Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी पर दक्षिण दिशा में क्यों जलाते हैं दीपक, जानें यमराज की पूजा और राजा रंतिदेव की कथा
Kaushiki | Nov 03, 2026, 12:22 IST
नरक चतुर्दशी 2026 पर अभ्यंग स्नान का सही मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि जानें
दीपावली से एक दिन पहले नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस भी कहते हैं। यह त्योहार रूप और सौंदर्य निखारने का पर्व माना जाता है। इस दिन यमराज की पूजा का विशेष विधान है। शास्त्रों में इस दिन का बड़ा धार्मिक महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि इस दिन उबटन लगाने से रूप निखरता है। घर में सुख और समृद्धि का वास हमेशा बना रहता है। यमदेव की कृपा से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। हर साल लोग इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है।
दीपक जलाने से जीवन का सारा अंधेरा दूर होता है। मन में छाई नकारात्मकता पूरी तरह से खत्म हो जाती है। यह पर्व परिवार में अपार खुशियां और उमंग लाता है। आइए इस पर्व से जुड़ी हर जरूरी बातों को जानें।
साल 2026 में कार्तिक चतुर्दशी तिथि बहुत खास रहने वाली है। चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 06:20 बजे शुरू होगी। यह तिथि 8 नवंबर को सुबह 04:30 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के नियम अनुसार स्नान 8 नवंबर को होगा। शुभ अभ्यंग स्नान का समय सुबह 05:41 बजे से शुरू होगा।
यह मुहूर्त सुबह 06:38 बजे तक ही बना रहेगा। स्नान के लिए कुल 57 मिनट का समय मिलेगा। स्थानीय समय के मुताबिक इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है। इस शुभ समय में स्नान करना बहुत फलदायी होता है।
पौराणिक कथा के मुताबिक, भौमासुर नाम का एक राजा रहता था। उस दुष्ट असुर को लोग नरकासुर भी कहते थे। उसने अपनी शक्ति के घमंड में देवताओं को हराया था। उसने 16 हजार राजकुमारियों को बंदी बना लिया था।
सभी देवता मदद के लिए भगवान श्रीकृष्ण के पास गए। श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ उस पर हमला किया। भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया। उन्होंने सभी बंदी महिलाओं को दुष्ट से आजाद कराया।
नरकासुर ने मृत्यु के समय श्रीकृष्ण से एक वरदान मांगा। उसने कहा कि इस दिन स्नान करने वाला नरक न जाए। श्रीकृष्ण ने उसकी यह अंतिम इच्छा सहर्ष पूरी कर दी। तभी से कार्तिक चतुर्दशी पर स्नान की परंपरा शुरू हुई।
एक अन्य पौराणिक कथा राजा रंतिदेव से जुड़ी हुई है। वे धर्मात्मा और दानी राजा माने जाते थे। जब उनका अंतिम समय आया तो यमदूत उन्हें लेने आए। यमदूतों ने राजा को नरक ले जाने की बात कही।
राजा ने हैरान होकर नरक जाने का कारण पूछा। यमदूत ने बताया कि एक बार आपके द्वार से भूखा साधु लौटा था। राजा रंतिदेव ने यमदूतों से एक साल का समय मांगा। वे ऋषियों के पास गए और उपाय पूछा।
ऋषियों ने कार्तिक चतुर्दशी को व्रत रखने की सलाह दी। राजा ने पूरी श्रद्धा से स्नान और व्रत का पालन किया। यमराज ने खुश होकर उन्हें नरक से मुक्ति दे दी। राजा रंतिदेव को सीधा वैकुण्ठ लोक में स्थान मिला।
मान्यता के मुताबिक, नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। शरीर पर तिल का तेल अच्छे से लगाना चाहिए। तिल के तेल से पूरे शरीर की मालिश करें। इसके बाद तिल्ली और औषधीय उबटन का लेप लगाएं।
स्नान के पानी में अपामार्ग के पत्ते जरूर डालें। सिर के ऊपर से अपामार्ग का पौधा घुमाकर फेंक दें। इसके बाद साफ पानी से अच्छी तरह स्नान कर लें। नए और साफ कपडे पहनकर उत्तर दिशा की ओर मुंह करें।
यमराज के निमित्त जल से तर्पण अर्पित करें। इससे जाने-अनजाने में हुए सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। चेहरे पर अनोखा निखार और कांति आ जाती है। जीवन के सारे मानसिक तनाव तुरंत दूर हो जाते हैं।
शाम के समय
मान्यता के मुताबिक, नरक चतुर्दशी की शाम को यम दीपदान किया जाता है। घर के मुख्य द्वार पर चार बत्तियों वाला दीपक जलाएं। दीपक में सरसों का तेल डालना बहुत शुभ होता है। दीपक का मुख दक्षिण दिशा की तरफ ही रखना चाहिए। यह दिशा यमराज की प्रिय दिशा मानी जाती है।
दीपक जलाकर यमदेव से परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें। ऐसा करने से घर में अकाल मृत्यु का भय मिटता है। यमराज प्रसन्न होकर परिवार को लंबी उम्र का वरदान देते हैं। घर के कोने-कोने में छोटा दीपक जरूर जलाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकल जाती है।
इस दिन पर उबटन लगाकर स्नान जरूर करें। शाम को यमदेव के नाम का चौमुखी दीपक जलाएं। घर के पुराने और बेकार सामान को बाहर फेंक दें। घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई करना बहुत जरूरी है। इस दिन किसी से भी लड़ाई-झगड़ा बिल्कुल न करें।
घर के बुजुर्गों का दिल से सम्मान और सेवा करें। दक्षिण दिशा को गंदा रखने की गलती न करें। इस दिन मांस और मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें। किसी भी गरीब या बेसहारा का अपमान न करें।
नरक चतुर्दशी का पर्व स्वच्छता, सेहत और सकारात्मकता फैलाने के साथ धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देता है। इस दिन हनुमान जी और मां काली की पूजा तथा दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
दीपक जलाने से जीवन का सारा अंधेरा दूर होता है। मन में छाई नकारात्मकता पूरी तरह से खत्म हो जाती है। यह पर्व परिवार में अपार खुशियां और उमंग लाता है। आइए इस पर्व से जुड़ी हर जरूरी बातों को जानें।
अभ्यंग स्नान का शुभ समय
यह मुहूर्त सुबह 06:38 बजे तक ही बना रहेगा। स्नान के लिए कुल 57 मिनट का समय मिलेगा। स्थानीय समय के मुताबिक इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है। इस शुभ समय में स्नान करना बहुत फलदायी होता है।
नरकासुर वध की पौराणिक कथा
सभी देवता मदद के लिए भगवान श्रीकृष्ण के पास गए। श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ उस पर हमला किया। भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया। उन्होंने सभी बंदी महिलाओं को दुष्ट से आजाद कराया।
नरकासुर ने मृत्यु के समय श्रीकृष्ण से एक वरदान मांगा। उसने कहा कि इस दिन स्नान करने वाला नरक न जाए। श्रीकृष्ण ने उसकी यह अंतिम इच्छा सहर्ष पूरी कर दी। तभी से कार्तिक चतुर्दशी पर स्नान की परंपरा शुरू हुई।
यमराज और राजा रंतिदेव कथा
राजा ने हैरान होकर नरक जाने का कारण पूछा। यमदूत ने बताया कि एक बार आपके द्वार से भूखा साधु लौटा था। राजा रंतिदेव ने यमदूतों से एक साल का समय मांगा। वे ऋषियों के पास गए और उपाय पूछा।
ऋषियों ने कार्तिक चतुर्दशी को व्रत रखने की सलाह दी। राजा ने पूरी श्रद्धा से स्नान और व्रत का पालन किया। यमराज ने खुश होकर उन्हें नरक से मुक्ति दे दी। राजा रंतिदेव को सीधा वैकुण्ठ लोक में स्थान मिला।
अभ्यंग स्नान की सही विधि
स्नान के पानी में अपामार्ग के पत्ते जरूर डालें। सिर के ऊपर से अपामार्ग का पौधा घुमाकर फेंक दें। इसके बाद साफ पानी से अच्छी तरह स्नान कर लें। नए और साफ कपडे पहनकर उत्तर दिशा की ओर मुंह करें।
यमराज के निमित्त जल से तर्पण अर्पित करें। इससे जाने-अनजाने में हुए सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। चेहरे पर अनोखा निखार और कांति आ जाती है। जीवन के सारे मानसिक तनाव तुरंत दूर हो जाते हैं।
शाम के समय यम दीपदान
दीपक जलाकर यमदेव से परिवार की रक्षा की प्रार्थना करें। ऐसा करने से घर में अकाल मृत्यु का भय मिटता है। यमराज प्रसन्न होकर परिवार को लंबी उम्र का वरदान देते हैं। घर के कोने-कोने में छोटा दीपक जरूर जलाना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकल जाती है।
इस दिन क्या करें क्या न करें
घर के बुजुर्गों का दिल से सम्मान और सेवा करें। दक्षिण दिशा को गंदा रखने की गलती न करें। इस दिन मांस और मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें। किसी भी गरीब या बेसहारा का अपमान न करें।
नरक चतुर्दशी का पर्व स्वच्छता, सेहत और सकारात्मकता फैलाने के साथ धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देता है। इस दिन हनुमान जी और मां काली की पूजा तथा दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
- नरक चतुर्दशी का पर्व कब मनाया जाएगा?
नरक चतुर्दशी का पर्व 7 नवंबर 2026 को सुबह 06:20 बजे से शुरू होकर 8 नवंबर को सुबह 04:30 बजे समाप्त होगा। - नरक चतुर्दशी पर स्नान करने का शुभ समय क्या है?
नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान का शुभ समय 8 नवंबर 2026 को सुबह 05:41 बजे से 06:38 बजे तक होगा। - नरक चतुर्दशी पर क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन उबटन लगाकर स्नान करना चाहिए और शाम को यम दीपदान करना चाहिए। लेकिन इस दिन मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
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