झुंझुनूं में सड़क बना रहे 8 मजदूरों की करंट से मौत, 5 झुलसे; 15 लाख मुआवजा और नौकरी पर बनी सहमति
Ashish Bhardwaj | Nov 03, 2026, 11:59 IST
8 मजदूरों की मौत पर सरकार ने दिया मुआवजा
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सोमवार को हुए एक दर्दनाक हादसे ने आठ परिवारों की खुशियां छीन लीं। उदयपुरवाटी थाना क्षेत्र के छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से आठ मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में पांच अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। मृतकों में सड़क निर्माण का ठेकेदार भी शामिल है।
सात घंटे के धरने के बाद मुआवजे पर सहमति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख जताया। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शोक व्यक्त करते हुए घायलों के बेहतर इलाज, प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता और घटना की जांच के निर्देश दिए।
11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन से हुआ हादसा
एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
हादसे में पांच लोग झुलस गए। इनमें गीता देवी, संतरा देवी, मंजू देवी, महेंद्र और गीगाराम शामिल हैं। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और घायलों के इलाज की जानकारी ली।
बिजली विभाग पर ग्रामीणों ने लगाए आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद बिजली बंद कराने के लिए ग्रिड सब स्टेशन पर फोन किया गया, लेकिन कर्मचारियों ने कॉल नहीं उठाया। ऑटो कट सिस्टम के काम नहीं करने की बात भी सामने आई है। हालांकि, लाइन की वास्तविक ऊंचाई, पोल शिफ्टिंग और बिजली आपूर्ति बंद होने में हुई देरी जैसे तकनीकी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
चंदा जुटाकर बनवा रहे थे सड़क
प्रशासन की ओर से रास्ते को वन विभाग की जमीन से जुड़ा बताते हुए जरूरी अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने आपस में चंदा जुटाकर सड़क बनाने का फैसला किया। हालांकि, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि सड़क का काम सरकारी योजना के तहत नहीं, बल्कि जनसहयोग से कराया जा रहा था। जमीन वन विभाग की होने के कारण जरूरी प्रक्रिया पूरी किए बिना निर्माण करना नियमों के अनुरूप नहीं था।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि तकनीकी अधिकारियों को मौके पर भेजकर हादसे के कारणों की जांच कराई जा रही है। यदि बिजली विभाग की ओर से कोई तकनीकी या प्रशासनिक चूक सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी। अब जांच में यह साफ होना बाकी है कि हाईटेंशन लाइन के आसपास सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए और मशीन के संपर्क में आने के बाद बिजली आपूर्ति तत्काल बंद क्यों नहीं हुई।
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