निजी जमीन पर बना दी सड़क, न अधिग्रहण हुआ न मुआवजा मिला, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
समझें क्या है पूरा मामला
- निजी जमीन सड़क में शामिल होने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
- बिना अधिग्रहण सड़क बनाने का जमीन मालिक ने उठाया मुद्दा
- सीमांकन रिपोर्ट में सड़क में मिली निजी जमीन
- मुआवजे या जमीन के बदले जमीन की मांग
- प्रशासन को 45 दिन में फैसला लेने का आदेश
Bilaspur। रायगढ़ में एक निजी जमीन को बिना अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए सड़क में शामिल करने का मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच गया। जमीन मालिक का आरोप है कि प्रशासन ने उसकी जमीन का इस्तेमाल सड़क बनाने में कर लिया, लेकिन न तो जमीन का अधिग्रहण किया गया और न ही कोई मुआवजा दिया गया। मामले में हाईकोर्ट ने प्रशासन को 45 दिन के भीतर आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
सीमांकन रिपोर्ट में सामने आई जमीन सड़क में होने की बात
मामला रायगढ़ के अमलीभौना गांव का है। यहां एमएस शंकर ट्रेडिंग कंपनी के साझेदार अरुण कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। याचिका में बताया गया कि उनकी जमीन खसरा नंबर 321/15 में दर्ज है। इसका क्षेत्रफल करीब 0.068 हेक्टेयर है।
जमीन के सीमांकन के लिए उन्होंने राजस्व विभाग में आवेदन दिया था। जांच के बाद राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट में सामने आया कि यह जमीन पहले ही परिवहन नगर से मिठ्ठूमुड़ा को जोड़ने वाली सड़क में शामिल हो चुकी है।
जमीन मालिक ने मांगा मुआवजा या दूसरी जमीन
याचिकाकर्ता का कहना था कि उनकी निजी जमीन का उपयोग सार्वजनिक सड़क के लिए कर लिया गया। इसके बाद भी प्रशासन ने तय प्रक्रिया के तहत जमीन का अधिग्रहण नहीं किया।
उन्होंने अधिकारियों को अप्रैल 2026 में आवेदन देकर मांग की थी कि जमीन के बदले बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा उन्होंने समान मूल्य की सरकारी जमीन देने का विकल्प भी रखा था।
आवेदन लंबित रहने पर पहुंची हाईकोर्ट
जमीन मालिक का कहना था कि आवेदन देने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अधिकारियों को जल्द निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ में हुई। कोर्ट ने कहा कि सक्षम अधिकारी जमीन मालिक के आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करें।
हाईकोर्ट ने सुनवाई का मौका देने के निर्देश दिए
हाईकोर्ट ने प्रशासन को कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए। इसके बाद कारण सहित स्पष्ट आदेश जारी किया जाए।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसने मुआवजे के दावे पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। मुआवजा दिया जाएगा या नहीं, इसका फैसला संबंधित राजस्व अधिकारी नियमों के अनुसार करेंगे।
सरकार ने 45 दिन में निर्णय लेने की बात कही
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जमीन मालिक के आवेदन पर 45 दिन के भीतर फैसला लिया जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरि अग्रवाल ने पक्ष रखा। वहीं शासन की तरफ से उप महाधिवक्ता शोभित मिश्रा मौजूद रहे। अब प्रशासन को तय समय सीमा में पूरे मामले की जांच कर जमीन मालिक के आवेदन पर निर्णय लेना होगा।
FAQ
- रायगढ़ में निजी जमीन को लेकर क्या मामला है?
रायगढ़ में एक निजी जमीन को बिना अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए सड़क में शामिल करने का मामला सामने आया है। - जमीन मालिक ने प्रशासन से क्या मांग की है?
जमीन मालिक ने जमीन के बदले बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा या समान मूल्य की सरकारी जमीन देने की मांग की है। - हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट ने प्रशासन को 45 दिन के भीतर जमीन मालिक के आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
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