अनोखी शादी; जलते अंगारों पर चलकर दूल्हा-दुल्हन ने लिए फेरे, रूह कपा देने वाली परंपरा देख लोग रह गए दंग

Umeshwari Baghel | Apr 28, 2026, 17:37 IST
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के बिलासपुर गांव में दूल्हा-दुल्हन ने जलते अंगारों पर चलकर शादी की रस्में पूरी कीं। यह परंपरा आदिवासी समाज में दशकों से चली आ रही है। शादी के बाद बकरे की बलि दी जाती है और घर के मुखिया पर देवता सवार होते हैं।

NEWS IN SHORT

  • रायगढ़ में जलते अंगारों पर चलकर पूरी हुई शादी की रस्में
  • परंपरा है जहा दूल्हा-दुल्हन नंगे पांव अंगारों पर चलते है
  • बकरे की बलि के बाद देवता का सवार होना, गांव में प्रचलित है यह रस्म
  • उपवास रखने के साथ पूरी होती है पारंपरिक शादी की यह अनोखी परंपरा
  • सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रायगढ़ की अनोखी शादी

NEWS IN DETAIL

Raigarh News : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक अनोखी शादी का दृश्य सामने आया है, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए। इस शादी में दूल्हा-दुल्हन ने पारंपरिक सात फेरों के साथ-साथ जलते अंगारों पर चलकर विवाह की रस्में पूरी कीं।



यह परंपरा आदिवासी समाज में दशकों से चली आ रही है और आज भी इसे पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाया जाता है।



जलते अंगारों पर चलने की परंपरा

raigarh news in hindi :रायगढ़ जिले के बिलासपुर गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र में यह अनोखी परंपरा आज भी जीवित है। शादी के बाद जब दुल्हन को घर लाया जाता है



तो घर के देवी-देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है और फिर मंडप में जलते अंगारे बिछाए जाते हैं। दूल्हा और दुल्हन के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्य भी नंगे पांव इन अंगारों पर चलकर इस रस्म को निभाते हैं।



घर के मुखिया पर देवता का सवार होना

इस परंपरा के अनुसार, शादी के बाद मंडप में बकरे की बलि दी जाती है और इसके बाद घर के मुखिया पर देवता सवार हो जाते हैं।



मुखिया देवता के रूप में नाचते-गाते हुए मंडप में जलते अंगारे बिछाते हैं और पूरी रस्म की अगुवाई करते हैं। खास बात यह है कि इस दौरान दूल्हा-दुल्हन और अन्य लोग जलते अंगारों पर चलते हैं, लेकिन किसी के पैर नहीं जलते



उपवास रखने की परंपरा

इस विवाह रस्म के दौरान कई लोग उपवास रखते हैं और पानी तक नहीं पीते। दुल्हन के घर आने के बाद पहले बकरे की बलि दी जाती है और उसके खून से तिलक किया जाता है।



फिर दुल्हन को घर में प्रवेश कराया जाता है। इसके बाद दूसरी बलि दी जाती है और फिर अंगारों पर चलने की रस्म पूरी होती है।



देवी-देवता के नाराज होने का डर

छत्तीसगढ़ आदिवासी संस्कृति:गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे निभाना अनिवार्य माना जाता है। गांववासियों का मानना है कि अगर इस परंपरा को नहीं निभाया गया, तो देवी-देवता नाराज हो सकते हैं और परिवार पर विपत्ति आ सकती है।



भीड़ उमड़ी देखने

इस अनोखी शादी को देखने के लिए गांव के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जलते अंगारों पर चलने वाले दूल्हा-दुल्हन का दृश्य लोगों के लिए आस्था और कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।



सोशल मीडिया पर हो रही चर्चा( Viral News)

यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। लोग इस परंपरा को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और इसे एक अनोखी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देख रहे हैं।



यह अनोखी परंपरा अब चर्चा का विषय बन गई है और इसकी विशिष्टता और आस्था ने सभी को हैरान कर दिया है।



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