एक हाथ में हथकड़ी दूसरे में एडमिट कार्ड : रायपुर में कैदी ने दी नीट परीक्षा

Umeshwari Baghel | Jun 21, 2026, 16:58 IST
रायपुर में चर्चा का विषय बनी NEET परीक्षा
रायपुर में NEET-UG री-एग्जाम के दौरान जेल में बंद आरोपी छात्र ने हाईकोर्ट की अनुमति पर परीक्षा दी। हत्या उकसाने के मामले में बंद कुणाल तरुणकर को कड़ी सुरक्षा में परीक्षा केंद्र लाया गया। हथकड़ी में परीक्षा देने का यह मामला चर्चा में है।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में NEET-UG री-एग्जाम के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है जहा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद एक आरोपी छात्र को हाईकोर्ट की अनुमति के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्र ले जाया गया, जहां उसने मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी। आरोपी छात्र कुणाल तरुणकर को हथकड़ी और पुलिस निगरानी के बीच WRS कॉलोनी स्थित केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र पर परीक्षा में शामिल कराया गया।



यह घटना केवल एक परीक्षा प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि न्यायिक अनुमति, सुरक्षा व्यवस्था और शिक्षा के अधिकार के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई।



हाईकोर्ट की अनुमति के बाद मिली परीक्षा देने की छूट

मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू अदालत का हस्तक्षेप रहा। जानकारी के अनुसार, आरोपी छात्र कुणाल तरुणकर को NEET-UG री-एग्जाम में शामिल होने की अनुमति छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद दी गई थी। अदालत के निर्देशों के बाद जेल प्रशासन ने आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किए और उसे परीक्षा केंद्र तक ले जाने की व्यवस्था की।



कड़ी सुरक्षा के बीच आरोपी को रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर लाया गया और पुलिस एस्कॉर्ट में परीक्षा केंद्र पहुंचाया गया। परीक्षा केंद्र पर भी सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम किए गए ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।



यह पूरा घटनाक्रम न्यायिक व्यवस्था के उस सिद्धांत को दर्शाता है जिसमें विचाराधीन कैदी को उसके बुनियादी अधिकारों के तहत परीक्षा देने का अवसर दिया जा सकता है, बशर्ते कानून व्यवस्था प्रभावित न हो।



हथकड़ी में परीक्षा

जब कुणाल तरुणकर परीक्षा केंद्र पर पहुंचा तो वह हथकड़ी में था और कड़ी पुलिस निगरानी में बैठकर परीक्षा दी। यह दृश्य अपने आप में असामान्य था, जिसने वहां मौजूद लोगों और प्रशासन दोनों का ध्यान खींचा।



परीक्षा के दौरान सुरक्षा बलों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई ताकि परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार, कैदी को परीक्षा देने की अनुमति कोर्ट के आदेश पर ही दी गई थी, इसलिए नियमों के तहत सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं।



इस घटना ने एक तरफ न्यायिक प्रक्रिया की लचीलापन दिखाया, तो दूसरी तरफ यह भी सवाल उठाए कि क्या अपराध गंभीर होने के बावजूद शैक्षणिक अवसर देना सही है या नहीं।



आत्महत्या उकसाने के मामले में जेल में बंद है आरोपी

जानकारी के अनुसार, कुणाल तरुणकर रायपुर सेंट्रल जेल में एक गंभीर मामले में न्यायिक हिरासत में बंद है। उस पर एक युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। बताया जाता है कि 20 अप्रैल को 20 वर्षीय युवती ने आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद जांच में कई डिजिटल और लिखित साक्ष्य सामने आए।



पुलिस जांच के आधार पर मृतका की डायरी और मोबाइल से मिले तथ्यों के आधार पर कुणाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। आरोप है कि वह युवती पर लगातार मिलने का दबाव बनाता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था।



इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत कार्रवाई की गई और उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।



NEET री-एग्जाम और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह मामला क्यों बना चर्चा

NEET-UG री-एग्जाम पहले से ही देशभर में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर चर्चा में रहा है। लाखों अभ्यर्थियों के बीच इस परीक्षा को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह मेडिकल प्रवेश का मुख्य द्वार है।



इसी बीच रायपुर का यह मामला इसलिए सुर्खियों में आया क्योंकि इसमें एक विचाराधीन कैदी को भी परीक्षा देने का अवसर मिला। कोर्ट के आदेश के बाद की गई यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि शिक्षा के अधिकार को न्याय व्यवस्था कुछ सीमाओं के भीतर प्राथमिकता देती है।



हालांकि, इस घटना ने सोशल मीडिया और शैक्षणिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी पैदा की हैं। कुछ लोग इसे संवैधानिक अधिकारों के तहत सही कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि गंभीर आरोपों में बंद व्यक्ति को इस तरह की सुविधा देना सही नहीं है।



कानून, शिक्षा और न्याय के बीच संतुलन का उदाहरण

यह मामला सिर्फ एक परीक्षा या एक आरोपी छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय न्याय व्यवस्था में अधिकारों और प्रतिबंधों के संतुलन का उदाहरण भी है। अदालत द्वारा दिया गया आदेश यह संकेत देता है कि किसी भी व्यक्ति का शैक्षणिक भविष्य केवल आरोपों के आधार पर पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता।साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों में सुरक्षा और न्यायिक नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



IMP FACTS

रायपुर में NEET-UG री-एग्जाम के दौरान अनोखा मामला सामने आया।


जेल में बंद आरोपी छात्र कुणाल तरुणकर ने परीक्षा दी।


हाईकोर्ट की अनुमति के बाद उसे परीक्षा में शामिल होने की इजाजत मिली।


आरोपी को कड़ी सुरक्षा और हथकड़ी के साथ परीक्षा केंद्र लाया गया।


वह युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में न्यायिक हिरासत में है।


यह मामला शिक्षा के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया पर चर्चा का विषय बन गया है।



निष्कर्ष

रायपुर का यह मामला आने वाले समय में कानूनी और शैक्षणिक चर्चाओं का हिस्सा बना रहेगा। NEET-UG जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा मंच पर एक विचाराधीन कैदी की उपस्थिति ने व्यवस्था की जटिलताओं को उजागर किया है। यह घटना न्याय, शिक्षा और सामाजिक दृष्टिकोण के बीच एक संवेदनशील संतुलन की याद दिलाती है, जहां हर निर्णय कई स्तरों पर प्रभाव डालता है।



FAQ

  1. क्या जेल में बंद आरोपी को परीक्षा देने की अनुमति मिल सकती है?
    हां, यदि कोर्ट अनुमति देता है तो विचाराधीन कैदी सुरक्षा व्यवस्था के साथ परीक्षा दे सकता है।
  2. रायपुर के मामले में छात्र को परीक्षा देने की अनुमति किसने दी?
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद आरोपी छात्र को NEET-UG री-एग्जाम देने की अनुमति मिली।
  3. आरोपी छात्र किस मामले में जेल में बंद है?
    वह एक युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने के गंभीर आरोप में रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में है।

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