रायपुर इएसआईसी घोटाला : अस्पताल में नर्सों की सैलरी से 80 लाख लूटे
समझें क्या है पूरा मामला
- 12 नर्सों की सैलरी से हर महीने कटौती का आरोप।
- 3 साल में 70 से 80 लाख रुपए के घोटाले का दावा।
- पासबुक, ATM और चेकबुक एजेंसी के कब्जे में रखने के आरोप।
- यूको बैंक और अस्पताल प्रशासन की भूमिका जांच के घेरे में।
नर्सों की कमाई पर डाका
रायपुर के रावांभाटा स्थित ESIC अस्पताल में संविदा नर्सों की मेहनत की कमाई पर कथित डाका डालने का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन, प्लेसमेंट एजेंसी और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से महीनों नहीं, बल्कि वर्षों तक यह खेल चलता रहा। अब मामला महिला आयोग तक पहुंच गया है। यूको बैंक की विजलेंस टीम और सीवीसी मामले की जांच कर रहीं हैं।
12 नर्सें, 80 लाख का दावा
शिकायत के मुताबिक 12 नर्सों के खातों से हर महीने वेतन की बड़ी रकम निकाल ली जाती थी। यह सिलसिला करीब तीन साल तक चलता रहा। शिकायत में अनुमान लगाया गया है कि इस दौरान 70 से 80 लाख रुपए तक की रकम का वित्तीय नुकसान हुआ। अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल वेतन कटौती नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक शोषण का मामला होगा।
पासबुक-एटीएम भी छीन लिए गए?
पीड़ित नर्सों का आरोप है कि नियुक्ति के बाद प्लेसमेंट एजेंसी के लोगों ने उन्हें डराया-धमकाया। इसके बाद उनके बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने कब्जे में रख लिए गए। यानी खाते नर्सों के थे, लेकिन नियंत्रण किसी और के हाथ में था। इसी व्यवस्था ने पूरे कथित घोटाले की नींव रखी।
खाते में सैलरी आई, मिनटों में रकम गायब!
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप बैंकिंग प्रक्रिया को लेकर लगाए गए हैं। दावा है कि अस्पताल से जैसे ही वेतन खातों में जमा होता था, कुछ ही मिनटों के भीतर बड़ी रकम निकाल ली जाती थी। आरोप यह भी है कि प्लेसमेंट एजेंसी के लोग बैंक शाखा में बैठकर यह पूरा काम करते थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बैंक की निगरानी व्यवस्था आखिर कहां थी।
कौन-कौन हैं आरोपों के घेरे में?
शिकायत में प्लेसमेंट एजेंसी मेसर्स अनुग्रह प्रो. विजार्ड बिजनेस सोल्यूशन ग्राउंड कंपनी के प्रोपराइटर राजशेखर पांडे, मैनेजर सनी गुप्ता और सुपरवाइजर शैलेंद्र सोनकर का नाम लिया गया है। वहीं यूको बैंक की डी.डी. नगर शाखा के वर्तमान और पूर्व शाखा प्रबंधकों के साथ ESIC अस्पताल के निदेशक एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राधाकांत बेहरा और अस्पताल के अकाउंट सेक्शन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल ये आरोप शिकायत का हिस्सा हैं और इनकी जांच होना बाकी है।
अब बैंक मुख्यालय भी जांच के घेरे में
महिला आयोग ने यूको बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी कोलकाता को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। बैंक मुख्यालय ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए आयोग से निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत की प्रामाणिकता से जुड़े दस्तावेज मांगे। यानी मामला अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा।
पीड़ित बोली- मामला दबाने की कोशिश
पीड़ित नर्स तरणी साहू ने महिला आयोग को अलग से आवेदन देकर जल्द सुनवाई की मांग की। उनका आरोप है कि अस्पताल, ठेकेदार और बैंक से जुड़े लोग मिलकर मामले को दबाने या शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आशंका के चलते उन्होंने निर्धारित तारीख से पहले सुनवाई कराने की गुहार लगाई।
सख्ती के बाद पहुंचा आयोग
शिकायत के बाद महिला आयोग ने संबंधितों को बुलाया। जांच सही से हो सीसीटीवी भी मंगवाया लेकिन बैंक मैनेजर न तो आयोग पहुंचा और न ही कोई जवाब दिया। लेकिन जब टाटीबंध के थाना प्रभारी को शोकॉज नोटिस हुआ तब अनावेदक ब्रांच मैनेजर आयोग मे उपस्थित हुआ और आयोग द्वारा मांगे गये सीसीटीवी फुटेज देने के लिए तैयार हुआ।
जांच तय करेगी सच
इस पूरे मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि जांच में इनकी पुष्टि होती है तो यह संविदा कर्मचारियों के आर्थिक शोषण का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है। वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो संबंधित पक्षों को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। फिलहाल महिला आयोग, बैंक और संबंधित एजेंसियों की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।
FAQ
- रायपुर ईएसआई अस्पताल में कितने लाख का घोटाला हुआ है?
उत्तर: रायपुर के रावांभाटा ईएसआई अस्पताल में संविदा नर्सों के वेतन से करीब 70 से 80 लाख रुपए के घोटाले का दावा किया गया है। - कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) क्या है और यह किस मंत्रालय के अधीन आता है?
उत्तर: ईएसआई (ESIC) भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। यह देश के संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा देखभाल और वित्तीय लाभ प्रदान करती है। - केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) क्या है और इसका मुख्य काम क्या होता है?
उत्तर: सीवीसी (CVC) केंद्र सरकार की एक मुख्य भ्रष्टाचार विरोधी संस्था है, जो किसी भी मंत्रालय या सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार की जांच करती है। यह संस्था सीधे संसद के प्रति उत्तरदायी होती है और इसे पूरी तरह स्वायत्तता प्राप्त है।
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