयों की सूचनाएं छात्रों तक आसानी से नहीं पहुंच पाती हैं।



सेमेस्टर परीक्षाएं हुईं समाप्त

विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं आखिरकार 10 जुलाई को समाप्त हो गई हैं। यह परीक्षा सत्र लगभग दो महीने तक लंबा खिंचा। परीक्षाओं के बीच विषयों का तालमेल सही तरीके से नहीं बिठाया गया था। इस लंबी खिंची प्रक्रिया के कारण कॉलेज के प्राध्यापकों में भी काफी नाराजगी देखी गई।



परीक्षाएं देर से खत्म होने के कारण अब छात्रों को दो सेमेस्टर के बीच छुट्टी नहीं मिलेगी। सेमेस्टर समाप्त होते ही अगले सेमेस्टर की नियमित कक्षाएं तुरंत शुरू कर दी गई हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP - National Education Policy) लागू होने के बाद अब स्नातक स्तर पर भी सेमेस्टर प्रणाली लागू हो चुकी है।



कॉलेज प्रबंधन पर बढ़ा कार्यभार

साल में दो बार परीक्षाएं होने के कारण कॉलेजों का काम बहुत बढ़ गया है। उचित तालमेल न होने से कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों को काफी परेशानी हो रही है। समय-सारणी बनाने की प्रक्रिया में सुधार की मांग उठने लगी है। जानकारों का मानना है कि इस कार्य में विषय विशेषज्ञों की मदद ली जानी चाहिए।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना और प्रमुख विश्वविद्यालय कौन सा है?
    A1. छत्तीसगढ़ का सबसे पुराना विश्वविद्यालय पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना वर्ष 1964 में रायपुर में हुई थी।
  2. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत उच्च शिक्षा में क्या मुख्य बदलाव किए गए हैं?
    A2. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर वार्षिक परीक्षा के स्थान पर सेमेस्टर प्रणाली और चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू किया गया है।
  3. उच्च शिक्षा में जेनेरिक इलेक्टिव (GE) विषय किसे कहा जाता है?
    A3. जेनेरिक इलेक्टिव (Generic Elective) वे विषय होते हैं, जिन्हें छात्र अपने मुख्य संकाय (Faculty) से अलग, अपनी रुचि के अनुसार किसी दूसरे संकाय से चुनकर पढ़ाई करते हैं।

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