रायपुर निगम में कमीशनराज : 100 करोड़ फंसे, ठेकेदारों का हल्लाबोल
समझें क्या है पूरा मामला
Raipur। राजधानी रायपुर नगर निगम एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। ठेकेदारों ने दावा किया है कि निगम में बिना कमीशन दिए भुगतान की फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। उनका कहना है कि 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान महीनों से अटका हुआ है और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
ठेकेदारों ने नाराज होकर काम बंद कर दिया और निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि सिस्टम में पारदर्शिता खत्म हो चुकी है और काम कराने के लिए रेट सिस्टम चल रहा है।
100 करोड़ से ज्यादा भुगतान लंबित, ठेकेदारों पर बढ़ा कर्ज का बोझ
ठेकेदारों का कहना है कि नगर निगम में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान रुका हुआ है। कई फर्मों को 6 महीने से लेकर डेढ़ साल तक का भुगतान नहीं मिला है।
ठेकेदारों का कहना है कि वे बैंक से कर्ज लेकर काम कर रहे हैं, लेकिन समय पर भुगतान न होने से ब्याज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे कई छोटे ठेकेदार आर्थिक संकट में आ गए हैं।
हर फाइल का अलग रेट, कमीशन सिस्टम का गंभीर आरोप
ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि निगम में हर फाइल के लिए अलग-अलग कमीशन तय है। उनका कहना है कि भुगतान और टेंडर प्रक्रिया में 30 से 40 प्रतिशत तक कटौती की मांग की जाती है। GST और अन्य वैधानिक कटौतियों के बाद भी अतिरिक्त रकम की मांग होती है। ठेकेदारों का यह भी आरोप है कि जोन स्तर से लेकर पार्षद और अध्यक्ष तक इस व्यवस्था में शामिल हैं।
गुणवत्ता पर सवाल, कमीशन के बाद काम स्वीकार होने का दावा
ठेकेदारों ने कहा कि कमीशन तय होने के बाद कई बार घटिया गुणवत्ता वाले काम भी पास कर दिए जाते हैं। बाद में किसी भी गड़बड़ी का दोष ठेकेदारों पर डाल दिया जाता है। वहीं समय पर काम पूरा न होने पर पेनल्टी भी लगा दी जाती है, जिससे दोहरा नुकसान हो रहा है।जोन 7 के अधिकारी पर गंभीर आरोप, ठेकेदार ने खोला मामला
एक ठेकेदार ने जोन 7 के अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ठेकेदार का दावा है कि उसे जबरन 5 लाख रुपये का संदिग्ध सामान बेचा गया, जिससे विवाद बढ़ा और मामला जेल तक पहुंच गया। उसका कहना है कि करीब डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान अब भी लंबित है और कई बार आवेदन देने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई।
फाइलें गायब होने और तानाशाही का आरोप
ठेकेदार संघ के अध्यक्ष ने कहा कि निगम में फाइलों का कोई स्पष्ट ट्रैक नहीं है। कई बार फाइलें गायब हो जाती हैं और ठेकेदारों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। उनका आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में तानाशाही जैसा माहौल है और निर्देशों का पालन नहीं हो रहा। पहले भी उठ चुके हैं सवाल, सफाई ठेकेदारों ने की थी हड़ताल
यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम पर सवाल उठे हों।
पिछले महीनों में सफाई ठेकेदारों ने भी बकाया भुगतान को लेकर हड़ताल की थी, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। पानी टैंकर और टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी पहले विवाद सामने आ चुके हैं।
सिस्टम पर सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग
ठेकेदारों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका कहना है कि अगर समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था नहीं हुई तो काम पूरी तरह ठप हो सकता है। वहीं उन्होंने राज्य सरकार और नगरीय निकाय मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले में नगर निगम प्रशासन, महापौर और कमिश्नर की प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
IMP FACTS
रायपुर नगर निगम पर 100 करोड़ से अधिक भुगतान लंबित होने का आरोप
ठेकेदारों का दावा: बिना कमीशन फाइलें आगे नहीं बढ़तीं
6 महीने से 18 महीने तक भुगतान अटका होने की बात
30%–40% तक कमीशन मांगने का गंभीर आरोप
जोन, अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
ठेकेदारों ने काम बंद कर निगम के बाहर प्रदर्शन किया
स्वतंत्र जांच और तत्काल भुगतान की मांग उठी
FAQ
- रायपुर नगर निगम में ठेकेदारों के क्या आरोप हैं?
ठेकेदारों का आरोप है कि भुगतान में भारी देरी हो रही है और बिना कमीशन दिए फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। - कितनी राशि का भुगतान लंबित बताया जा रहा है?
ठेकेदारों के अनुसार नगर निगम में 100 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान अटका हुआ है। - ठेकेदारों ने क्या कदम उठाया है?
भुगतान और सिस्टम के विरोध में ठेकेदारों ने काम बंद कर निगम मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया है।
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