रायपुर इंडोर स्टेडियम : खेलों की जगह धार्मिक आयोजनों का बोलबाला
समझें क्या है पूरा मामला
- रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम का निर्माण 2010 में हुआ था।
- इसे 10 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था।
- इसका मकसद शहर में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना था।
- तीन साल में यहां 36 आयोजनों में से सिर्फ तीन खेल मैच हुए।
- अब इसके रिनोवेशन पर सात करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
इंडोर स्टेडियम में खेल का अकाल
रायपुर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा सपना देखा गया था। इसके लिए वर्ष 2010 में सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम बनाया गया। इसकी निर्माण लागत करीब 10 करोड़ रुपए आई थी। उम्मीद थी कि यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताएं होंगी। स्थानीय खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलने का दावा किया गया था। लेकिन अब यह स्टेडियम अपने मुख्य उद्देश्य से भटक गया है। यहां खेल प्रतियोगिताओं के स्थान पर सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं।
3 साल के आंकड़े चौंकाते हैं
पिछले तीन वर्षों में इस परिसर में कुल 36 कार्यक्रम आयोजित किए गए। आंकड़ों के अनुसार इनमें से केवल 3 आयोजन खेल से जुड़े थे। शेष 33 धार्मिक आयोजन, सामाजिक और व्यावसायिक श्रेणी के रहे। वर्ष 2024 में 15 आयोजनों में से सिर्फ एक खेल स्पर्धा हुई। मई 2024 में एमएमए (MMA – Mixed Martial Arts) नेशनल चैंपियनशिप आयोजित की गई थी। वर्ष 2025 में 13 आयोजनों में से केवल 1 किकबॉक्सिंग स्पर्धा हो सकी। वर्ष 2026 में 8 आयोजनों में एक वॉलीबॉल प्रतियोगिता कराई गई। हर साल औसतन सिर्फ एक खेल आयोजन यहां दर्ज हुआ।
दफ्तर खुले, पर खेल नहीं हुए
स्टेडियम परिसर में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ (COA – Chhattisgarh Olympic Association) का दफ्तर है। साथ ही यहां जिला शतरंज संघ का कार्यालय भी संचालित होता है। इन दफ्तरों से प्रदेश भर की खेल गतिविधियों का संचालन किया जाता है। इसके बावजूद स्टेडियम में खेल प्रतियोगिताओं की संख्या बहुत कम है। इससे खेल संघों की कार्यप्रणाली और सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए जगह नहीं मिल पा रही है।
किराए के खेल में उलझा प्रशासन
नगर निगम रायपुर (RMC – Raipur Municipal Corporation) हर साल मेंटेनेंस पर भारी बजट खर्च करता है। एसी, लाइट, कुर्सियों और सफाई के कारण दैनिक किराया 4.13 लाख रुपए है। व्यावसायिक संस्थाएं और धार्मिक ट्रस्ट यह राशि आसानी से चुका देते हैं। लेकिन छोटे खेल संघ इतना अधिक किराया देने में असमर्थ रहते हैं। सरकारी आयोजनों से नगर निगम को कोई किराया प्राप्त नहीं होता। इनका कोई अलग से पारदर्शी रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता।
रिनोवेशन बजट पर उठे सवाल
अब नगर निगम इसके नवीनीकरण पर 7 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। स्टेडियम की सुविधाओं को फिर से चमकाने की योजना तैयार हुई है। लेकिन स्थानीय खेल प्रेमी और एथलीट इस योजना से असंतुष्ट हैं। उनका कहना है कि भारी खर्च के बाद भी खेल आयोजनों में वृद्धि नहीं होगी। जब तक किराए की दरों में छूट नहीं मिलेगी, स्थिति नहीं बदलेगी।
FAQ
- रायपुर इंडोर स्टेडियम कब बना था और इसकी लागत क्या थी?
उत्तर: रायपुर का सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम वर्ष 2010 में बनाया गया था। इसके निर्माण में करीब 10 करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसका मुख्य उद्देश्य इनडोर खेलों को बढ़ावा देना था। - रायपुर इंडोर स्टेडियम में पिछले 3 वर्षों में कितने खेल आयोजन हुए?
उत्तर: पिछले 3 वर्षों में स्टेडियम में कुल 36 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें से केवल 3 आयोजन खेल प्रतियोगिताओं के थे। बाकी 33 कार्यक्रम धार्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक थे। - रायपुर इंडोर स्टेडियम रिनोवेशन पर कितना बजट खर्च किया जा रहा है?
उत्तर: नगर निगम रायपुर इस इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार और रिनोवेशन पर लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। इसके मेंटेनेंस और सुविधाओं को सुधारने के लिए यह बजट तय किया गया है।
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