महिला बैंक मैनेजर से ही लाखों की साइबर ठगी, कार शोरूम संचालक बनकर किया फोन

Harrison Masih | Aug 26, 2026, 13:47 IST
रायपुर में साइबर ठगी
रायपुर में बैंक मैनेजर से साइबर ठगी का मामला सामने आया है। जालसाज ने कार शोरूम संचालक बनकर 2 करोड़ रूपए की FD का भरोसा दिलाया और फर्जी ई-मेल के जरिए 5 लाख ट्रांसफर करा लिए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • 2 करोड़ की FD का झांसा देकर बैंक मैनेजर को अपने जाल में फंसाया।
  • जालसाज ने कार शोरूम संचालक बनकर फोन पर भरोसा कायम किया।
  • फर्जी ई-मेल के जरिए बैंक खाते से 5 लाख रूपए ट्रांसफर करा लिए।
  • करीब 40 मिनट बाद असली ग्राहक से संपर्क हुआ, तब ठगी का खुलासा हुआ।
  • मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

राजधानी रायपुर में ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक महिला बैंक मैनेजर को पहले कार शोरूम संचालक बनकर फोन किया गया और करीब 2 करोड़ रूपए की एफडी कराने का भरोसा दिलाया गया। इसके बाद जालसाजों ने फर्जी ई-मेल के जरिए बैंक खाते से 5 लाख रूपए ट्रांसफर करवा लिए।



मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।



पहले 2 करोड़ की एफडी का दिया झांसा

पुलिस के मुताबिक, महिला बैंक मैनेजर को एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कार शोरूम का संचालक बताया और बैंक में करीब 2 करोड़ रूपए की एफडी कराने की बात कही।



कुछ दिनों तक बातचीत के बाद आरोपी ने बैंक मैनेजर का भरोसा जीत लिया। इसके बाद उसने फोन पर एफडी की ब्याज दर और प्रक्रिया की जानकारी ली। फिर फर्जी दस्तावेज और ई-मेल के जरिए बैंक खाते से रकम ट्रांसफर करने की कोशिश की गई।



फर्जी ई-मेल से खाते से निकले 5 लाख

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने फर्जी ई-मेल आईडी के जरिए भुगतान का आवेदन भेजा। बैंक मैनेजर ने दस्तावेजों और हस्ताक्षर की जांच के बाद करीब 5 लाख रूपए एक खाते में ट्रांसफर कर दिए।



करीब 40 मिनट बाद जब असली ग्राहक से संपर्क किया गया तो उसने साफ बताया कि उसकी ओर से ऐसा कोई भुगतान आवेदन नहीं भेजा गया था। इसके बाद बैंक अधिकारियों को ठगी का पता चला।



पुलिस ने मोबाइल नंबर, ई-मेल और बैंक खाते से जुड़ी तकनीकी जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।



ई-मेल पर भरोसा करना पड़ सकता है भारी

साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जालसाज अक्सर पहले भरोसा कायम करते हैं और फिर फर्जी ई-मेल, दस्तावेज या भुगतान अनुरोध भेजकर ठगी करते हैं। बैंक और कंपनियों को ऐसे मामलों में ई-मेल के साथ-साथ फोन नंबर और दस्तावेजों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जरूर करनी चाहिए।



यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि बड़े निवेश या भुगतान का प्रस्ताव मिलने पर सिर्फ ई-मेल या दस्तावेज देखकर भरोसा करना कितना महंगा पड़ सकता है।



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