रायपुर पुलिस कमिश्नरी: दोहरी पुलिस व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल,देहात में बढ़ा अपराध
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर में दोहरी पुलिस व्यवस्था लागू हुए 179 दिन बीत चुके हैं। इस व्यवस्था से पुलिसिंग और कानून-व्यवस्था में कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। डीजीपी अरुणदेव गौतम (DGP – Director General of Police) की समिति ने एकीकृत व्यवस्था की सिफारिश की है। ग्रामीण इलाकों के नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर 50 करोड़ से अधिक खर्च होने का अनुमान है। शासन अब पूरे जिले में एक समान पुलिस कमिश्नरी लागू करने पर विचार कर रहा है।
रायपुर पुलिसिंग पर उठे सवाल
रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी और देहात पुलिस की दोहरी व्यवस्था से प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। मात्र 179 दिनों के भीतर ही इसके प्रतिकूल असर दिखने लगे हैं। एक ही जिले में दो अलग-अलग व्यवस्थाएं चलने से पुलिस समन्वय में बाधा आ रही है। विधानसभा में गलत जवाब चले जाने का मामला भी सामने आया है। वरिष्ठ विधायक भोलाराम साहू (MLA – Member of Legislative Assembly) के सवाल पर गलत जानकारी दी गई। उन्होंने गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस विषय पर अपनी आपत्ति जताई है।
एक समान पुलिसिंग की तैयारी
डीजीपी द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने शासन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति का मानना है कि संसाधनों की कमी में दोहरी व्यवस्था चलाना संभव नहीं है। इससे पुलिसिंग का स्तर प्रभावित हो रहा है। डीजीपी ने शासन को पत्र भेजकर एकीकृत व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट के अनुसार पर्याप्त बल के बिना दोहरी व्यवस्था से खजाना खाली होगा। देहात इलाकों में पुलिसिंग कमजोर हुई है। जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे जिले में एक समान व्यवस्था मांगी है। गृह मंत्री विजय शर्मा (Minister of State for Home Affairs) भी इस पक्ष में बताए जा रहे हैं। अगस्त तक इस संबंध में घोषणा होने की संभावना है।
दोहरी पुलिसिंग से चार बड़ी वजहें
- जिले में दोहरी व्यवस्था से चार प्रमुख समस्याएं पैदा हो रही हैं। पहला, विधानसभा में गलत जवाब जाने का मामला गरमा चुका है।
- दूसरा, सिपाही और हवलदार के तबादलों के लिए फाइल डीजीपी स्तर तक जा रही है। नवा रायपुर का स्टाफ शहर में आसानी से तैनात नहीं हो पा रहा है।
- तीसरा, एयरपोर्ट और मंत्रालय जैसे संवेदनशील क्षेत्र ग्रामीण पुलिस के तहत आते हैं। जबकि एसपी (SP – Superintendent of Police) और आईजी (IG – Inspector General of Police) का दफ्तर शहर में है।
- चौथा, पुलिस मुख्यालय की 100 दिनों की समीक्षा में अपराधों का अंतर दिखा है। कमिश्नरी क्षेत्र में अपराध घटे हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में अपराध बढ़ गए हैं।
50 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च
रायपुर देहात के लिए अलग इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक इस पर 50 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे। फिलहाल ग्रामीण एसपी का स्थाई दफ्तर भी नहीं है। वे संभागीय आयुक्त कार्यालय में अस्थायी रूप से बैठ रही हैं। तीनों अतिरिक्त एसपी के पास भी स्थाई कार्यालय नहीं हैं।
नया सेटअप तैयार करने के लिए एसपी कार्यालय और पुलिस लाइन बनानी होगी। इसके अलावा महिला थाना, अजाक थाना, क्राइम ब्रांच और ट्रैफिक पुलिस का नया ढांचा लगेगा। इसके लिए नई भर्तियां भी करनी पड़ेंगी। इन वित्तीय और प्रशासनिक दिक्कतों को देखते हुए पूरी व्यवस्था बदलने की तैयारी है। पूरे जिले को एक ही पुलिस कमिश्नरी के तहत लाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
FAQ
- रायपुर में दोहरी पुलिस व्यवस्था कब से लागू है?
उत्तर: रायपुर में दोहरी पुलिस व्यवस्था पिछले 179 दिनों से लागू है। इसके तहत शहर में कमिश्नरी और देहात में पारंपरिक पुलिसिंग चल रही है। - रायपुर में दोहरी पुलिस व्यवस्था से क्या मुख्य समस्या आ रही है?
उत्तर: दोहरी व्यवस्था से पुलिस बल की कमी, तबादलों में प्रशासनिक देरी और देहात क्षेत्रों में अपराध बढ़ने जैसी समस्याएं आ रही हैं। साथ ही वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। - रायपुर में नया पुलिस जिला बनाने में कितना खर्च आने का अनुमान है?
उत्तर: रायपुर देहात के लिए नया प्रशासनिक और भौतिक ढांचा तैयार करने में 50 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आने का अनुमान है।
यह खबरें भी पढ़ें...
फर्जी मेडिकल बिल घोटाले में फंसे एमपी के 16 पुलिसकर्मियों को मिला प्रमोशन
एमपी पुलिस की समीक्षा, सीएम बोले- भर्ती बोर्ड जल्दी बनाएं, प्रमोशन प्रक्रिया तेज करें
OBC Reservation | Bhopal में विधानसभा घेराव करने निकले थे प्रदर्शकनारी, पुलिस ने बीच में ही उठा लिया
27% आरक्षण: विधानसभा घेरने पहुंचे OBC महासभा के कार्यकर्ता, पुलिस से झड़प