रायपुर में चौतरफा महंगाई : अब आशियाना बनाना और बसों का सफर होगा भारी महंगा
NEWS IN SHORT
- रायपुर में मकान निर्माण लागत 200 रूपए प्रति वर्गफीट तक बढ़ी।
- सीमेंट, सरिया, रेत और टाइल्स के दाम तेजी से उछले।
- क्रेडाई के अनुसार समय पर मटेरियल न मिलने से परेशानी।
- बस एसोसिएशन ने किराया 50% तक बढ़ाने की मांग की।
- डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से माल भाड़ा बढ़ा।
NEWS IN DETAIL
देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब आम जनता की जेब पर दिखने लगा है। राजधानी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में इसका दोहरा असर देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां मकान निर्माण की लागत (कंसट्रक्शन कॉस्ट) में भारी बढ़ोतरी हुई है, वहीं दूसरी तरफ बसों का सफर भी महंगा होने की कगार पर है। डीजल के दाम 125 रूपए प्रति लीटर तक पहुंचने की आशंका के बीचऔर बस संचालकों ने अपने रेट बढ़ाने का फैसला कर लिया है।
मकान बनाना हुआ महंगा
रायपुर में अब अपना आशियाना बनाना आम आदमी के बजट से बाहर होता जा रहा है। पहले यहाँ मकान बनाने का ठेकेदारी रेट 1200 से 1500 प्रति वर्गफीट आ रहा था, जो अब बढ़कर 1700 प्रति वर्गफीट तक पहुंच गया है। छोटे-बड़े सभी ठेकेदारों ने बढ़ती महंगाई का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए हैं।
बिल्डिंग मटेरियल संघ के अध्यक्ष सूरज उपाध्याय के अनुसार, जब सामान बेचने वालों को ही पीछे से महंगा माल मिल रहा है, तो वे उसे महंगा बेचने को मजबूर हैं। वहीं क्रेडाई (छत्तीसगढ़) के अध्यक्ष पंकज लाहोटी ने बताया कि डीजल रेट बढ़ने से सिर्फ कीमतें ही नहीं बढ़ीं, बल्कि समय पर मटेरियल न मिलने से प्रोजेक्ट की कॉस्ट भी लगातार भाग रही है।
निर्माण सामग्री की कीमतों में आया उछाल:
सीमेंट: पहले 280-320 रूपए में मिलने वाली बोरी अब 350 रूपए तक पहुंच गई है।
सरिया: 39-47 रूपए प्रति किग्रा से बढ़कर अब 43-52 रूपए तक बिक रहा है।
रेत (एक हाइवा): पहले 11 हजार -14 हजार 500 रूपए में मिलने वाली रेत अब 12 हजार से 16 हजार तक हो गई है।
अन्य सामग्रियां: टाइल्स, पुट्टी, पेंट और तार बंडल की कीमतों में भी 30 से 100 तक का उछाल आया है।
सफर पर भी महंगाई का ब्रेक
डीजल की मार सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है, अब सड़क का सफर भी जेब काटने वाला है। यातायात महासंघ के अध्यक्ष सैय्यद अनवर अली का कहना है कि डीजल के बढ़ते दामों के कारण बसों का संचालन घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
इस संकट को देखते हुए बस एसोसिएशन ने परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश को ज्ञापन सौंपकर साधारण बसों के किराए में 50 प्रतिशत और डीलक्स/एसी बसों के किराए में 30 प्रतिशत वृद्धि की मांग की है।
प्रस्तावित बस किराया वृद्धि पर एक नजर:
रायपुर से दुर्ग: वर्तमान किराया 50 रूपए से बढ़कर 75 रूपए करने का प्रस्ताव है।
रायपुर से बिलासपुर: वर्तमान 150 रूपए का किराया 225 रूपए हो सकता है।
रायपुर से सरायपाली: 155 रूपए के मुकाबले अब 225 रूपए देने पड़ सकते हैं।
रायपुर से बलौदाबाजार: 110 रूपए का किराया सीधे 150 रूपए या 235 रूपए (रूट के अनुसार) तक बढ़ सकता है।
साफ है कि डीजल की इस आग ने आम नागरिक के 'रोटी, कपड़ा और मकान' के साथ-साथ उनके सफर को भी बेहद खर्चीला बना दिया है।
निष्कर्ष
डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी ने चौतरफा संकट पैदा कर दिया है। इससे न केवल मकान बनाना आम आदमी के बजट से बाहर हो रहा है, बल्कि ट्रांसपोर्टर लागत बढ़ने से रोजमर्रा का सफर भी महंगा होने जा रहा है। महंगाई की यह दोहरी मार मध्यम वर्ग की जेब पर भारी पड़ रही है।
FAQ
- रायपुर में मकान बनाना कितना महंगा हुआ?
A: डीजल बढ़ने से निर्माण खर्च ₹200 प्रति वर्गफीट तक बढ़ गया है। - सीमेंट और सरिया के नए दाम क्या हैं?
A: सीमेंट 350 रूपए /बोरी तक और सरिया 52 रूपए/किग्रा तक पहुंच गया है। - बस किराए में कितने प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग है?
A: साधारण बसों में 50% और एसी बसों में 30% वृद्धि की मांग है। - निर्माण सामग्री महंगी होने का मुख्य कारण क्या है?
A: डीजल के दाम 125 रूपए तक पहुंचने की आशंका और माल भाड़े में बढ़ोतरी।
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