आज धनतेरस पर यमराज के लिए क्यों जलाते हैं चार बातियों वाला दीपक, दीप जलाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
Kaushiki | Nov 06, 2026, 09:44 IST
धनतेरस पर दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाने की विधि
आज 6 धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन इस दिन एक और परंपरा निभाई जाती है, जिसे यमदीप दान कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनतेरस की शाम यमराज के नाम पर दीपक जलाने से अकाल मृत्यु के भय से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
खास बात यह है कि यह दीपक दक्षिण दिशा में रखा जाता है। आइए जानें कि धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक क्यों जलाया जाता है, इसकी विधि क्या है और चौमुखी दीपक का क्या महत्व है।
धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुएं खरीदने का विशेष महत्व माना जाता है। मुहूर्त के मुताबिक, इस साल खरीदारी का शुभ समय 6 नवंबर सुबह 11:06 बजे से 7 नवंबर सुबह 10:46 बजे तक रहेगा।
वहीं, शुभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 1:27 बजे तक और शाम 4:11 बजे से 5:33 बजे तक बताया गया है। धनतेरस पर भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान 'ॐ श्रीं कुबेराय नमः' और 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
हिंदू धर्म में धनतेरस का त्योहार सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से जुड़ा हुआ है। इस दिन लोग सोना, चांदी, बर्तन और दूसरी शुभ वस्तुएं खरीदते हैं। इसके साथ ही शाम के समय एक खास धार्मिक परंपरा निभाई जाती है, जिसे यमदीप दान कहते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यमराज को मृत्यु और न्याय का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस की शाम उनके नाम का दीपक जलाकर परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ यमदीप दान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। हालांकि, यह धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक दक्षिण दिशा में जलाने की परंपरा है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है। हिंदू परंपरा में दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों से संबंधित माना जाता है। इसी वजह से यमराज को समर्पित दीपक दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है।
ऐसा माना जाता है कि दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की रक्षा और लंबी आयु का आशीर्वाद मांगा जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि सामान्य पूजा में दीपक की दिशा को लेकर अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं, लेकिन Yam Deep Daan में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व माना जाता है।
धनतेरस की शाम कई घरों में चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। चौमुखी दीपक का मतलब ऐसा दीपक होता है, जिसमें चार दिशाओं की ओर चार बातियां जलती हैं। धार्मिक परंपराओं में इसे चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाने का प्रतीक माना जाता है।
यह दीपक अंधकार को दूर करने और परिवार की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है। हालांकि, यमदीप दान के लिए हर परंपरा में चौमुखी दीपक अनिवार्य नहीं माना गया है। कुछ परिवार एक बाती वाला मिट्टी का दीपक भी जलाते हैं। इसलिए परिवार में चली आ रही धार्मिक परंपरा के मुताबिक दीपक जलाया जा सकता है।
धनतेरस पर यमदीप दान करते समय एक पारंपरिक संस्कृत श्लोक बोला जाता है।
मंत्र का अर्थ: कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर किए गए दीपदान से सूर्यपुत्र यमराज प्रसन्न हों और परिवार पर उनकी कृपा बनी रहे। जो लोग संस्कृत मंत्र नहीं बोल पाते, वे मन ही मन यमराज से अपने परिवार की लंबी आयु और सुरक्षा की प्रार्थना कर सकते हैं।
धार्मिक परंपरा के मुताबिक, धनतेरस पर यमदीप दान शाम के समय किया जाता है। इसके लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास शुरू होने वाला संध्याकाल होता है। धनतेरस की तिथि और प्रदोष काल का समय शहर तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है इसलिए Dhanteras Rituals का पालन करते समय अपने शहर का पंचांग देखकर सही समय जानना उचित रहता है।
यमदीप दान की परंपरा से एक लोकप्रिय कथा भी जुड़ी हुई है। कथा के मुताबिक, एक राजकुमार की शादी के चौथे दिन मृत्यु होने की भविष्यवाणी की गई थी। राजकुमार की पत्नी ने अपने पति को बचाने के लिए उस रात घर में अनेक दीपक जलाए। उसने सोने-चांदी के आभूषण भी एक स्थान पर रख दिए और पूरी रात जागकर अपने पति को कहानियां और गीत सुनाती रही।
कथा के अनुसार, जब यमराज के दूत राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे, तो दीपकों के प्रकाश और आभूषणों की चमक के कारण वे अपना कार्य नहीं कर सके। इस कथा से धनतेरस की रात दीपदान करने और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना करने की मान्यता जुड़ी हुई है। हालांकि, यह एक पौराणिक लोककथा है, इसे ऐतिहासिक घटना नहीं माना जाना चाहिए।
धनतेरस पर दीपक जलाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। दीपक को ऐसी जगह रखें, जहां से लोगों के आने-जाने में परेशानी न हो। यदि घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो दीपक को उनकी पहुंच से दूर रखें।
दीपक को पर्दों, कपड़ों और दूसरी ज्वलनशील चीजों से दूर रखना चाहिए। जलते हुए दीपक को बिना निगरानी के छोड़ना भी सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा, यमदीप दान को लेकर किसी तरह का भय या अंधविश्वास नहीं रखना चाहिए।
यह परिवार की मंगलकामना से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। धनतेरस पर यमदीप दान केवल दीपक जलाने की परंपरा नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करने का एक धार्मिक माध्यम है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त
वहीं, शुभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 1:27 बजे तक और शाम 4:11 बजे से 5:33 बजे तक बताया गया है। धनतेरस पर भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। पूजा के दौरान 'ॐ श्रीं कुबेराय नमः' और 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
धनतेरस पर क्यों किया जाता है यमदीप दान?
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यमराज को मृत्यु और न्याय का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस की शाम उनके नाम का दीपक जलाकर परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ यमदीप दान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। हालांकि, यह धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
शाम को दक्षिण दिशा में ही क्यों जलाया जाता है दीपक?
ऐसा माना जाता है कि दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की रक्षा और लंबी आयु का आशीर्वाद मांगा जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि सामान्य पूजा में दीपक की दिशा को लेकर अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं, लेकिन Yam Deep Daan में दक्षिण दिशा का विशेष महत्व माना जाता है।
यमदीप दान में चौमुखी दीपक क्यों जलाया जाता है?
यह दीपक अंधकार को दूर करने और परिवार की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है। हालांकि, यमदीप दान के लिए हर परंपरा में चौमुखी दीपक अनिवार्य नहीं माना गया है। कुछ परिवार एक बाती वाला मिट्टी का दीपक भी जलाते हैं। इसलिए परिवार में चली आ रही धार्मिक परंपरा के मुताबिक दीपक जलाया जा सकता है।
यमदीप दान की सही विधि क्या है?
- सबसे पहले धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को साफ करें।
- इसके बाद मिट्टी का एक दीपक लें। पारिवारिक परंपरा के अनुसार चौमुखी दीपक भी लिया जा सकता है।
- दीपक में सरसों का तेल या अपनी परंपरा के अनुसार दूसरा तेल डालें।
- अगर चौमुखी दीपक है तो उसमें चार रूई की बातियां लगाएं।
- शाम के समय, विशेष रूप से प्रदोष काल में, दीपक जलाएं।
- अब दीपक को घर के बाहर किसी सुरक्षित स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर रखें।
- यमराज का स्मरण करते हुए परिवार की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु के भय से रक्षा की प्रार्थना करें।
- दीपक जलाने के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर रहने दें। ध्यान रखें कि आग लगने का खतरा न हो।
यमराज के नाम का दीपक जलाते समय कौन सा मंत्र बोलें
मृत्युनाऽपाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥
धनतेरस पर यमदीप दान करने का सही समय क्या है?
यमदीप दान के पीछे क्या है धार्मिक कथा?
कथा के अनुसार, जब यमराज के दूत राजकुमार के प्राण लेने पहुंचे, तो दीपकों के प्रकाश और आभूषणों की चमक के कारण वे अपना कार्य नहीं कर सके। इस कथा से धनतेरस की रात दीपदान करने और अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना करने की मान्यता जुड़ी हुई है। हालांकि, यह एक पौराणिक लोककथा है, इसे ऐतिहासिक घटना नहीं माना जाना चाहिए।
यमदीप दान करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
दीपक को पर्दों, कपड़ों और दूसरी ज्वलनशील चीजों से दूर रखना चाहिए। जलते हुए दीपक को बिना निगरानी के छोड़ना भी सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा, यमदीप दान को लेकर किसी तरह का भय या अंधविश्वास नहीं रखना चाहिए।
यह परिवार की मंगलकामना से जुड़ी धार्मिक परंपरा है। धनतेरस पर यमदीप दान केवल दीपक जलाने की परंपरा नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करने का एक धार्मिक माध्यम है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
- धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक क्यों जलाया जाता है?
धनतेरस पर यमराज के नाम का दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है। इसे धार्मिक आस्था के अनुसार किया जाता है, जिससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। - धनतेरस पर दीपक जलाते समय कौन सी दिशा में दीपक रखना चाहिए?
धनतेरस पर दीपक को दक्षिण दिशा में रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दक्षिण दिशा यमराज और पितरों से संबंधित मानी जाती है। - यमदीप दान की सही विधि क्या है?
यमदीप दान के लिए पहले घर के मुख्य द्वार को साफ करें, फिर दीपक में सरसों का तेल डालें और उसे दक्षिण दिशा की ओर जलाएं। दीपक जलाते समय परिवार की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
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