ग्राम सभा की फर्जी अनुमति से लगे दो उद्योग,जांच के 1 साल बाद हुई अज्ञात पर FIR
Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दो उद्योग ग्राम सभा की फर्जी अनुमति के आधार पर स्थापित हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड और अग्रसेन स्टील एंड पॉवर लिमिटेड के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बघेल ने विधानसभा में इनके जमीन आवंटन पर सवाल उठाया।
हैरानी की बात यह है कि ग्राम सभा ने अनुमति नहीं दी। लेकिन फर्जी अनुमति तैयार कर ली गई। ग्राम सभा की बैठक के फैसले में अतिरिक्त दो लाइन जोड़कर अनुमति हासिल कर ली गई। जब इसकी जांच हुई तो यह फर्जीवाड़ा सामने आ गया। भूपेश बघेल ने कहा कि जांच के एक साल बाद क्यों एफआईआर दर्ज की गई।
सरकार से पूछा तो पता चला कि एफआईआर अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई है। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार सरपंच और सचिव को क्यों बचाना चाह रही है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने माना कि अनुमति फर्जी है और पुलिस जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के यह उद्योग नहीं लग सकते। हालांकि जमीन आवंटन के सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि राजस्व ही इस बारे में बता पाएगा।
उद्योगों को नहीं मिली पर्यावरण मंजूरी
रायपुर जिले के तिल्दा-नेवरा क्षेत्र में प्रस्तावित दो औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर विधानसभा में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सरकार ने बताया कि ग्रामसभा के प्रस्ताव में फर्जीवाड़े की शिकायत की जांच के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। वहीं संबंधित उद्योगों को अब तक पर्यावरणीय स्वीकृति भी नहीं मिली है।
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड,ग्राम-अल्दा और अग्रसेन स्टील एंड पावर लिमिटेड,देवरी की ओर से छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल में जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के तहत अनुमति के लिए आवेदन ही नहीं किया गया है। इसलिए इन परियोजनाओं से संबंधित ग्रामसभा का कोई प्रस्ताव पर्यावरण संरक्षण मंडल को प्राप्त नहीं हुआ।
फर्जीवाड़े की जांच
सरकार ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत अल्दा की ग्रामसभा के प्रस्ताव में फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच के लिए तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत तिल्दा, तत्कालीन नायब तहसीलदार और तहसीलदार की तीन सदस्यीय संयुक्त समिति बनाई गई। समिति ने 6 जून 2025 को जांच की और अपनी रिपोर्ट 30 जून 2025 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को सौंप दी।
जांच में सामने आया कि ग्रामसभा में उद्योग को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। हालांकि ग्रामसभा की कार्यवाही पंजी की अंतिम दो पंक्तियां किसने लिखीं इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। यही बात पूरे मामले को संदेह के घेरे में लाती है।
एक साल बाद एफआईआर
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने आगे कार्रवाई की। सरकार ने बताया कि अनुविभागीय अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ 22 जून 2026 को तिल्दा-नेवरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है
कि ग्रामसभा की कार्यवाही में कथित छेड़छाड़ किसने की। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इन औद्योगिक परियोजनाओं को अभी तक भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। यानी परियोजनाएं अभी आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी हैं।
IMP FACTS
स्थान: तिल्दा-नेवरा, रायपुर
उद्योग: बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड (अल्दा), अग्रसेन स्टील एंड पावर लिमिटेड (देवरी)
आरोप: ग्रामसभा की फर्जी अनुमति के आधार पर उद्योग लगाने का आरोप।
जांच समिति: CEO जनपद पंचायत, नायब तहसीलदार और तहसीलदार की 3 सदस्यीय समिति।
जांच रिपोर्ट: 30 जून 2025 को सौंपी गई।
FIR: 22 जून 2026 को तिल्दा-नेवरा थाने में अज्ञात के खिलाफ दर्ज।
जांच निष्कर्ष: ग्रामसभा ने NOC नहीं दी थी, कार्यवाही पंजी में दो लाइन जोड़ने की बात सामने आई।
पर्यावरण मंजूरी: दोनों उद्योगों को अब तक पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिली।
FAQ
- किन उद्योगों पर फर्जी ग्रामसभा अनुमति का आरोप है?
बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड (अल्दा) और अग्रसेन स्टील एंड पावर लिमिटेड (देवरी) पर आरोप है। - जांच में क्या सामने आया?
जांच में ग्रामसभा की कार्यवाही पंजी में दो लाइन जोड़कर अनुमति दिखाने की बात सामने आई। - FIR कब और किसके खिलाफ दर्ज हुई?
22 जून 2026 को तिल्दा-नेवरा थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई।
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